'एक बोतल जल पी लीजिए, दोनों किडनियां ठीक हो जाएंगी!' प्रेमानंद महाराज को बरेली के महंत की खुली चुनौती

मनोना धाम के महंत ओमेंद्र महाराज का कथित वीडियो चर्चा में, बोले—दवाइयां खा सकते हैं तो यह जल क्यों नहीं? किडनी ठीक होने की गारंटी जैसे दावों पर उठे वैज्ञानिक सवाल, क्या आस्था के सहारे संभव है गंभीर बीमारी का इलाज?

Oct 8, 2026 - 06:21
'एक बोतल जल पी लीजिए, दोनों किडनियां ठीक हो जाएंगी!' प्रेमानंद महाराज को बरेली के महंत की खुली चुनौती

मथुरा/बरेली। वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज अपनी आध्यात्मिक शिक्षाओं और राधा रानी की भक्ति के कारण देश-दुनिया में करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बने हुए हैं। लेकिन उनकी किडनी की बीमारी को लेकर अब एक नया विवाद चर्चा में है। सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो में बरेली के प्रसिद्ध मनोना धाम के महंत ओमेंद्र महाराज ने ऐसा दावा किया है, जिसने आस्था और चिकित्सा विज्ञान को लेकर नई बहस छेड़ दी है। महंत का कहना है कि यदि प्रेमानंद महाराज एक बार मनोना धाम का जल पी लें तो उनकी दोनों किडनियां निश्चित रूप से ठीक हो जाएंगी।

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'दुनिया ठीक हो रही है तो प्रेमानंद महाराज क्यों नहीं होंगे?'

वायरल बताए जा रहे वीडियो में महंत ओमेंद्र महाराज एक युवक से बातचीत करते दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। युवक संत प्रेमानंद महाराज के लिए मनोना धाम का जल लेने पहुंचा था। बातचीत के दौरान महंत ने दावा किया कि जब इस जल से दूसरे लोगों को लाभ मिल रहा है तो प्रेमानंद महाराज को क्यों नहीं मिलेगा? उन्होंने यहां तक कहा कि यदि प्रेमानंद महाराज यह जल पी लें तो उनकी किडनी ठीक हो जाएगी।

महंत ने यह भी दावा किया कि कई श्रद्धालु पहले भी प्रेमानंद महाराज के लिए मनोना धाम से जल लेकर जा चुके हैं। कुछ लोग जल ले जाते समय वीडियो भी बनवाते हैं, लेकिन बाद में यह जानकारी नहीं मिलती कि वह जल प्रेमानंद महाराज तक पहुंचा या उन्होंने उसका सेवन किया भी अथवा नहीं।

'दवाई खा सकते हैं तो जल क्यों नहीं पी सकते?'

वीडियो में महंत ओमेंद्र महाराज ने प्रेमानंद महाराज के इलाज को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जब महाराज दवाइयों का सेवन कर सकते हैं तो मनोना धाम का जल पीने में क्या आपत्ति है? महंत ने युवक से आग्रह किया कि वह जल की बोतल प्रेमानंद महाराज तक अवश्य पहुंचाए और उनसे इसका सेवन करने के लिए कहे।

महंत का कहना था कि पहले प्रेमानंद महाराज जल पीकर देखें और उसके बाद बताएं कि उन्हें लाभ हुआ या नहीं। इस पर युवक ने जल पहुंचाने का भरोसा दिलाया। हालांकि, युवक वास्तव में प्रेमानंद महाराज तक पहुंचा या नहीं, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

'तंत्र-मंत्र नहीं, राधा रानी का जल समझकर पी लीजिए'

महंत ओमेंद्र महाराज ने अपने कथित संदेश में प्रेमानंद महाराज से आग्रह किया कि वह इस जल को किसी प्रकार का तंत्र-मंत्र, जादू-टोना या चमत्कार न समझें। उन्होंने इसे ईश्वर की कृपा बताते हुए राधा रानी का जल समझकर ग्रहण करने की अपील की।

महंत ने विश्वास जताया कि इसके सेवन से प्रेमानंद महाराज स्वस्थ हो जाएंगे। हालांकि, उनका यह दावा व्यक्तिगत धार्मिक विश्वास पर आधारित है। किसी विशेष धार्मिक स्थल के जल से गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त किडनी दोबारा सामान्य होने का विश्वसनीय वैज्ञानिक प्रमाण सामने नहीं आया है।

प्रेमानंद महाराज की बीमारी को लेकर क्या है जानकारी?

संत प्रेमानंद महाराज लंबे समय से किडनी संबंधी गंभीर बीमारी से जूझने की खबरों को लेकर चर्चा में रहे हैं। उनकी दोनों किडनियों के लगभग 90 प्रतिशत तक प्रभावित होने की बात भी विभिन्न चर्चाओं में सामने आती रही है। उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंतित कई श्रद्धालु किडनी दान करने की इच्छा भी व्यक्त कर चुके हैं।

हालांकि, उनकी किडनी की वर्तमान कार्यक्षमता, चिकित्सकीय जांच रिपोर्ट और बीमारी की वास्तविक स्थिति की पुष्टि के लिए उनके उपचाररत चिकित्सकों या आश्रम की अधिकृत जानकारी आवश्यक है। इसलिए 90 प्रतिशत किडनी खराब होने के दावे को स्वतंत्र रूप से प्रमाणित चिकित्सकीय तथ्य नहीं माना जा सकता।

क्या सिर्फ जल पीने से ठीक हो सकती हैं खराब किडनियां?

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या किसी धार्मिक स्थल का जल पीने से गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त किडनियां वास्तव में ठीक हो सकती हैं?

अमेरिका के प्रतिष्ठित नेशनल किडनी फाउंडेशन के अनुसार, अंतिम चरण की किडनी बीमारी में किडनी की कार्यक्षमता अत्यधिक कम हो जाती है। ऐसी स्थिति में डायलिसिस और किडनी प्रत्यारोपण प्रमुख चिकित्सा विकल्प हैं। संस्था स्पष्ट करती है कि किडनी फेल होने की स्थिति में केवल किसी पेय पदार्थ के सेवन से बीमारी ठीक होने का स्थापित इलाज उपलब्ध नहीं है। 

इसके अतिरिक्त, गंभीर किडनी रोग से पीड़ित मरीजों को कई बार तरल पदार्थों के सेवन पर भी चिकित्सकीय नियंत्रण रखना पड़ता है। ऐसे में बिना चिकित्सकीय सलाह के किसी विशेष जल या अन्य पदार्थ का सेवन करना जोखिमपूर्ण हो सकता है।

आस्था अपनी जगह, लेकिन क्या इलाज की गारंटी देना उचित है?

मनोना धाम के महंत का कथित बयान एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक विश्वास व्यक्ति के निजी अधिकार हैं, लेकिन किसी गंभीर बीमारी को निश्चित रूप से ठीक करने का दावा चिकित्सा विज्ञान की कसौटी पर भी परखा जाना चाहिए।

किसी श्रद्धालु का धार्मिक जल में विश्वास होना अलग बात है, लेकिन दोनों किडनियों के ठीक होने की गारंटी देना बिल्कुल अलग विषय है। ऐसे दावों के समर्थन में मरीजों की प्रमाणित चिकित्सकीय रिपोर्ट, उपचार का विवरण और स्वतंत्र विशेषज्ञों की जांच आवश्यक होती है।

विशेषज्ञ चिकित्सा संस्थानों की जानकारी के अनुसार, किडनी रोग का उपचार बीमारी की अवस्था, जांच रिपोर्ट और मरीज की स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है। धार्मिक आस्था को आवश्यक चिकित्सकीय उपचार का विकल्प मानना खतरनाक हो सकता है। 

अब प्रेमानंद महाराज की प्रतिक्रिया का इंतजार

महंत ओमेंद्र महाराज के कथित बयान के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मनोना धाम का जल प्रेमानंद महाराज तक पहुंचाया गया है? क्या उनके आश्रम को इस दावे की जानकारी है? और क्या प्रेमानंद महाराज या उनके प्रतिनिधि इस पर कोई प्रतिक्रिया देंगे?

फिलहाल इस विशेष दावे पर प्रेमानंद महाराज अथवा उनके आश्रम की कोई सत्यापित आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हो सकी है।

इस मामले में धार्मिक आस्था के सम्मान के साथ यह समझना भी आवश्यक है कि किसी बीमारी से निश्चित रूप से मुक्ति दिलाने का दावा वैज्ञानिक प्रमाण के बिना स्वीकार नहीं किया जा सकता। अब देखना होगा कि मनोना धाम के महंत के इस कथित संदेश पर वृंदावन से कोई प्रतिक्रिया सामने आती है या नहीं।

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