प्रेमानंद महाराज को लेकर वृंदावन में बढ़ी हलचल, अब दोनों किडनियों की सरकारी जांच की मांग : शिष्य की मौत से लेकर विराट कोहली तक विवादों की लंबी फेहरिस्त
श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट के अध्यक्ष आशुतोष ब्रह्मचारी ने जिलाधिकारी को भेजा पत्र, रसिक दुलारी शरण की मौत और लापता बच्चों की शिकायतों पर उठे सवाल, विराट कोहली के प्रवक्ता ने पांच करोड़ रुपये के आरोपों को बताया निराधार।
मथुरा/वृंदावन। राधा रानी की भक्ति और आध्यात्मिक प्रवचनों के लिए देश-दुनिया में प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं। इस बार सवाल केवल उनके स्वास्थ्य को लेकर नहीं, बल्कि उनके आसपास रहने वाले शिष्यों, आश्रम से जुड़े घटनाक्रम और कुछ गंभीर आरोपों को लेकर भी उठ रहे हैं। एक ओर शिष्य रसिक दुलारी शरण की कथित आत्महत्या को लेकर निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है, तो दूसरी ओर कुछ परिवारों द्वारा बच्चों के लापता होने की शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है। इसी बीच श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं माता शाकुम्भरी पीठ के पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर प्रेमानंद महाराज की दोनों किडनियों की सरकारी चिकित्सकीय जांच कराने की मांग की है।
किडनी की सरकारी जांच और रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग
श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट के अध्यक्ष आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने जिलाधिकारी को भेजे पत्र में प्रेमानंद महाराज की दोनों किडनियों की सरकारी अस्पताल में जांच कराने और चिकित्सकीय रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है। उनका कहना है कि वह इससे पहले भी तीन जुलाई 2024 को तत्कालीन जिलाधिकारी को पत्र लिखकर इस संबंध में प्रशासन का ध्यान आकर्षित कर चुके हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी निजी और संवेदनशील होती है। ऐसे में चिकित्सकीय जांच और रिपोर्ट सार्वजनिक करने के लिए उचित कानूनी आधार और निर्धारित प्रक्रिया आवश्यक होगी।
रसिक दुलारी शरण की मौत से उठे गंभीर सवाल
प्रेमानंद महाराज से जुड़े हालिया विवादों में सबसे गंभीर मामला उनके शिष्य रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी की मौत का है। सितंबर के अंतिम सप्ताह में वृंदावन के वाराहघाट क्षेत्र स्थित गुरु कृपा कुंज की चार मंजिला इमारत से गिरने के बाद उनकी मौत हो गई थी। घटना के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग भी सामने आई। शुरुआती जांच में आत्महत्या की आशंका जताई गई, लेकिन मौत की वास्तविक परिस्थितियों को लेकर सवाल बने हुए हैं। इस घटना के बाद आश्रम की व्यवस्थाओं में बदलाव की खबरें भी सामने आई थीं।
लापता बच्चों की शिकायतों ने बढ़ाई चिंता
इसी बीच कुछ परिवारों द्वारा अपने बच्चों के लापता होने की शिकायत लेकर वृंदावन पहुंचने की बात भी सामने आई है। हालांकि, इन शिकायतों से संबंधित प्राथमिकी, पुलिस जांच और बच्चों के किसी आश्रम से संबंध की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। ऐसे में इन मामलों को सीधे प्रेमानंद महाराज या उनके आश्रम से जोड़ना उचित नहीं होगा। यदि परिवारों ने औपचारिक शिकायतें दर्ज कराई हैं, तो पुलिस की जांच से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
विराट कोहली को पांच करोड़ रुपये देने का दावा, प्रवक्ता ने किया खारिज
वृंदावन में चल रहे विवादों के बीच भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली का नाम भी चर्चा में आया। श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलहारी ने दावा किया कि विराट कोहली को प्रेमानंद महाराज के आश्रम लाने के लिए पांच करोड़ रुपये दिए गए थे। उन्होंने इस कथित व्यवस्था के पीछे कुछ संपत्ति कारोबारियों और प्रचार से जुड़ी संस्थाओं की भूमिका होने का भी आरोप लगाया। हालांकि, सात अक्टूबर को विराट कोहली के प्रवक्ता ने इन आरोपों को पूरी तरह गलत और निराधार बताया। प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि कोहली प्रेमानंद महाराज के दर्शन अपनी व्यक्तिगत श्रद्धा और आध्यात्मिक आस्था के कारण करते हैं।
खंडन के बाद भी पीछे नहीं हटे दिनेश फलहारी
विराट कोहली के प्रवक्ता के बयान के बाद भी दिनेश फलहारी अपने आरोपों से पीछे नहीं हटे। उन्होंने कथित भुगतान की व्यवस्था को लेकर अपने दावे दोहराए और मामले की जांच की मांग उठाई। प्रकाशित रिपोर्टों में उनके हवाले से दो करोड़ रुपये पहले और तीन करोड़ रुपये बाद में दिए जाने का आरोप भी सामने आया है। हालांकि, इन दावों की पुष्टि करने वाले स्वतंत्र वित्तीय दस्तावेज, बैंक लेन-देन या किसी जांच एजेंसी के निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं हुए हैं। इसलिए पांच करोड़ रुपये के भुगतान को प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।
संत समाज में भी उठे सवाल, शिष्यों के व्यवहार पर जताई चिंता
चतु:सम्प्रदाय वैष्णव परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत फूलडोल बिहारी दास महाराज ने भी प्रेमानंद महाराज के आसपास रहने वाले कुछ शिष्यों के व्यवहार को लेकर चिंता जताई है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, उन्होंने शिष्य परिकर में कथित गुटबाजी और अनुयायियों के व्यवहार से उत्पन्न विवादों पर ध्यान देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने प्रेमानंद महाराज को सिद्ध साधक बताते हुए कहा कि संत को अपना ध्यान भक्ति और साधना पर केंद्रित रखना चाहिए। उनके अनुसार, संत के आसपास रहने वाले लोगों का आचरण भी उनकी सार्वजनिक छवि को प्रभावित करता है। हालांकि, उनके इन कथनों की स्वतंत्र प्राथमिक-स्रोत पुष्टि अभी आवश्यक है।
विवादों के बीच केली कुंज पहुंचे प्रेमानंद महाराज
इन घटनाक्रमों के बीच आठ अक्टूबर को प्रेमानंद महाराज के वृंदावन स्थित केली कुंज आश्रम पहुंचने की खबर भी सामने आई। प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, वह करीब 15 मिनट वहां रुके और इसके बाद अपने गुरु के पास रवाना हो गए। रसिक दुलारी शरण की मौत के बाद उनके इस दौरे को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, इस यात्रा को किसी आरोप की स्वीकारोक्ति या जांच से जोड़कर नहीं देखा जा सकता।
अब प्रशासन की जांच और आधिकारिक जवाब पर टिकी निगाहें
पूरे घटनाक्रम में कई अलग-अलग सवाल सामने आए हैं। रसिक दुलारी शरण की मौत की जांच किस दिशा में आगे बढ़ रही है? लापता बच्चों से संबंधित शिकायतों की वास्तविक स्थिति क्या है? आशुतोष ब्रह्मचारी के पत्र पर जिला प्रशासन क्या निर्णय लेगा? और विराट कोहली पर लगाए गए पांच करोड़ रुपये के आरोपों के समर्थन में क्या कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत किया जाएगा?
प्रेमानंद महाराज के करोड़ों अनुयायी उनके आध्यात्मिक विचारों से जुड़े हैं। ऐसे में धार्मिक आस्था और सार्वजनिक जवाबदेही के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। किसी भी आरोप को बिना प्रमाण सच मानना उचित नहीं है, लेकिन गंभीर सवालों की निष्पक्ष जांच भी जरूरी है। फिलहाल इन विवादों पर प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया और जांच के निष्कर्षों का इंतजार है।
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