ग्रेट वैल्यू शरणम में अतिरिक्त FAR विवाद पर SC का बड़ा फैसला, AoA की याचिका खारिज
सेक्टर-107 में चार एकड़ जमीन पर प्रस्तावित Ekanam परियोजना को लेकर था विवाद, सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप से किया इनकार
नोएडा। सेक्टर-107 स्थित ग्रेट वैल्यू शरणम सोसाइटी में अतिरिक्त फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। ग्रेट वैल्यू शरणम अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (AoA) की ओर से अतिरिक्त FAR को चुनौती देते हुए दाखिल याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। अदालत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें AoA की याचिका पहले ही खारिज की जा चुकी थी।
न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एम. पंचोली की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि वह हाईकोर्ट के चुनौती दिए गए फैसले और आदेश में हस्तक्षेप करने के इच्छुक नहीं है। इसके बाद AoA की Special Leave Petition (SLP) खारिज कर दी गई। अदालत ने लंबित आवेदनों, यदि कोई हों, का भी निस्तारण कर दिया।
20 एकड़ जमीन से जुड़ा है पूरा मामला
यह पूरा विवाद करीब 20 एकड़ जमीन से जुड़ा है, जिसे नोएडा प्राधिकरण ने वर्ष 2010 से 2015 के बीच डेवलपर ग्रेट वैल्यू रियल्टी को लीज पर दिया था। वर्ष 2017 में इस जमीन का लेआउट स्वीकृत किया गया। इसके बाद डेवलपर ने करीब 16 एकड़ क्षेत्र में ग्रेट वैल्यू शरणम परियोजना विकसित की, जबकि लगभग चार एकड़ जमीन भविष्य के विकास के लिए छोड़ी गई।
बाद में इसी चार एकड़ जमीन पर डेवलपर ने Ekanam नाम से नई आवासीय परियोजना प्रस्तावित की। इसी परियोजना के लिए अतिरिक्त FAR की मांग की गई थी।
46 मंजिला टावर में 280 आवास प्रस्तावित
डेवलपर के अनुसार Ekanam परियोजना में 46 मंजिला आवासीय टावर प्रस्तावित है। इसमें तीन और चार बेडरूम वाले कुल 280 आवास विकसित किए जाने हैं। इन आवासों का क्षेत्रफल करीब 3,525 वर्ग फुट से 5,525 वर्ग फुट तक बताया गया है।
डेवलपर के मुताबिक परियोजना का निर्माण वर्ष 2025 में शुरू हो चुका है और इसे वर्ष 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
1,440 खरीदारों की कराई गई थी सहमति की जांच
अतिरिक्त FAR को मंजूरी देने से पहले नोएडा प्राधिकरण ने होमबायर्स की सहमति का सत्यापन कराया था। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार कुल 1,440 खरीदारों की सहमति का सत्यापन किया गया।
इनमें से 978 खरीदारों ने अतिरिक्त FAR के पक्ष में सहमति जताई, जबकि 228 खरीदारों ने इसका विरोध किया।
इसके बाद नोएडा प्राधिकरण ने दिसंबर 2024 में 0.6 अतिरिक्त FAR को मंजूरी दी। इसके बाद जून 2025 में परियोजना के संशोधित भवन मानचित्र को भी मंजूरी प्रदान की गई।
AoA ने अतिरिक्त FAR पर जताई थी आपत्ति
ग्रेट वैल्यू शरणम AoA ने अतिरिक्त FAR की मंजूरी का विरोध करते हुए तर्क दिया था कि मूल ग्रुप हाउसिंग परियोजना के भीतर उपलब्ध अतिरिक्त FAR का इस्तेमाल मौजूदा निवासियों की कॉमन सुविधाओं और सामुदायिक बुनियादी ढांचे को बेहतर करने के लिए किया जाना चाहिए।
एसोसिएशन ने चार एकड़ जमीन पर अलग आवासीय परियोजना विकसित करने और उसके लिए अतिरिक्त FAR दिए जाने को चुनौती दी थी।
राज्य सरकार और हाईकोर्ट में भी नहीं मिली राहत
AoA ने सबसे पहले राज्य सरकार के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। अक्टूबर 2025 में राज्य सरकार ने उसकी याचिका खारिज कर दी।
इसके बाद एसोसिएशन ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया। हाईकोर्ट ने जून 2026 में AoA की याचिका खारिज कर दी।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि मामले में पार्क, खुले स्थान या कॉमन सुविधाओं पर अतिक्रमण का मुद्दा सामने नहीं आता। साथ ही परियोजना में ऐसी कोई छिपी हुई तब्दीली भी सामने नहीं आई, जिसकी जानकारी खरीदारों को नहीं दी गई हो।
हाईकोर्ट के इसी फैसले को AoA ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले में नहीं किया हस्तक्षेप
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान पीठ ने हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। इसके साथ ही AoA की SLP खारिज हो गई।
इसका सीधा अर्थ यह है कि इस SLP के जरिए अतिरिक्त FAR की मंजूरी को चुनौती देने में AoA को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली और हाईकोर्ट का फैसला कायम रहा।
डेवलपर ने फैसले का किया स्वागत
डेवलपर के अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं मिला और SLP खारिज कर दी गई।
वहीं, ग्रेट वैल्यू रियल्टी के निदेशक पायस अग्रवाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से मामले को लेकर स्पष्टता आई है। उन्होंने कहा कि कंपनी अब परियोजना पर आगे ध्यान केंद्रित करेगी और जिम्मेदार विकास के प्रति प्रतिबद्ध है।
अब Ekanam परियोजना पर रहेगी नजर
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब इस मामले में आगे की नजर Ekanam परियोजना के निर्माण, स्वीकृत मानचित्र, अतिरिक्त FAR के इस्तेमाल और परियोजना की निर्धारित शर्तों के अनुपालन पर रहेगी।
ग्रेट वैल्यू शरणम के निवासियों के लिए भी यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण रहा है क्योंकि प्रस्तावित परियोजना उसी मूल लीज वाली जमीन के बचे हुए चार एकड़ हिस्से पर विकसित की जा रही है। अब सुप्रीम कोर्ट में SLP खारिज होने के बाद परियोजना से जुड़े विकास कार्य आगे बढ़ने की स्थिति में हैं।
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