सरकारी सर्किट हाउस के नाम पर रात का खनन? तहलका खबर की पड़ताल में निजी कॉलोनी तक मिट्टी पहुंचने का दावा, प्रशासन ने दिए जांच के आदेश

Aug 1, 2026 - 14:29

मथुरा । थाना महावन क्षेत्र के अंतर्गत चिंताहरण के पास नगला भीमनगर में रात के समय किए जा रहे मिट्टी खनन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। द तहलका खबर की पड़ताल में दावा किया गया है कि जिस मिट्टी को अधिकारियों द्वारा प्रारंभिक तौर पर सरकारी सर्किट हाउस निर्माण के लिए बताया गया था, वह बाद में गोवर्धन चौराहा स्थित निर्माणाधीन निजी कॉलोनी "श्री वृंदा क्रिस्टल" में पहुंचती हुई दिखाई दी। मामले के सामने आने के बाद प्रशासन ने जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।

28 जुलाई की रात सामने आया मामला

तहलका खबर को 28 जुलाई 2026 की रात सूचना मिली कि नगला भीमनगर में खेतों से जेसीबी और डंपरों के माध्यम से बड़े पैमाने पर मिट्टी का खनन किया जा रहा है। सूचना मिलने पर सबसे पहले एसडीएम महावन प्राजक्ता त्रिपाठी को फोन कर पूरे मामले से अवगत कराया गया। एसडीएम ने तहसीलदार का मोबाइल नंबर देते हुए मौके की लोकेशन और वीडियो भेजने के लिए कहा।

लोकेशन और वीडियो साझा किए जाने के बाद तहसीलदार का फोन आया। उन्होंने बताया कि उनकी ड्यूटी मेले में लगी हुई है।

पुलिस को भी दी गई सूचना

इसके बाद थाना महावन के प्रभारी निरीक्षक को फोन कर पूरे मामले की जानकारी दी गई। उस समय उनके मीटिंग में होने की बात कही गई। उनके हमराह ने आश्वासन दिया कि संबंधित अधिकारी को सूचना दे दी गई है तथा दरोगा सरकारी वाहन लेकर मौके के लिए रवाना हो चुके हैं।

हालांकि, अगले दिन भी खनन गतिविधियां जारी रहने का दावा किया गया।

चौकी प्रभारी ने कहा- लोकेशन अलीगढ़ की थी

29 जुलाई की सुबह जब दोबारा थाना प्रभारी महावन से संपर्क किया गया तो उन्होंने चौकी प्रभारी से बात कराई। चौकी प्रभारी विजेंद्र सिंह ने कहा कि भेजी गई लोकेशन अलीगढ़ की थी।

वहीं, तहलका खबर का दावा है कि संबंधित स्थान थाना महावन से लगभग पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित था और उसी क्षेत्र का हिस्सा था।

एसडीएम ने कहा- सर्किट हाउस के लिए है अनुमति

29 जुलाई को टीम दोबारा मौके पर पहुंची और खनन गतिविधियों की जानकारी पुनः एसडीएम महावन को दी गई। एसडीएम प्राजक्ता त्रिपाठी ने बताया कि उनकी खनन अधिकारी से बात हुई है और उन्हें बताया गया है कि सरकारी सर्किट हाउस निर्माण के लिए मिट्टी निकासी की अनुमति है तथा प्रथम दृष्टया जांच भी कराई गई है।

जब उनसे पूछा गया कि क्या रात में भी खनन किया जा सकता है, तो उन्होंने कहा कि वह इस संबंध में दोबारा जानकारी करेंगी।

30 जुलाई की रात तहलका खबर की पड़ताल में नया दावा

30 जुलाई की रात तहलका खबर की टीम ने डंपरों का पीछा कर यह पता लगाने का प्रयास किया कि मिट्टी आखिर कहां पहुंचाई जा रही है।

टीम का दावा है कि मिट्टी सरकारी सर्किट हाउस स्थल पर न जाकर गोवर्धन चौराहा स्थित निर्माणाधीन निजी कॉलोनी "श्री वृंदा क्रिस्टल" में पहुंचाई जा रही थी।

इसके बाद एसडीएम महावन से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका मोबाइल फोन बंद मिला।

1 अगस्त को एसडीएम ने दिए जांच के आदेश

1 अगस्त 2026 को सुबह 10:39 बजे एसडीएम महावन प्राजक्ता त्रिपाठी से दोबारा बातचीत की गई। उन्होंने बताया कि मामले में खनन अधिकारी को जांच के आदेश दिए गए हैं।

जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने पहले सरकारी सर्किट हाउस के लिए अनुमति होने की बात कही थी, तो उन्होंने कहा कि उन्हें प्रथम दृष्टया यही जानकारी खनन अधिकारी द्वारा दी गई थी, लेकिन अब जांच कराई जा रही है और रिपोर्ट आने के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।

खनन अधिकारी ने क्या कहा?

1 अगस्त को सुबह 10:45 बजे जिला खनन अधिकारी सुभाष सिंह से भी बातचीत की गई। उन्होंने भी प्रारंभिक रूप से सरकारी सर्किट हाउस के लिए अनुमति होने की बात कही।

जब उन्हें बताया गया कि मिट्टी निजी कॉलोनी में पहुंचने का दावा किया जा रहा है, तो उन्होंने कहा कि वह मामले की जांच कराएंगे।

रात में खनन को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि दिन में ट्रैफिक अधिक रहता है। इसके बाद बातचीत समाप्त हो गई।

क्या कहते हैं नियम?

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) तथा उत्तर प्रदेश की उप-खनिज संबंधी नियमों के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में खनन गतिविधियां सामान्यतः सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच संचालित की जाती हैं।

विशेष परिस्थितियों में यदि रात में खनन या मिट्टी का परिवहन किया जाता है तो सक्षम प्राधिकारी की लिखित अनुमति, वैध परिवहन दस्तावेज (जैसे लागू होने पर ई-एमएम11/ई-रवाना) तथा अन्य आवश्यक स्वीकृतियां होना आवश्यक हो सकता है। केवल मौखिक जानकारी अपने आप में वैधानिक अनुमति का विकल्प नहीं होती।

उठ रहे हैं बड़े सवाल

  • यदि अनुमति सरकारी सर्किट हाउस के लिए थी तो मिट्टी निजी कॉलोनी तक कैसे पहुंची?
  • क्या रात में खनन के लिए सक्षम प्राधिकारी की कोई विशेष लिखित अनुमति थी?
  • क्या परिवहन कर रहे डंपरों के पास वैध दस्तावेज मौजूद थे?
  • सूचना मिलने के बावजूद तत्काल प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
  • क्या अधिकारियों को प्रारंभिक स्तर पर गलत जानकारी दी गई थी?

जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें

इस पूरे मामले में अब प्रशासनिक जांच अहम हो गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि खनन और मिट्टी का परिवहन पूरी तरह नियमों के अनुरूप था या सरकारी अनुमति का दुरुपयोग कर किसी निजी परियोजना में मिट्टी का इस्तेमाल किया गया।

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