'द तहलका खबर' का असर: मथुरा न्यूरो अस्पताल का बेसमेंट सील, तो रसूखदार संचालक ने सरकारी सील पर डाला 'हरा पर्दा'! CMO की चुप्पी पर उठे बड़े सवाल
मुख्य बिंदु:
खबर का असर: द तहलका खबर पर प्रमुखता से खबर दिखाए जाने के बाद आखिरकार प्रशासन जागा। भारी पुलिस बल और फायर विभाग के साथ मिलकर अस्पताल का बेसमेंट सील किया गया।
बड़ी धोखाधड़ी: सीलिंग की कार्रवाई को मरीजों और तीमारदारों से छुपाने के लिए अस्पताल संचालक ने सरकारी सील वाली जगह पर 'हरा पर्दा' डाल दिया।
अधिकारियों का दोहरा खेल: सील का सरकारी आदेश पूरे अवैध अस्पताल परिसर को बंद करने का था, लेकिन अधिकारियों ने सांठगांठ कर सिर्फ बेसमेंट सील कर खानापूर्ति कर दी।
स्वास्थ्य विभाग कठघरे में: आवास विकास के अधिशासी अभियंता (XEN) सूरजपाल ने लिखित में सीएमओ को पंजीकरण रद्द करने को कहा, लेकिन मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) अब तक खामोश क्यों हैं?
मथुरा के राधिका विहार स्थित 'मथुरा न्यूरो सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल' के अवैध संचालन और बिना फायर एनओसी के मरीजों की जान जोखिम में डालने के खिलाफ द तहलका खबर की मुहिम का अब तक का सबसे बड़ा और निर्णायक असर देखने को मिला है।
लगातार दबाव के बाद आखिरकार आवास विकास परिषद की टीम, फायर ब्रिगेड और स्थानीय पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची और अवैध रूप से बने अस्पताल के बेसमेंट को सील कर दिया। लेकिन इस सीलिंग की कार्रवाई के साथ ही अधिकारियों के दोहरे चरित्र और अस्पताल संचालक की ढीठता का एक ऐसा शर्मनाक चेहरा सामने आया है, जिसने पूरे मथुरा प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
कार्रवाई को छुपाने के लिए सरकारी ताले पर डाला 'हरा पर्दा'!
अस्पताल संचालक डॉ. मनोज रघुवंशी के रसूख और ढीठता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि प्रशासनिक सीलिंग के तुरंत बाद, उन्होंने जनता और मरीजों की आँखों में धूल झोंकने के लिए एक नया पैंतरा चल दिया।
अस्पताल में आने वाले भोले-भाले मरीजों और तीमारदारों को यह पता न चल सके कि अस्पताल अवैध है और उस पर कानूनी कार्रवाई हुई है, इसके लिए सरकारी सील और ताले के ऊपर बकायदा एक 'हरा पर्दा' टांग दिया गया! यह सीधे तौर पर सरकारी आदेशों की अवहेलना, कानून का खुला मखौल और मरीजों की जान के साथ की जा रही धोखाधड़ी है। सवाल यह उठता है कि खुलेआम सरकारी सील को छुपाने वाले इस संचालक पर पुलिस ने अब तक मुकदमा दर्ज क्यों नहीं किया?
कागज पर पूरा अस्पताल बंद करने का आदेश, धरातल पर सिर्फ 'औपचारिकता'!
द तहलका खबर के पास मौजूद 14 जुलाई 2026 के आधिकारिक 'सील आदेश' (जिस पर अधिशासी अभियंता सूरजपाल के हस्ताक्षर हैं) ने प्रशासनिक साठगांठ की पोल खोलकर रख दी है।
इस सरकारी आदेश में साफ लिखा है:
"उक्त वर्णित परिस्थितियों में बिना मानचित्र स्वीकृत कराए/मानचित्र के भिन्न अवैध निर्माण के परिसस को सील किया जाना आवश्यक है।"
जब आदेश पूरे अस्पताल परिसर (बिल्डिंग) को सील करने का था, तो फिर किस दबाव या साठगांठ के तहत अधिकारियों ने सिर्फ बेसमेंट को सील किया और बाकी अस्पताल को धड़ल्ले से चलने के लिए छोड़ दिया?
XEN सूरजपाल का बड़ा खुलासा: अब गेंद CMO के पाले में!
इस आधे-अधूरे एक्शन पर जब द तहलका खबर ने आवास विकास परिषद के अधिशासी अभियंता (XEN) सूरजपाल को कैमरे पर घेरा, तो उन्होंने एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया।
सूरजपाल ने ऑन-रिकॉर्ड स्वीकार किया कि:
"उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) मथुरा को बाकायदा पत्र लिखकर मथुरा न्यूरो हॉस्पिटल का पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) तत्काल प्रभाव से निरस्त करने के लिए कह दिया है।"
इस बयान के बाद अब सीधे तौर पर मथुरा का स्वास्थ्य विभाग और सीएमओ कार्यालय सवालों के घेरे में है।
जब भवन पूरी तरह अवैध है...
जब अस्पताल के पास फायर एनओसी नहीं है...
और जब आवास विकास विभाग खुद लिखित में पंजीकरण रद्द करने की सिफारिश कर चुका है...
...तो फिर सीएमओ मथुरा किस 'खास मेहरबानी' के चलते इस जानलेवा अस्पताल का रजिस्ट्रेशन निरस्त करने से बच रहे हैं? क्या स्वास्थ्य विभाग भी किसी बड़े हादसे के बाद ही अपनी नींद से जागेगा?
29 साल पुराना है भ्रष्टाचार का यह ढांचा!
इस सरकारी सील आदेश से एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। इस इमारत को गिराने का ध्वस्तीकरण (Demolition) आदेश वर्ष 1997 में ही जारी हो चुका था! यानी पिछले 29 सालों से यह अवैध इमारत अधिकारियों की नाक के नीचे सीना तानकर खड़ी रही, और जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदकर किसी बड़े हादसे का इंतजार करते रहे।
राजधानी लखनऊ के अलीगंज कोचिंग सेंटर हादसे और अन्य अग्निकांडों से कोई सबक न लेते हुए मथुरा का प्रशासन भी राधिका विहार में एक बड़े हादसे की पृष्ठभूमि तैयार कर रहा है।
'द तहलका खबर' के सीधे और कड़े सवाल:
धोखाधड़ी पर एक्शन कब? सरकारी सील को 'हरे पर्दे' से ढककर जनता को गुमराह करने वाले अस्पताल संचालक पर कानूनी कार्रवाई कब होगी?
सीएमओ की चुप्पी क्यों? XEN के पत्र और बिना फायर एनओसी के चल रहे इस अवैध अस्पताल का पंजीकरण सीएमओ मथुरा तुरंत निरस्त क्यों नहीं कर रहे?
आधा-अधूरा एक्शन क्यों? जब सील आदेश पूरे परिसर का था, तो सिर्फ बेसमेंट को सील कर बाकी के अस्पताल को जीवन रक्षक दांव पर लगाने के लिए खुला क्यों छोड़ दिया गया?
29 साल की सुस्ती का जिम्मेदार कौन? 1997 के ध्वस्तीकरण आदेश को दबाकर बैठने वाले अधिकारियों पर योगी सरकार का बुलडोजर कब चलेगा?
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