चौकी प्रभारी डीग गेट सट्टा कारोबारी के सामने नतमस्तक, शाहिद का अवैध धंधा रोकने में पुलिस नाकाम

Jan 3, 2026 - 09:52
Jan 3, 2026 - 09:52
चौकी प्रभारी डीग गेट सट्टा कारोबारी के सामने नतमस्तक, शाहिद का अवैध धंधा रोकने में पुलिस नाकाम

ब्यूरो। 

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मथुरा। डीग गेट पुलिस चौकी प्रभारी की कार्यशैली अब सवालों के कठघरे में है। अर्जुनपुरा इलाके में शाहिद द्वारा संचालित अवैध सट्टे का कारोबार तीसरी बार खबर प्रकाशित होने के बावजूद बदस्तूर जारी है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि डीग गेट चौकी प्रभारी अब तक इस सट्टे को बंद कराने में पूरी तरह विफल साबित हुए हैं। हालात ऐसे हैं मानो कानून नहीं, बल्कि सट्टेबाज ही इलाके का असली शासक हो।

तीन-तीन बार खबर प्रकाशित होने के बाद भी सट्टे का अड्डा जस का तस चल रहा है। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि या तो पुलिस की पकड़ कमजोर है या फिर सट्टा कारोबारी के सामने चौकी प्रभारी नतमस्तक नजर आ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शाम होते ही अर्जुनपुरा में सट्टे की पर्चियां कटने लगती हैं और पुलिस की मौजूदगी नाम मात्र की भी नहीं होती।

इस अवैध कारोबार का सबसे बड़ा खामियाजा गरीब और मजदूर वर्ग भुगत रहा है। दिनभर मेहनत करके दो जून की रोटी कमाने वाला मजदूर, सट्टे के लालच में अपनी पूरी कमाई शाहिद के अड्डे पर हार देता है। घर में बच्चे भूखे इंतजार करते हैं और परिवार आर्थिक तंगी व तनाव में डूबता चला जाता है। यह सिर्फ कानून व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि एक गंभीर सामाजिक अपराध बन चुका है।

सबसे गंभीर प्रश्न यह है कि क्या चौकी प्रभारी को इस सट्टे की जानकारी नहीं है? अगर जानकारी नहीं है तो यह उनकी नाकामी है, और अगर जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही तो यह और भी गंभीर मामला है। सूत्रों की मानें तो पुलिस कभी-कभार छोटे गुर्गों को पकड़कर खानापूर्ति कर लेती है, लेकिन सट्टे का सरगना शाहिद हर बार कानून के शिकंजे से बाहर ही रहता है।

गौरतलब है कि गोविंद नगर थाना क्षेत्र में पहले भी सट्टा और जुए को लेकर पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हो चुकी है। इसके बावजूद डीग गेट चौकी क्षेत्र में सट्टे का खुलेआम चलना इस बात की ओर इशारा करता है कि न तो पूर्व की कार्रवाई से कोई सबक लिया गया और न ही वर्तमान में कोई ठोस इच्छाशक्ति दिखाई दे रही है।

अब सवाल सीधे-सीधे डीग गेट चौकी प्रभारी पर उठ रहे हैं। क्या पुलिस वाकई सट्टा बंद कराना चाहती है या फिर सब कुछ जानते हुए भी आंखें मूंदे बैठी है? क्या तीसरी बार खबर प्रकाशित होने के बाद भी कार्रवाई सिर्फ कागजों और बयानों तक सीमित रहेगी?

अर्जुनपुरा के लोगों को अब खोखले आश्वासन नहीं, ठोस कार्रवाई चाहिए। क्योंकि यह लड़ाई सिर्फ शाहिद के सट्टे के खिलाफ नहीं, बल्कि कानून की साख, पुलिस की जिम्मेदारी और गरीबों की रोटी बचाने की है। अब देखना यह है कि पुलिस जागती है या फिर सट्टेबाजों के सामने यूं ही नतमस्तक बनी रहती है।

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