समुद्री विज्ञान और बायोटेक्नोलॉजी से मजबूत होगी भारत की अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार: जितेंद्र सिंह

Jan 19, 2026 - 04:00
समुद्री विज्ञान और बायोटेक्नोलॉजी से मजबूत होगी भारत की अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार: जितेंद्र सिंह

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने शनिवार को कहा कि समुद्री विज्ञान और बायोटेक्नोलॉजी को एक साथ जोड़ने से भारत की अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार के अवसरों को मजबूत किया जा सकता है।

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डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह बात अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में स्थित अटल सेंटर फॉर ओशन साइंस एंड टेक्नोलॉजी फॉर आइलैंड्स (एसीओएसटीआई) के दौरे के दौरान कही। इस दौरान उन्होंने ब्लू इकोनॉमी को मजबूत करने और स्थानीय लोगों की आजीविका बढ़ाने से जुड़ी कई समुद्री तकनीकी परियोजनाओं की शुरुआत और समीक्षा की।

मंत्री ने कहा कि जैसे-जैसे भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में तेजी से आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे भविष्य में देश की आर्थिक तरक्की का बड़ा हिस्सा अप्रयुक्त समुद्री संसाधनों से आएगा।

उन्होंने बताया कि सरकार का ब्लू इकोनॉमी पर विशेष ध्यान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस दृष्टिकोण को दर्शाता है कि देश का विकास केवल मुख्य भूमि तक सीमित न होकर द्वीपों और तटीय क्षेत्रों को साथ लेकर किया जाना चाहिए।

डॉ. सिंह ने कहा कि समुद्री संसाधन अब तक कम खोजे गए हैं, लेकिन आने वाले समय में ये भारत की आर्थिक वृद्धि को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएंगे, खासकर तब जब जमीन पर मौजूद पारंपरिक संसाधन धीरे-धीरे खत्म हो रहे हैं। ब्लू इकोनॉमी से रोजगार बढ़ेगा, निर्यात को बढ़ावा मिलेगा, पर्यावरण की रक्षा होगी और देश की अर्थव्यवस्था मजबूत बनेगी।

उन्होंने बताया कि भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है जिनके पास बायोटेक्नोलॉजी के लिए अलग नीति है, जिसे बायोई3 (अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार के लिए जैव प्रौद्योगिकी) कहा जाता है। समुद्री जैव संसाधनों से प्लास्टिक के पर्यावरण-अनुकूल विकल्प, नई दवाइयां और मूल्यवान जैव उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं।

डॉ. सिह ने कहा कि ऐसे प्रयासों से एक साथ रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, पर्यावरण सुरक्षित रहेगा और बायोइकोनॉमी को मजबूती मिलेगी।

उन्होंने यह भी बताया कि गैर-पशु आधारित खाद्य उत्पाद, समुद्री पोषण के नए विकल्प, कचरे से उपयोगी चीजें बनाने की तकनीक और निर्यात के लिए समुद्री उत्पाद जैसे क्षेत्र तेजी से उभर रहे हैं। खासतौर पर यूरोप में इन उत्पादों की मांग बढ़ रही है।

मंत्री ने जोर देकर कहा कि स्वयं सहायता समूहों और महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाना जरूरी है, ताकि ये योजनाएं परिवारों की आमदनी बढ़ाने में मदद करें और 'वोकल फॉर लोकल' तथा 'लोकल फॉर ग्लोबल' की सोच को आगे बढ़ाया जा सके।

उन्होंने कहा कि यदि सीएसआईआर और बायोटेक्नोलॉजी शोध संस्थानों जैसे संगठनों के साथ मिलकर काम किया जाए तो अंडमान और निकोबार द्वीप समूह भारत की ब्लू इकॉनमी का एक बड़ा केंद्र बन सकता है।

मंत्री ने भरोसा दिलाया कि सरकार इस क्षेत्र के साथ लगातार जुड़ी रहेगी और इन प्रयासों से द्वीपों को लंबे समय तक वैज्ञानिक, पर्यावरणीय और सामाजिक-आर्थिक लाभ मिलेंगे।

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