मथुरा स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही, दर्जनों अस्पताल बिना रजिस्ट्रेशन कर रहे इलाज
ब्यूरो।
मथुरा। जनपद मथुरा में स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाल हालत अब किसी से छुपी नहीं रही। आंकड़े खुद सच बोलते हैं—वर्ष 2023–24 में 382 अस्पताल, पैथोलोजी, नर्सिंग होम और क्लीनिक पंजीकृत थे, लेकिन 2024–25 में यह संख्या घटकर केवल 231 रह गई। यह घटाव सिर्फ आंकड़ों में नहीं, बल्कि जनता की जान और स्वास्थ्य सुरक्षा के क्षेत्र में भी दिखाई दे रहा है। सवाल यह है कि जो अस्पताल और नर्सिंग होम बिना पंजीकरण के धड़ल्ले से मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं, उन पर स्वास्थ्य विभाग की नजर क्यों नहीं पड़ रही?
सूत्रों और मरीजों की शिकायतों के अनुसार, आज भी मथुरा में दर्जनों अस्पताल और नर्सिंग होम बिना पंजीकरण के संचालित हो रहे हैं। नियम-कानून, सुरक्षा मानक और मानवीय जिम्मेदारी सब कहीं गायब हैं। यह स्थिति न सिर्फ स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का आईना है, बल्कि सीधे-सीधे आम जनता के जीवन के साथ खिलवाड़ है।
विगत कुछ दिन पूर्व मानवाधिकार फास्ट न्यूज व द तहलका खबर ने भी एक ऐसे अस्पताल की खबर प्रकाशित की थी, जो बिना पंजीकरण के मरीजों को इलाज दे रहा था। लेकिन उस खबर के बाद भी मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) की नींद अब तक नहीं टूटी। न जांच, न नोटिस, न कोई कार्रवाई—ऐसा लगता है जैसे मथुरा के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने जिम्मेदारी का त्याग कर दिया हो और उन्होंने खुद को कुंभकर्णीय नींद में लपेट लिया हो।
सबसे गंभीर सवाल यह है कि क्या यह केवल लापरवाही है या फिर अधिकारियों की मोटी चमड़ी और प्रशासनिक बेख़ौफ़ी ने उन्हें जनता की जान की कोई परवाह नहीं करने वाला बना दिया है? ऐसे बिना पंजीकरण चल रहे अस्पतालों में न तो पर्याप्त प्रशिक्षित स्टाफ है, न आपातकालीन सुविधाएं, न सर्जिकल और दवा मानक का कोई भरोसा। इन जगहों पर मरीज इलाज के नाम पर जोखिम की जंग में धकेले जा रहे हैं।
योगी शासन के सुशासन के दावों के बीच यह स्थिति किसी कड़वे सच से कम नहीं। प्रदेश के ऐसे समय में जब छोटे से छोटे अपराध पर तत्काल कार्रवाई का दावा किया जाता है, मथुरा के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी अपने कर्तव्य से लगातार आंखें मूंदे बैठे हैं।
अब सवाल यह है:
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कब जागेगा स्वास्थ्य विभाग और कब थमेंगे बिना पंजीकरण चल रहे अस्पतालों के यह घोटाले?
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कब होगी अधिकारियों की जवाबदेही तय और कड़ी कार्रवाई?
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और कब आम जनता की जिंदगी और उनकी कमाई इस सरकारी उदासीनता की भेंट नहीं चढ़ेगी?
द तहलका खबर उन सभी बिना पंजीकरण चल रहे अस्पतालों और नर्सिंग होम का खुलासा करेगा, ताकि जनता को पता चले कि मथुरा में स्वास्थ्य विभाग कितनी गंभीरता से अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा रहा।
यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो मथुरा की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह ढह जाएगी। और इसका खामियाजा सिर्फ आंकड़ों या बयानों में नहीं, बल्कि सीधे-सीधे मरीजों की जान और परिवारों की मजबूरी के रूप में भुगतना पड़ेगा।
यह सिर्फ लापरवाही नहीं, जनता के साथ खुलेआम खिलवाड़ है—और अब सवाल उठता है कि क्या योगी शासन के स्वास्थ्य अधिकारी अपनी कुंभकर्णीय नींद से कभी जागेंगे, या जनता को लगातार जोखिम में डालते रहेंगे?
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