वैश्विक तनावों के बावजूद वित्त वर्ष 2026 में भारतीय शेयर बाजार की बुनियादी स्थिति मजबूत, आगे सुधार की उम्मीद

Apr 5, 2026 - 04:38
वैश्विक तनावों के बावजूद वित्त वर्ष 2026 में भारतीय शेयर बाजार की बुनियादी स्थिति मजबूत, आगे सुधार की उम्मीद

भारतीय शेयर बाजार ने वित्त वर्ष 2025-26 का समापन निराशाजनक प्रदर्शन के साथ किया। कोविड-19 से प्रभावित वर्ष को छोड़ दें, तो सेंसेक्स और निफ्टी जैसे प्रमुख सूचकांकों के लिए यह पिछले एक दशक का सबसे खराब साल साबित हुआ। वित्त वर्ष के अंतिम कारोबारी दिन सोमवार को भारी बिकवाली ने बाजार में मंदी के माहौल को और गहरा कर दिया।

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वित्तीय वर्ष के आखिरी कारोबारी दिन सोमवार को सेंसेक्स 1,635 अंक गिरकर 71,947 पर और निफ्टी 488 अंक गिरकर 22,331 पर बंद हुआ। इस गिरावट के चलते बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण भी करीब 10 लाख करोड़ रुपए घटकर 412.43 लाख करोड़ रुपए रह गया, जो पिछले सत्र में 422 लाख करोड़ रुपए था।

जानकारों का कहना है कि बावजूद इसके बाजार की बुनियादी स्थिति अब भी मजबूत बनी हुई है, जो आने वाले समय में रिकवरी के संकेत देती है।

पूरे वित्त वर्ष 2026 की बात करें तो सेंसेक्स करीब 5.36 प्रतिशत और निफ्टी 3.6 प्रतिशत गिरा। इस गिरावट के पीछे मुख्य वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता रही। इसके अलावा, विदेशी निवेशकों की रिकॉर्ड बिकवाली ने भी बाजार पर दबाव डाला।

वहीं, मार्च 2026 बाजार के लिए सबसे कमजोर महीना रहा और सेंसेक्स तथा निफ्टी, दोनों में करीब 10.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट मार्च 2020 के बाद सबसे ज्यादा मानी जा रही है। कच्चे तेल की कीमतें 115 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बने रहना और विदेशी निवेशकों द्वारा 12.3 अरब डॉलर की रिकॉर्ड बिकवाली ने बाजार पर अतिरिक्त दबाव बनाया।

हालांकि, यह भी ध्यान देने वाली बात है कि भारतीय बाजार का इतिहास बताता है कि लगातार दो वित्तीय वर्षों में गिरावट की संभावना बेहद कम रहती है। इससे संकेत मिलता है कि आगे बाजार में सुधार देखने को मिल सकती है।

वैश्विक घटनाक्रमों का असर भी भारतीय बाजार पर साफ दिखाई दिया। पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध, ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने और तेल की कीमतों में उछाल ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। इसके साथ ही आरबीआई द्वारा घरेलू कर्ज से जुड़े नियमों में सख्ती के बाद बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में भी गिरावट देखने को मिली।

सेक्टोरल स्तर पर देखें तो निफ्टी रियल्टी, आईटी और एफएमसीजी इंडेक्स सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। वित्त वर्ष 2026 में रियल्टी इंडेक्स में 21 प्रतिशत, आईटी में 20 प्रतिशत और एफएमसीजी में 13 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

हालांकि, कुछ शेयरों ने इस गिरते बाजार में भी अच्छा प्रदर्शन किया। श्रीराम फाइनेंस, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (बीईएल), भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), टाइटन और आइशर मोटर्स जैसे शेयरों में 27 से 38 प्रतिशत तक की बढ़त देखी गई, जिससे निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ।

विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही कुछ शेयरों में गिरावट आई हो, लेकिन यह बाजार के सामान्य चक्र का हिस्सा माना जाता है। उतार-चढ़ाव के इस दौर में निवेशकों के लिए अच्छे अवसर भी बनते हैं, खासकर मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों में।

वैश्विक स्तर पर चुनौतियों के बावजूद भारत का बाजार अपेक्षाकृत स्थिर रहा। एशियाई बाजारों में भले ही तेज बढ़त देखने को मिली, लेकिन भारतीय बाजार की दीर्घकालिक मजबूती और निवेशकों का भरोसा इसे अलग बनाता है।

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