40 दिनों के युद्ध में 3,739 मौतें, ईरान-इजरायल-अमेरिका संघर्ष में 2 हफ्ते का अस्थायी सीजफायर घोषित

Apr 9, 2026 - 09:28

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में पिछले 40 दिनों से जारी भीषण संघर्ष के बाद अब एक अस्थायी राहत की खबर सामने आई है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच 7-8 अप्रैल को दो हफ्तों के लिए अस्थायी ceasefire घोषित किया गया है, हालांकि हालात अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं और कई इलाकों में तनाव बरकरार है।

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जानकारी के अनुसार 28 फरवरी से 6 अप्रैल के बीच चले इस संघर्ष में भारी जान-माल का नुकसान हुआ। आर्म्ड कॉन्फ्लिक्ट लोकेशन एंड इवेंट डेटा प्रोजेक्ट (ACLED) के आंकड़ों के मुताबिक इस अवधि में अमेरिकी और इजरायली सेनाओं ने ईरान पर करीब 3,000 हमले किए, जबकि जवाबी कार्रवाई में ईरान ने लगभग 1,500 हमले किए।

इस 40 दिनों के युद्ध में कुल 3,739 लोगों की मौत हुई, जिससे पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र में हालात बेहद गंभीर हो गए।

सबसे अधिक नुकसान ईरान में हुआ, जहां 2,076 लोगों की मौत दर्ज की गई। लेबनान में 1,497 लोगों की जान गई, जबकि इराक में 109, इजरायल में 26 लोगों की मौत हुई। इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, सीरिया, बहरीन, ओमान और सऊदी अरब में कुल 31 लोगों की मौत दर्ज की गई। इस संघर्ष में अमेरिकी सेना के 13 जवान भी मारे गए। हजारों लोग घायल हुए और लाखों लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े।

वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर

इस युद्ध का सबसे बड़ा असर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पड़ा, जहां से दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति गुजरती है। संघर्ष के कारण इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई, जिससे वैश्विक तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई।

समुद्री डेटा कंपनी लॉयड्स लिस्ट इंटेलिजेंस के अनुसार मार्च के मध्य में प्रति सप्ताह जहाजों की संख्या 39 से घटकर 36 रह गई थी। हालांकि अप्रैल की शुरुआत में यह संख्या बढ़कर 72 तक पहुंच गई, लेकिन हालात अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार इस दौरान कच्चे तेल के टैंकर, बल्क कैरियर, गैस कैरियर और कंटेनर जहाज सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। कई जहाजों को वैकल्पिक रास्ते अपनाने पड़े, जिससे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला।

फिलहाल दो हफ्तों के ceasefire से कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए कूटनीतिक प्रयास बेहद जरूरी होंगे।

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