ईरान-अमेरिका की जंग से तेल बाजार में भूचाल, 97 डॉलर के करीब पहुंचा ब्रेंट क्रूड; भारत पर भी बढ़ा महंगे ईंधन का खतरा

अमेरिका-ईरान सैन्य टकराव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड 97 डॉलर के करीब पहुंच गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य में सप्लाई बाधित होने से भारत पर महंगे तेल और गैस का खतरा बढ़ गया है।

Sep 2, 2026 - 10:05
ईरान-अमेरिका की जंग से तेल बाजार में भूचाल, 97 डॉलर के करीब पहुंचा ब्रेंट क्रूड; भारत पर भी बढ़ा महंगे ईंधन का खतरा

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार को हिला दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल और गैस की सप्लाई बाधित होने की आशंका के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। बुधवार को ब्रेंट क्रूड 96.99 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड भी 92 डॉलर के पार कारोबार करता दिखा।

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होर्मुज में जहाजों की आवाजाही घटी, सप्लाई पर बढ़ी चिंता

मध्यपूर्व में बढ़ते तनाव का सबसे बड़ा असर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य पर दिखाई दे रहा है। ग्लोबल डेटा और एनालिटिक्स कंपनी Kpler के अनुसार, 31 अगस्त को इस मार्ग से केवल पांच जहाज गुजरे, जबकि सामान्य परिस्थितियों में यहां से कहीं अधिक जहाजों की आवाजाही होती है।

होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया की करीब 20 प्रतिशत ऊर्जा आपूर्ति गुजरती है। ऐसे में यहां जहाजों की आवाजाही बाधित होने का मतलब वैश्विक तेल और गैस बाजार में बड़ी सप्लाई समस्या हो सकता है।

भारत में भी बढ़ी कच्चे तेल की कीमत

अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी का असर भारतीय क्रूड बास्केट पर भी दिखाई दे रहा है। पेट्रोलियम मंत्रालय के पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के मुताबिक, 1 सितंबर को भारतीय बास्केट के कच्चे तेल की कीमत बढ़कर 95.28 डॉलर प्रति बैरल हो गई। अगस्त में इसका औसत भाव 90.19 डॉलर प्रति बैरल था।

यानी कुछ ही समय में भारतीय बास्केट की कीमत में करीब 5 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

LNG से CNG और LPG तक बढ़ सकती है परेशानी

होर्मुज से LNG कार्गो की आवाजाही प्रभावित होने के कारण वैश्विक LNG कीमतें भी संकट से पहले के स्तर की तुलना में करीब दोगुनी हो गई हैं। इसका असर भारत में पहले से दिखाई देने लगा है।

तेल और गैस कंपनियों की ओर से पिछले कुछ दिनों में CNG, कमर्शियल LPG और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है। यदि कच्चे तेल और गैस की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं तो इसका असर परिवहन लागत से लेकर महंगाई तक पर पड़ सकता है।

भारत का तेल आयात भी घटा

Kpler के आंकड़ों के मुताबिक अगस्त में भारत का कच्चा तेल आयात करीब 4.5 मिलियन बैरल प्रतिदिन (Mbd) रहने का अनुमान है। जून और जुलाई में यह आंकड़ा 5 Mbd से अधिक था।

रूस से भारत के तेल आयात में भी गिरावट आई है। दूसरी ओर, वेनेजुएला से भारत का आयात बढ़कर करीब 350 हजार बैरल प्रतिदिन (kbd) पहुंचने का अनुमान है, जो 2020 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है।

अमेरिका-ईरान के हमलों से बाजार में दहशत

अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और ईरान की जवाबी कार्रवाई के बाद बाजार को सबसे ज्यादा डर होर्मुज जलडमरूमध्य के पूरी तरह बंद होने का है।

ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की ओर से क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर हमलों के दावे किए गए हैं। वहीं अमेरिका की ओर से ईरान के सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई की गई है।

बाजार की चिंता सिर्फ हमलों तक सीमित नहीं है। असली सवाल यह है कि क्या इस तनाव के कारण शिपिंग कंपनियां होर्मुज के रास्ते अपने जहाज भेजने से बचेंगी। ऐसा होने पर तेल और LNG की वैश्विक सप्लाई पर बड़ा असर पड़ सकता है।

क्रूड के 100 डॉलर पार करने का खतरा

कमोडिटी बाजार के जानकारों के मुताबिक फिलहाल क्रूड में तेजी का जोखिम बना हुआ है। अगर मध्यपूर्व में तनाव और बढ़ता है तो ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकता है।

तकनीकी स्तर पर 98 डॉलर के आसपास अगली बड़ी चुनौती मानी जा रही है। इसके बाद 100-102 डॉलर का जोन महत्वपूर्ण रहेगा। यदि क्रूड 102 डॉलर के ऊपर टिकता है तो 120 डॉलर या उससे ऊपर जाने की संभावना का रास्ता खुल सकता है।

हालांकि यदि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होता है और होर्मुज में शिपिंग सामान्य होती है, तो कीमतों में कुछ नरमी भी आ सकती है। फिलहाल बाजार पूरी तरह भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।

भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता क्या?

कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी भारत के लिए चिंता का विषय है क्योंकि देश अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। महंगा क्रूड भारत के इंपोर्ट बिल, रुपये की विनिमय दर, परिवहन लागत और महंगाई पर दबाव बढ़ा सकता है।

यदि तेल 100 डॉलर के पार जाता है और लंबे समय तक ऊंचा रहता है तो इसका असर पेट्रोलियम उत्पादों, एयरलाइंस, लॉजिस्टिक्स और उद्योगों की लागत पर भी पड़ सकता है।

फिलहाल पूरी दुनिया की नजर होर्मुज जलडमरूमध्य पर है। अगर यहां तेल टैंकरों की आवाजाही सामान्य रहती है तो बाजार को राहत मिल सकती है, लेकिन सप्लाई बाधित हुई तो कच्चे तेल की कीमतों में और बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है।

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