अलीगढ़ में सरकारी इंटर कॉलेज की बदहाली देख भड़के मंत्री, गेट बंद मिला तो फांद दी बाउंड्री वॉल; 5 कमरों की छत गायब, शौचालय तक नहीं
अलीगढ़ के सालपुर सरकारी इंटर कॉलेज में औचक निरीक्षण करने पहुंचे राज्यमंत्री सुरेंद्र दिलेर को गेट बंद मिला। मंत्री बाउंड्री वॉल फांदकर अंदर पहुंचे तो 5 कमरों की छत गायब, चाहरदीवारी टूटी और शौचालय तक नहीं मिला। मंत्री ने 10 साल की धनराशि और खर्च का हिसाब मांगा।
अलीगढ़। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में सरकारी इंटर कॉलेज की बदहाली का ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सरकारी शिक्षा व्यवस्था और विद्यालयों के रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों की शिकायत पर हकीकत जानने पहुंचे प्रदेश के राज्यमंत्री सुरेंद्र दिलेर को जब विद्यालय का मुख्य गेट बंद मिला और मौके पर कोई कर्मचारी नजर नहीं आया तो उन्होंने बाउंड्री वॉल फांदकर कॉलेज परिसर में प्रवेश कर लिया। अंदर पहुंचते ही उन्हें विद्यालय की बदहाल तस्वीर देखने को मिली।
विद्यालय की हालत देखकर मंत्री भी हैरान रह गए। कॉलेज भवन के पांच कमरों की छतें गायब थीं, कई जगह चाहरदीवारी टूटी हुई थी और छात्रों के लिए शौचालय तक की व्यवस्था नहीं थी। इतना ही नहीं, विद्यालय भवन के ऊपर से गुजर रही बिजली की लाइन को देखकर भी मंत्री ने नाराजगी जताई और इसे विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया।
गेट बंद मिला तो बाउंड्री वॉल फांदकर अंदर पहुंचे मंत्री
मामला अलीगढ़ के सालपुर स्थित सरकारी इंटर कॉलेज का है। ग्रामीणों ने मंत्री सुरेंद्र दिलेर से विद्यालय की बदहाली की शिकायत की थी। ग्रामीणों का कहना था कि लंबे समय से कॉलेज में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है और भवन की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है।
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए राज्यमंत्री विद्यालय का निरीक्षण करने पहुंचे। लेकिन वहां पहुंचने पर उन्हें मुख्य गेट बंद मिला। मौके पर कोई कर्मचारी भी मौजूद नहीं था। इसके बाद मंत्री ने इंतजार करने के बजाय बाउंड्री वॉल फांदकर विद्यालय परिसर में प्रवेश किया।
परिसर के अंदर की स्थिति देखकर मंत्री को ग्रामीणों की शिकायतों की हकीकत खुद दिखाई दे गई।
पांच कमरों की छत गायब, टूटी मिली चाहरदीवारी
निरीक्षण के दौरान विद्यालय भवन के पांच कमरों की छतें गायब मिलीं। कई स्थानों पर विद्यालय की चाहरदीवारी टूटी हुई थी। परिसर में साफ-सफाई की स्थिति भी खराब बताई गई।
सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि विद्यालय में पढ़ने वाले सैकड़ों छात्रों के लिए शौचालय तक की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी।
विद्यालय के ऊपर से गुजर रही बिजली की लाइन ने भी मंत्री की चिंता बढ़ा दी। उन्होंने इसे विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा माना। उनका कहना था कि जिस स्थान पर रोजाना बड़ी संख्या में बच्चे आते-जाते हैं, वहां इस तरह की स्थिति स्वीकार नहीं की जा सकती।
10 साल में मिली धनराशि का मांगा हिसाब
विद्यालय की बदहाली देखकर राज्यमंत्री सुरेंद्र दिलेर ने नाराजगी जताई। उन्होंने मौके से ही संस्था के कार्यवाहक प्रधानाचार्य चंद्रभान सिंह को फोन किया और विद्यालय परिसर में गंदगी तथा भवन की खराब स्थिति पर सवाल किए।
इसके बाद मंत्री ने जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) से भी फोन पर बात की और उन्हें विद्यालय की वास्तविक स्थिति से अवगत कराया।
मंत्री ने पिछले 10 वर्षों के दौरान इंटर कॉलेज को रखरखाव और अन्य कार्यों के लिए मिली धनराशि तथा उसके खर्च का पूरा हिसाब मांगा है। अब यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया है कि विद्यालय के रखरखाव के लिए पिछले वर्षों में कितना बजट मिला और उस धनराशि से वास्तव में कौन-कौन से काम कराए गए।
305 छात्र पंजीकृत, रोज पहुंचते हैं 170-180 विद्यार्थी
इस इंटर कॉलेज में कक्षा छह से 12 तक कुल करीब 305 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। हालांकि प्रतिदिन औसतन 170 से 180 विद्यार्थी ही विद्यालय पहुंचते हैं।
विद्यालय में शिक्षकों की भी कमी बताई गई है। जानकारी के मुताबिक यहां छह शिक्षकों के पद खाली हैं। ऐसे में भवन और बुनियादी सुविधाओं की कमी के साथ शिक्षकों की कमी भी विद्यार्थियों की पढ़ाई को प्रभावित कर रही है।
विद्यालय प्रशासन का कहना है कि भवन की मरम्मत और जरूरी सुविधाओं के लिए आवश्यक कार्यों की सूची तथा अनुमानित खर्च का विवरण पहले ही जिलाधिकारी को भेजा जा चुका है। लेकिन बजट उपलब्ध नहीं होने के कारण काम नहीं कराया जा सका है।
दशकों से प्रबंधन समिति का विवाद, नहीं हो सकी व्यवस्था
विद्यालय की बदहाली के पीछे एक और बड़ी वजह सामने आई है। बताया गया है कि दशकों से चले आ रहे विवाद के कारण विद्यालय में प्रबंधन समिति भी नहीं है।
ऐसे में विद्यालय के संचालन, भवन के रखरखाव और जरूरी विकास कार्यों को लेकर व्यवस्था प्रभावित होने की बात कही जा रही है। अब मंत्री के निरीक्षण के बाद इस पूरे मामले में प्रशासनिक स्तर पर क्या कार्रवाई होती है, इस पर निगाह रहेगी।
कौन हैं सुरेंद्र दिलेर?
सुरेंद्र दिलेर अलीगढ़ की खैर विधानसभा सीट से विधायक हैं और बुलंदशहर के प्रभारी मंत्री भी हैं। 17 अक्टूबर 1993 को जन्मे सुरेंद्र दिलेर 33 वर्ष के हैं और उन्हें योगी आदित्यनाथ सरकार के युवा मंत्रियों में गिना जाता है।
सुरेंद्र दिलेर की शैक्षिक योग्यता 12वीं तक बताई गई है। उन्हें मई 2026 में योगी आदित्यनाथ की कैबिनेट में राज्यमंत्री के रूप में शामिल किया गया था।
उन्होंने 2022 में पहली बार विधानसभा चुनाव जीता और इसके बाद उनकी राजनीतिक पारी तेजी से आगे बढ़ी।
तीन पीढ़ियों से राजनीति में दिलेर परिवार
सुरेंद्र दिलेर का परिवार लंबे समय से राजनीति में सक्रिय रहा है। उनके दादा किशनलाल दिलेर क्षेत्र के चर्चित नेताओं में शामिल रहे। वे पांच बार विधायक और चार बार हाथरस से सांसद रहे थे।
उनके पिता राजवीर दिलेर भी बीजेपी के प्रमुख नेताओं में रहे। 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने इगलास विधानसभा क्षेत्र में बीजेपी को जीत दिलाई थी। यह सीट लंबे समय तक बीजेपी के लिए चुनौतीपूर्ण मानी जाती थी।
इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में राजवीर दिलेर को हाथरस लोकसभा सीट से बीजेपी ने उम्मीदवार बनाया। उन्होंने समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता रामजीलाल सुमन को दो लाख से अधिक मतों के अंतर से हराया था।
हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने राजवीर दिलेर को टिकट नहीं दिया। इसी वर्ष उनका निधन हो गया।
2022 में शुरू हुई सुरेंद्र दिलेर की राजनीतिक पारी
राजवीर दिलेर के निधन के बाद परिवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी सुरेंद्र दिलेर के हिस्से आई। 2022 के विधानसभा उपचुनाव में बीजेपी ने उन्हें अलीगढ़ की खैर विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया।
सुरेंद्र दिलेर चुनाव जीतकर पहली बार विधानसभा पहुंचे। इसके बाद पार्टी में उनका कद लगातार बढ़ता गया और मई 2026 में उन्हें योगी सरकार में राज्यमंत्री बनाया गया।
अब उन्हें बुलंदशहर का प्रभारी मंत्री भी बनाया गया है। ऐसे में अपने क्षेत्र के साथ-साथ प्रभारी जिले में भी प्रशासनिक कामकाज और विकास योजनाओं की निगरानी उनकी जिम्मेदारी का हिस्सा है।
अगले विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी की रणनीति?
सुरेंद्र दिलेर को मंत्री बनाए जाने और उन्हें बुलंदशहर का प्रभारी मंत्री बनाए जाने को राजनीतिक नजरिए से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खासतौर पर उनकी सामाजिक पृष्ठभूमि और क्षेत्र में उनके परिवार की राजनीतिक पकड़ को देखते हुए बीजेपी के लिए यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मई 2026 में बुलंदशहर के तत्कालीन प्रभारी मंत्री अरुण सक्सेना को हटाकर सुरेंद्र दिलेर को जिम्मेदारी दी गई थी। अगले विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश में संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय बनाने की रणनीति के तौर पर भी इसे देखा जा रहा है।
अब असली सवाल—स्कूल की बदहाली के लिए जिम्मेदार कौन?
मंत्री के निरीक्षण के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस सरकारी इंटर कॉलेज में सैकड़ों बच्चे पढ़ते हैं, वहां वर्षों से भवन की छतें गायब क्यों हैं? छात्रों के लिए शौचालय जैसी बुनियादी सुविधा क्यों नहीं है? बिजली की लाइन विद्यालय के ऊपर से गुजरने के बावजूद सुरक्षा के इंतजाम क्यों नहीं किए गए?
और सबसे अहम सवाल—पिछले 10 वर्षों में विद्यालय के रखरखाव के लिए कितनी धनराशि मिली और उसका इस्तेमाल कहां किया गया?
राज्यमंत्री द्वारा धनराशि और खर्च का हिसाब मांगे जाने के बाद अब विद्यालय के रिकॉर्ड की जांच महत्वपूर्ण हो गई है। यदि सरकारी धनराशि जारी हुई थी तो उसके खर्च और कराए गए कार्यों का सत्यापन यह स्पष्ट कर सकता है कि विद्यालय की बदहाली की असली वजह बजट की कमी है या फिर व्यवस्था में कहीं और खामी है।
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