मेंटेनेंस नहीं देने वालों पर सख्ती का रास्ता खुला! RG रेजिडेंसी मामले में हाईकोर्ट ने PVVNL के नोटिस किए रद्द
सिंगल पॉइंट बिजली कनेक्शन और मेंटेनेंस वसूली को लेकर था विवाद, AOA ने हाईकोर्ट में दी थी चुनौती
नोएडा। नोएडा की सेक्टर-120 स्थित RG रेजिडेंसी में मेंटेनेंस शुल्क की वसूली और बिजली आपूर्ति को लेकर चल रहा विवाद अब इलाहाबाद हाईकोर्ट तक पहुंचने के बाद एक नए मोड़ पर आ गया है। हाईकोर्ट ने पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (PVVNL) की ओर से जारी 8 अप्रैल और 13 अप्रैल 2026 के नोटिसों को निरस्त कर दिया है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा और न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह की खंडपीठ ने की।
क्या था पूरा विवाद?
RG रेजिडेंसी में बिजली की आपूर्ति सिंगल पॉइंट कनेक्शन के माध्यम से होती है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, सोसायटी में कुछ निवासी बिजली का भुगतान कर रहे थे, लेकिन मेंटेनेंस शुल्क का भुगतान नहीं कर रहे थे। AOA का पक्ष था कि ऐसे निवासी सोसायटी की सुरक्षा, सफाई, लिफ्ट, कॉमन एरिया और अन्य सुविधाओं का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन मेंटेनेंस शुल्क नहीं देते।
इसी विवाद के दौरान AOA ने कुछ बकायेदार निवासियों की बिजली आपूर्ति काट दी। इसके बाद संबंधित निवासियों ने बिजली विभाग से शिकायत की और मल्टीपॉइंट कनेक्शन की मांग भी उठाई। इसके बाद PVVNL ने AOA को नोटिस जारी कर बिजली आपूर्ति बहाल करने तथा मल्टीपॉइंट कनेक्शन उपलब्ध कराने के संबंध में निर्देश दिए। AOA ने इन नोटिसों को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
हाईकोर्ट ने क्या किया?
हाईकोर्ट ने मामले में PVVNL की ओर से जारी 8 और 13 अप्रैल 2026 के विवादित नोटिसों को रद्द कर दिया और याचिका का निस्तारण कर दिया। रिपोर्टों के मुताबिक अदालत के आदेश के बाद बिजली निगम की ओर से जारी इन नोटिसों के आधार पर AOA पर कार्रवाई का रास्ता समाप्त हो गया।
हालांकि, यहां यह अंतर समझना जरूरी है कि हाईकोर्ट का यह आदेश सीधे तौर पर पूरे NCR की सभी सोसायटियों को मेंटेनेंस बकाये पर बिजली काटने की सार्वभौमिक अनुमति नहीं देता। उपलब्ध रिपोर्टिंग में अदालत द्वारा इस विशेष विवाद में PVVNL के नोटिसों को रद्द किए जाने की बात सामने आई है।
मई में PVVNL ने जारी किया था अलग निर्देश
इस मामले को समझने के लिए एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आता है। 7 मई 2026 को PVVNL ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा की AOAs/RWAs को निर्देश दिया था कि मेंटेनेंस शुल्क के बकाये के आधार पर बिजली कनेक्शन न काटे जाएं और प्रीपेड बिजली मीटर से मेंटेनेंस राशि की कटौती न की जाए।
Hindustan Times के अनुसार, यह निर्देश UPERC Supply Code 2023-24 का हवाला देते हुए जारी किया गया था। इसमें कहा गया था कि बिजली की आपूर्ति केवल बिजली के बकाये के कारण ही काटी जा सकती है; अन्य शुल्कों के भुगतान में चूक को बिजली काटने का आधार नहीं बनाया जा सकता।
यानी RG रेजिडेंसी के हाईकोर्ट आदेश और मई में जारी PVVNL के प्रशासनिक निर्देश को अलग-अलग संदर्भों में देखना जरूरी है।
RG रेजिडेंसी में पहले भी उठा था मीटर से मेंटेनेंस वसूली का विवाद
RG रेजिडेंसी में मेंटेनेंस और बिजली को जोड़ने का विवाद नया नहीं है। जनवरी 2026 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, सोसायटी के कुछ निवासियों ने आरोप लगाया था कि AOA ने प्रीपेड बिजली मीटर के माध्यम से मेंटेनेंस शुल्क वसूलने की व्यवस्था लागू की थी। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख था कि कुछ मीटरों में नकारात्मक बैलेंस दिखाई देने की शिकायतें सामने आई थीं। हालांकि ये निवासियों द्वारा लगाए गए आरोप थे, जिन्हें संबंधित पक्ष के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
AOA का क्या कहना है?
मीडिया रिपोर्टों में RG रेजिडेंसी AOA के पूर्व सचिव अविनाश अरुण के हवाले से कहा गया कि कुछ निवासी बिजली का भुगतान तो करते हैं, लेकिन मेंटेनेंस शुल्क रोक देते हैं और सोसायटी की सुविधाओं का इस्तेमाल जारी रखते हैं। AOA का कहना रहा कि इससे नियमित भुगतान करने वाले निवासियों और सोसायटी के रखरखाव पर आर्थिक दबाव पड़ता है।
हाईकोर्ट में RG रेजिडेंसी का पुराना मुकदमा भी रहा है
RG रेजिडेंसी AOA पहले भी इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच चुकी है। 9 जुलाई 2025 को RG Residency Apartment Owners Association बनाम State of U.P. and 2 Others, Writ-C No. 21521 of 2025, में हाईकोर्ट के समक्ष याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी गई थी। अदालत ने याचिका को वापस लिए जाने के रूप में निस्तारित करते हुए नई याचिका दाखिल करने की स्वतंत्रता दी थी।
अब क्या बदलेगा?
इस आदेश से RG रेजिडेंसी के मामले में AOA को PVVNL के उन दोनों नोटिसों से राहत मिली है जिन्हें उसने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हालांकि, मेंटेनेंस की वसूली के लिए बिजली काटना हर परिस्थिति में कानूनी रूप से स्वतः वैध है, ऐसा निष्कर्ष केवल इस आदेश के आधार पर निकालना उचित नहीं होगा।
मेंटेनेंस बकाये की वसूली के लिए AOA को सोसायटी के लागू नियमों, बायलॉज, अपार्टमेंट एक्ट और अन्य उपलब्ध वैधानिक उपायों के अनुरूप कार्रवाई करनी होगी। बिजली जैसी आवश्यक सेवा को लेकर मई 2026 का PVVNL निर्देश भी इस पूरे विवाद में महत्वपूर्ण संदर्भ बना हुआ है।
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