मेरठ में 16,726 अवैध भवनों पर सुप्रीम कोर्ट का शिकंजा, 44 सील इमारतें होंगी ध्वस्त; मेडा को कार्रवाई के आदेश
मेरठ। मेरठ में अवैध निर्माण के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख से हड़कंप मच गया है। शास्त्रीनगर के सेंट्रल मार्केट से शुरू हुए मामले में अब कार्रवाई का दायरा बढ़ता दिखाई दे रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) के जोन-ए में सर्वे के दौरान चिन्हित 16,726 अनधिकृत भवनों को सील करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि निर्माण पुराना होने मात्र से वह वैध नहीं हो जाता। यदि निर्माण नियमों के विपरीत है तो संबंधित प्राधिकरण को नियमानुसार कार्रवाई करनी होगी।
जोन-ए की सर्वे रिपोर्ट में सामने आए 16,726 अनधिकृत भवन
मामले की सुनवाई के दौरान मेरठ विकास प्राधिकरण की ओर से जोन-ए की सर्वे रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पेश की गई। रिपोर्ट में जोन-ए में कुल 16,726 भवनों को अनधिकृत बताया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर अदालत ने संबंधित निर्माणों को सील करने के निर्देश दिए।
मामले की सुनवाई जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की खंडपीठ ने की। सुनवाई के दौरान जोन-बी, सी और डी की रिपोर्ट दाखिल नहीं किए जाने पर अदालत ने मेडा के सचिव अमित गुप्ता के प्रति नाराजगी भी जताई।
44 भवनों में आवासीय अनुमति, लेकिन चल रहा था व्यावसायिक इस्तेमाल
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि जोन-ए में 44 आवासीय भवनों में व्यावसायिक निर्माण अथवा व्यावसायिक गतिविधियों का मामला सामने आया है।
इनमें से 6 भवन बिना स्वीकृत नक्शे के बनाए गए थे, जिन्हें पूरी तरह ध्वस्त किए जाने की जानकारी अदालत को दी गई।
वहीं, अन्य 38 संपत्तियों के पास आवासीय निर्माण की स्वीकृति थी, लेकिन उनमें अतिरिक्त निर्माण कर व्यावसायिक उपयोग किए जाने का मामला सामने आया।
सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी 44 सील भवनों को ध्वस्त करने और कार्रवाई के बाद नई अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
14 जुलाई के आदेश का पालन कराने के निर्देश
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि जिन अवैध निर्माणों को सील किया गया है, उनमें से कई के खिलाफ अभी तक पूरी कार्रवाई नहीं हुई है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने अपने 14 जुलाई के पूर्व आदेश का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
अदालत ने स्पष्ट किया कि सील किए गए 44 भवनों के संबंध में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पूरी कर उसकी रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत की जाए।
9 दिसंबर को होगी अगली सुनवाई
मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 9 दिसंबर 2026 की तारीख तय की है। तब तक संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई पूरी कर अनुपालन आख्या (Compliance Report) दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
आवास एवं विकास परिषद की ओर से भी 44 सील भवनों से संबंधित अनुपालन आख्या अदालत के समक्ष दाखिल किए जाने की जानकारी दी गई।
पूरे मेरठ की कार्रवाई पर टिकी नजर
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जोन-ए में चिन्हित 16,726 अनधिकृत भवनों के खिलाफ मेडा किस तरह और कितनी तेजी से कार्रवाई करता है। साथ ही जोन-बी, सी और डी की सर्वे रिपोर्ट अदालत में कब पेश होती है, इस पर भी नजर रहेगी।
फिलहाल अदालत के आदेश के बाद मेरठ में अवैध निर्माणों को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई तेज होने की संभावना है।
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