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सेटिंग, स्टे और अवैध कॉलोनियां - प्राधिकरण सचिव से ‘द तहलका खबर’ की खास बातचीत
ब्यूरो।
मथुरा–वृंदावन विकास प्राधिकरण के सचिव से ‘द तहलका खबर’ की एक्सक्लूसिव बातचीत
मथुरा।मथुरा–वृंदावन में लगातार बढ़ते अवैध निर्माण, अवैध कॉलोनियों और नियोजनहीन विकास को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। आमजन से लेकर जनप्रतिनिधियों तक, हर स्तर पर मथुरा–वृंदावन विकास प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर उंगलियां उठती रही हैं। इन्हीं तमाम मुद्दों को लेकर द तहलका खबर के संपादक ने विकास प्राधिकरण के सचिव से सीधे और स्पष्ट सवाल किए। बातचीत में जहां प्राधिकरण की वर्तमान योजनाओं, अवैध निर्माणों पर कार्रवाई और स्टे के दौरान निर्माण जैसे संवेदनशील विषय उठे, वहीं आम आदमी की मजबूरी, सस्ती आवास योजनाएं और अधिकारियों की भूमिका पर भी तीखे प्रश्न रखे गए।
मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप चलेगा प्राधिकरण
सचिव ने साफ शब्दों में कहा कि उनका पूरा कार्यकाल शासन और मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप रहेगा। नगरीय नियोजन को बढ़ावा देना, अवैध गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाना और नई आवासीय योजनाओं को गति देना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने स्वीकार किया कि अवैध कॉलोनियों और निर्माणों पर पहले भी कार्रवाई हुई है और यह प्रक्रिया आगे भी निरंतर जारी रहेगी।
दो बड़ी आवासीय योजनाएं प्रस्तावित
प्राधिकरण सचिव ने बताया कि वर्तमान में दो प्रमुख आवासीय योजनाएं प्रस्तावित हैं—एक फरह क्षेत्र के पास रहीमपुर में और दूसरी छाता तहसील में। दोनों योजनाओं में भूमि अधिग्रहण और सहमति के आधार पर समझौते की प्रक्रिया चल रही है। इन योजनाओं के पूर्ण होने के बाद आमजन को आवास उपलब्ध कराना प्राधिकरण का लक्ष्य है।
अवैध निर्माणों की समीक्षा रिपोर्ट मौजूद
मथुरा और वृंदावन में बिना मानचित्र स्वीकृति के हो रहे निर्माणों पर सचिव ने माना कि समीक्षा रिपोर्ट मंगाई जा चुकी है। शिकायत मिलने पर तत्काल संज्ञान लिया जा रहा है और 15–20 से अधिक अवैध कॉलोनियों पर समय-समय पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई भी की गई है।
रिहायशी नक्शे पर व्यावसायिक गतिविधि करने वालों पर शिकंजा
ऐसे निर्माण जिनमें रिहायशी मानचित्र स्वीकृत कराकर होटल, हॉस्पिटल, स्वीट शॉप जैसी व्यावसायिक गतिविधियां चलाई जा रही हैं, उन पर भी कार्रवाई तय है। सचिव ने बताया कि ऐसे सभी मामलों की सूची तैयार की जा रही है और अधिनियम के तहत अर्थदंड सहित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
स्टे के नाम पर निर्माण पूरा करना अब नहीं चलेगा
हाईकोर्ट से स्टे लेकर निर्माण पूरा करने के मामलों पर सचिव का रुख स्पष्ट दिखा। उन्होंने कहा कि माननीय न्यायालय का सम्मान सर्वोपरि है, लेकिन “स्टे का मतलब स्टे ही होता है।” ऐसे मामलों में एई और जेई को सख्त निर्देश दिए जाएंगे कि वे स्टे अवधि में निर्माण की मॉनिटरिंग करें और किसी भी अनियमितता को रोका जाए।
अवैध कॉलोनियों की अपडेटेड लिस्ट बनेगी
प्राधिकरण की वेबसाइट पर दर्ज 220 अवैध कॉलोनियों से कहीं अधिक कॉलोनियां ज़मीन पर मौजूद होने के सवाल पर सचिव ने माना कि लिस्ट को अपडेट किया जाएगा, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके और आम आदमी गुमराह न हो।
ध्वस्तीकरण के बाद दोबारा निर्माण पर अब होगी निगरानी
बार-बार ध्वस्तीकरण के बाद अवैध कॉलोनियों के पुनर्निर्माण के सवाल पर सचिव ने माना कि यह एक बड़ी चुनौती है, लेकिन अब फील्ड अधिकारियों को और अधिक जिम्मेदार बनाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि मीडिया उनकी आंख और कान है और ऐसी सूचनाओं पर तुरंत कार्रवाई होगी।
आम आदमी के लिए क्या है विकल्प?
सस्ती आवासीय योजनाओं और मध्यम वर्ग के सवाल पर सचिव ने नए बिल्डिंग बायलॉज का हवाला देते हुए बताया कि 100 वर्गमीटर तक निर्माण पर अब केवल रजिस्ट्रेशन कराना होगा और वही स्वीकृति मानी जाएगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी प्लॉट को खरीदने से पहले प्राधिकरण से उसकी स्थिति, भू-उपयोग और वैधता की जानकारी जरूर लें।
शिकायतों पर होगी कार्रवाई
शिकायत निस्तारण की समय-सीमा पर सचिव ने कहा कि हर शिकायत पर नोटिस जारी कर कार्रवाई की जा रही है।
सेटिंग के आरोपों पर जांच का दावा
अवर अभियंताओं पर “सेटिंग” के आरोपों पर सचिव ने कहा कि ऐसे मामले संज्ञान में आने पर चेतावनी और कार्रवाई की जाती है और पहले भी इस तरह की कार्रवाई हो चुकी है।
माननीयों के फोन पर भी नहीं रुकेगी कार्रवाई
जब कार्रवाई के दौरान माननीयों के फोन आने का सवाल उठा, तो सचिव ने साफ कहा कि नियम और कानून सर्वोपरि हैं। कानून सदन से पारित है और उसी के तहत कार्रवाई की जाएगी।
अवैध निर्माण करने वालों के लिए साफ संदेश
अंत में सचिव ने अवैध निर्माण और कॉलोनियां विकसित करने वालों को चेतावनी देते हुए कहा कि किसी के बहकावे में न आएं, अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई लगातार जारी रहेगी और आगे भी सख्ती बरती जाएगी।
सचिव के जवाबों से यह साफ होता है कि मथुरा–वृंदावन विकास प्राधिकरण आने वाले समय में अवैध कॉलोनियों और अवैध निर्माणों पर सख्ती के दावे कर रहा है, साथ ही आवासीय योजनाओं के माध्यम से आमजन को राहत देने की बात भी कही जा रही है। हालांकि ज़मीनी हकीकत में ये दावे कितना असर दिखाते हैं, यह आने वाला समय बताएगा। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्राधिकरण केवल कार्रवाई और ध्वस्तीकरण तक सीमित रहेगा या फिर अवैध निर्माण के पूरे नेटवर्क पर स्थायी लगाम लगाने में सफल होगा। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि सचिव के ये आश्वासन काग़ज़ों से निकलकर धरातल पर कब और कैसे दिखाई देंगे।
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