नोएडा हिंसा के बाद सख्त हुई योगी सरकार, मजदूर-उद्योग विवाद सुलझाने को बनी हाई लेवल कमेटी

DM मेधा रूपम बोलीं – कानून व्यवस्था सर्वोच्च प्राथमिकता, श्रम आयुक्त ने कहा बातचीत से निकलेगा समाधान

Apr 13, 2026 - 14:43
Apr 14, 2026 - 08:20

नोएडा में वेतन वृद्धि और न्यूनतम मजदूरी की मांग को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शन के बाद उत्तर प्रदेश सरकार सख्त हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर मजदूरों और उद्योगों के बीच बढ़ते विवाद को सुलझाने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है।

जानकारी के अनुसार नोएडा के फेस-2 और सेक्टर 60 के औद्योगिक क्षेत्रों में हजारों मजदूर सड़कों पर उतर आए थे। प्रदर्शन के दौरान कई जगह पथराव, तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं सामने आईं, जिससे औद्योगिक क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया।

प्रदर्शन के कारण कई प्रमुख मार्गों पर जाम लग गया और दिल्ली-नोएडा बॉर्डर समेत कई इलाकों में यातायात प्रभावित रहा। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को अतिरिक्त बल तैनात करना पड़ा।

जिलाधिकारी मेधा रूपम ने कहा कि प्रशासन की प्राथमिकता शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और मजदूरों तथा उद्योगों के बीच समन्वय स्थापित कर समाधान निकाला जाएगा।

उत्तर प्रदेश के श्रम आयुक्त ने भी कहा कि श्रमिकों के हितों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि श्रमिक संगठनों और उद्योग प्रतिनिधियों से बातचीत कर ऐसा समाधान निकाला जाएगा जिससे भविष्य में इस तरह की स्थिति उत्पन्न न हो।

मजदूरों की मांग है कि उन्हें हरियाणा की तरह न्यूनतम वेतन दिया जाए। उनका कहना है कि वर्तमान में 12 घंटे काम करने के बावजूद 13 से 16 हजार रुपये तक ही वेतन मिल रहा है, जो बढ़ती महंगाई के हिसाब से पर्याप्त नहीं है।

सरकार द्वारा गठित हाई लेवल कमेटी की कमान औद्योगिक विकास आयुक्त को सौंपी गई है। इसके अलावा अपर मुख्य सचिव (एमएसएमई) और प्रमुख सचिव श्रम एवं सेवायोजन को भी समिति में शामिल किया गया है। समिति में मजदूर संगठनों के पांच प्रतिनिधि और उद्योग संगठनों के तीन प्रतिनिधि भी शामिल किए गए हैं।

सरकार का मानना है कि संवाद और आपसी सहमति के जरिए विवाद का समाधान निकाला जाएगा, जिससे भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लग सके और औद्योगिक माहौल स्थिर बना रहे।

फिलहाल इस पूरे मामले पर सभी की नजर बनी हुई है कि हाई लेवल कमेटी मजदूरों और उद्योगों के बीच संतुलन बनाने में कितनी सफल होती है।

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