क्या आज का युवा विदेशों को बेहतर अवसर मानता है?

भारतीय युवाओं के विदेश जाने की इच्छा पर चर्चा में यह बात सामने आई है कि उनका यह निर्णय किसी असंतोष का परिणाम नहीं है, बल्कि वे बेहतर अनुसंधान सुविधाएं, उच्च वेतन और काम के अवसरों के संतुलन की खोज कर रहे हैं। स्टार्टअप इंडिया, स्किल इंडिया और PLI जैसी योजनाओं के माध्यम से कई युवा भारत में अवसर देखें हैं, लेकिन स्नातकों की क्षमताओं और उद्योग की आवश्यकताओं के बीच का अंतर उन्हें विदेश की ओर आकर्षित कर रहा है। एक छात्रा की टिप्पणी इस पर जोर देती है — युवा चाहते हैं कि भारत ऐसा देश बने जहां "विदेश क्यों?" का सवाल "भारत क्यों नहीं?" में बदल जाए।

Jul 1, 2026 - 04:21
क्या आज का युवा विदेशों को बेहतर अवसर मानता है?

"यदि आपको मौका मिले, तो क्या आप भारत से बाहर जाकर बसने की सोचेंगे?"

यह सवाल हमने दिल्ली, पुणे, अहमदाबाद और प्रयागराज के छात्रों और युवा पेशेवरों से पूछा। उनके उत्तर काफी चौंकाने वाले थे। कुछ ने तुरंत "हां" कहा, जबकि अन्य ने स्पष्ट रूप से कहा,

"हम भारत में रहकर ही अपने करियर को आकार देना चाहेंगे।"

हालांकि, लगभग सभी प्रतिक्रियाओं में एक कॉमन शब्द सुनने को मिला—"अवसर"।

दिल्ली में अध्ययन करने वाले एक इंजीनियरिंग छात्र ने कहा,

"मैं विदेश जाना इसलिए नहीं चाह रहा कि मुझे भारत पसंद नहीं है, बल्कि इसलिए कि वहां रिसर्च, वेतन और करियर विकास के अवसर अधिक आकर्षक नजर आते हैं।"

इसी तरह, एक युवा सॉफ्टवेयर पेशेवर ने कहा,

"अगर भारत में भी ऐसे ही अवसर और काम करने का माहौल मिलता, तो शायद मुझे विदेश जाने की आवश्यकता नहीं होती।"

पिछले कुछ वर्षों में, भारत ने युवाओं के लिए रोजगार के अवसर और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वाकांक्षी कार्यक्रम लॉन्च किए हैं। इनमें स्टार्टअप इंडिया, स्किल इंडिया मिशन, मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया और प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, हाल ही में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण से संबंधित उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं में हजारों करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। ये सभी कार्यक्रम कौशल विकास, प्रौद्योगिकी, विनिर्माण, स्टार्टअप और रोजगार जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को संलग्न करते हैं। सरकार का कहना है कि इन पहलों से करोड़ों युवा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित हो रहे हैं।

हालांकि, विदेशों में अध्ययन और रोजगार की आकांक्षा रखने वाले भारतीय युवाओं की संख्या हमेशा चर्चा में रहती है। कनाडा, अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और जर्मनी जैसे देशों में भारतीय छात्रों और पेशेवरों की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है। शिक्षा सलाहकारों के मुताबिक, इसका मुख्य कारण बेहतर अनुसंधान की सुविधाएं, अंतरराष्ट्रीय अनुभव, आकर्षक वेतन और वैश्विक नौकरी बाजार तक पहुंच है।

हालाँकि तस्वीर का एक और पहलू भी है। एक युवा उद्यमी से पूछा कि क्या वह विदेश जाने पर विचार करेगा। उन्होंने उत्तर दिया,

"आज भारत में स्टार्टअप, तकनीकी और डिजिटल व्यवसायों के लिए पहले से कहीं अधिक अवसर उपलब्ध हैं। चुनौतियाँ हैं, लेकिन संभावनाएँ भी बहुत हैं।"

कई युवाओं का कहना है कि भारत का तेजी से बढ़ता डिजिटल बाजार, उभरता हुआ स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र, और वैश्विक कंपनियों की बढ़ती उपस्थिति उन्हें अपने देश में रहने के लिए प्रेरित करती है।

स्वतंत्र अर्थशास्त्रियों का यह मानना है कि केवल बाहर जाने वाले युवाओं की संख्या के आधार पर निष्कर्ष निकालना सही नहीं है। उनका कहना है कि वैश्वीकरण के इस युग में प्रतिभाओं का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थानांतरण एक सामान्य प्रक्रिया बन चुकी है। असली सवाल यह है कि क्या देश अपने युवाओं के लिए पर्याप्त गुणवत्ता वाले रोजगार, अनुसंधान के अवसर और प्रतिस्पर्धी वेतन प्रदान कर पा रहा है।

शिक्षा के क्षेत्र के जानकारों के अनुसार, भारत हर साल लाखों स्नातकों का उत्पादन करता है, लेकिन विभिन्न क्षेत्रों में उद्योगों की आवश्यकताएँ और युवाओं के कौशल के बीच एक बड़ा अंतर है। इस हालत के कारण, कई युवा बेहतर संभावनाओं की तलाश में दूसरे देशों की ओर मुड़ते हैं। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारत में उच्च शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों में निवेश को बढ़ाया जाए, तो यह प्रवृत्ति धीरे-धीरे बदल सकती है।

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे एक छात्र से पूछा कि वह विदेश क्यों जाना चाहता है। उसने उत्तर दिया,

"मैं विदेश इसलिए नहीं जाना चाहता क्योंकि वहां सब कुछ उत्तम है, बल्कि इसलिये कि वहां मेहनत और अवसरों के बीच एक उचित संतुलन है।"

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विषय केवल रोजगार से जुड़ा नहीं है। इसमें शिक्षा की गुणवत्ता, अनुसंधान की संस्कृति, जीवन स्तर, सामाजिक सुरक्षा और पेशेवर स्वतंत्रता जैसे कई पहलू शामिल हैं। इसलिए, विदेश जाने की चाह को सिर्फ देश से असंतोष के रूप में नहीं देखा जा सकता।

बातचीत के अंत में एक छात्रा ने एक बेहद विचारशील टिप्पणी की। उसने कहा,

"हमें विदेश जाने की चाह है, लेकिन हम भारत को हमेशा के लिए छोड़ना नहीं चाहते। हम चाहते हैं कि एक दिन भारत ऐसा देश बने जहां विश्व के युवा संभावनाएं खोजने आएं।"

यह बहस का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष हो सकता है। आज की युवा पीढ़ी विदेशों को बेहतर अवसरों का केंद्र मानती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उसे भारत से उम्मीदें नहीं रही हैं। वे उच्च गुणवत्ता की शिक्षा, रोजगार के बेहतर मौके, शोध एवं वैश्विक जीवन स्तर की खोज कर रहे हैं। यदि देश के भीतर ये अवसर पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हो जाएं, तो संभव है कि सवाल "विदेश क्यों?" से बदलकर "भारत क्यों नहीं?" हो जाए।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

उन्नति बोयट Hi, I am Unnati, a student of Journalism and Mass Communication driven by a passion toward creativity, storytelling, and the exploration of ideas. My work reflects a commitment to sharing thoughtful insights, public personal reflections, and creative projects that promote curiosity, self-expression, and intellectual growth. Through my writing and creative endeavors, I aim to present perspectives that mirror both my understanding and my ongoing development as a writer. As I continue to advance in the field of media and communication, I aspire to integrate creativity with purpose, producing content and visual narratives that resonate with diverse audiences and leave a lasting impression.