लखनऊ अग्निकांड: 15 मौतों के बाद जागा प्रशासन, 2016 में जिस अवैध बिल्डिंग को गिराने का था आदेश, अब उस पर चलेगा बुलडोजर!

Jun 23, 2026 - 11:47
लखनऊ अग्निकांड: 15 मौतों के बाद जागा प्रशासन, 2016 में जिस अवैध बिल्डिंग को गिराने का था आदेश, अब उस पर चलेगा बुलडोजर!

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके से सोमवार को एक ऐसी दिल दहला देने वाली खबर सामने आई, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। एक कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग की वजह से 15 मासूम जिंदगियां असमय काल के गाल में समा गईं। इस दर्दनाक हादसे के बाद अब प्रशासन की नींद टूटी है और लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने उस अवैध व्यावसायिक इमारत को ढहाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

फिलहाल, घटना की गंभीरता को देखते हुए फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) और स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) मौके पर जांच में जुटी हुई हैं।

7 घायल, तीसरी मंजिल से कूदे छात्र की रीढ़ की हड्डी टूटी

इस हादसे में कुल 7 लोग घायल हुए थे, जिनमें से 5 को प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया है। केजीएमयू (KGMU) के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह के मुताबिक, अस्पताल में अभी दो मरीज भर्ती हैं:

  • पहली पीड़ित (लड़की): पैर में चोट है, जो गंभीर नहीं है, लेकिन वह गहरे सदमे में है। उसके परिजन मंगलवार सुबह गुरुग्राम से लखनऊ पहुंचे हैं।

  • दूसरा पीड़ित (लड़का): जान बचाने के लिए तीसरी मंजिल से कूदा था। नीचे गिरते ही एक लोहे की रॉड उसकी पीठ के निचले हिस्से में घुस गई, जिससे उसकी रीढ़ की हड्डी (Spine) में गंभीर चोट आई है। वह भी सदमे में था, हालांकि अब उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

सियासत गरमाई: "SIT का झुनझुना थमा दिया गया" – संजय सिंह का योगी सरकार पर तीखा हमला

इस हादसे को लेकर अब राजनीतिक गलियारों में भी उबाल है। आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद संजय सिंह ने केजीएमयू अस्पताल जाकर घायलों (लवप्रीत और आईसीयू में भर्ती जयंत) से मुलाकात की और योगी सरकार को आड़े हाथों लिया।

संजय सिंह ने तीखे सवाल दागते हुए कहा:

"जिस बिल्डिंग में आग लगी, उसे गिराने का आदेश साल 2016 में ही हो गया था। फिर किसके इशारे पर वह आदेश वापस हुआ? क्या वहां आग से बचने का कोई इंतजाम नहीं था? दमकल की गाड़ियां इतनी देर से क्यों पहुंचीं? 15 लोगों की जान चली जाने के बाद जनता को SIT का झुनझुना पकड़ा दिया गया है। बुलडोजर चलाने वाली सरकार के पास आग बुझाने के इंतजाम नहीं हैं। दोषियों को तुरंत जेल भेजा जाए और मुआवजे के नाम पर मृतकों के परिवारों के साथ मजाक न हो।"

दूसरी ओर, भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने घटना पर दुख जताते हुए सरकार का बचाव किया। उन्होंने कहा, "यह बेहद दुखद है। मुख्यमंत्री और राज्य सरकार ने तुरंत एक्शन लिया है। भविष्य में ऐसी आपराधिक लापरवाही दोबारा न हो, इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जा रही है।"

LDA का कबूलनामा: चंद रुपयों के लालच में 8 साल पहले दबाई गई थी फाइल!

इस पूरे मामले में लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) की घोर लापरवाही उजागर हुई है। एलडीए के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि इस रिहायशी इमारत का इस्तेमाल गैर-कानूनी तरीके से व्यावसायिक रूप में किया जा रहा था।

हैरान करने वाला खुलासा: अधिकारियों के मुताबिक, इस तीन मंजिला इमारत को साल 2016 में ही अवैध निर्माण के कारण गिराने का आदेश दिया गया था। लेकिन भ्रष्टाचार का खेल ऐसा चला कि दो महीने के भीतर ही उस आदेश को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। आवासीय भूखंड का नक्शा पास करते समय 'सैटबैक' (बिल्डिंग के आसपास खाली जगह) तक नहीं छोड़ा गया था।

अब एलडीए ने इस अवैध इमारत को गिराने का नोटिस जारी किया है और उन भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ भी जांच शुरू कर दी है, जिन्होंने चंद रुपयों के लिए 15 लोगों की मौत का रास्ता साफ किया था।

बड़ा सवाल: दिल्ली के हादसों से कब सबक लेगा प्रशासन?

यह घटना सीधे तौर पर प्रशासनिक भ्रष्टाचार और 'रिश्वतखोर तंत्र' का नतीजा है। दिल्ली के उपहार सिनेमा से लेकर हालिया कोचिंग हादसों के बावजूद लखनऊ प्रशासन ने कोई सबक नहीं लिया।

क्या हमारे देश में प्रशासन तभी जागेगा जब मासूमों की लाशें गिरेंगी? क्या बिना किसी की मौत का इंतजार किए इन मौत के कुओं (अवैध कोचिंग सेंटरों) पर पहले कार्रवाई नहीं की जा सकती थी? क्या यह भ्रष्टाचार ऐसे ही चलता रहेगा? इन 15 मौतों का असली गुनहगार सिर्फ शॉर्ट-सर्किट नहीं, बल्कि वह सिस्टम है जिसने 2016 के ध्वस्तीकरण आदेश को दबा दिया था।

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