आगरा डबल मर्डर केस: पत्नी और रिश्ते के देवर की हत्या में पति, ससुर व देवर को फांसी; सास बरी, जांच में लापरवाही पर कोर्ट सख्त
आगरा में चार साल पहले हुए सनसनीखेज डबल मर्डर केस में अदालत ने कड़ा फैसला सुनाया है। अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या 26 अमरजीत सिंह ने पत्नी और रिश्ते के देवर की हत्या के मामले में दोषी पति, ससुर और देवर को फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने तीनों दोषियों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। वहीं, साक्ष्यों के अभाव में सास को बरी कर दिया गया।
दिनदहाड़े गली में दौड़ाकर की थी निर्मम हत्या
यह मामला 27 मई 2022 का है, जब एत्माद्दौला क्षेत्र के सीता नगर में दिनदहाड़े पूजा और अछनेरा निवासी शिवम सिसौदिया की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। आरोपियों ने दोनों को गली में दौड़ाकर बांक (धारदार हथियार) से ताबड़तोड़ वार किए।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार पूजा के शरीर पर 11 और शिवम के शरीर पर 9 गंभीर चोटें पाई गई थीं। घटना की पूरी वारदात पास में लगे CCTV कैमरे में रिकॉर्ड हो गई थी, जो अदालत में महत्वपूर्ण साक्ष्य बना।
अवैध संबंध के शक और दहेज विवाद बना वजह
मृतका पूजा की मां इंद्रा देवी ने एत्माद्दौला थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। उन्होंने बताया था कि पूजा की शादी 30 अप्रैल 2015 को हुई थी।
आरोप था कि शादी के बाद ससुराल पक्ष अतिरिक्त दहेज में कार और 5 लाख रुपये की मांग करता था। शिवम, जो पूजा का मौसेरा देवर था, उसकी मदद करता था। इसी कारण आरोपी उससे भी रंजिश रखते थे।
परिवार को शक था कि पूजा और शिवम के बीच अवैध संबंध हैं, जिसके चलते इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया गया।
CCTV फुटेज बना सजा का अहम आधार
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज को पैन ड्राइव में सुरक्षित कर अदालत में पेश किया था। हालांकि सुनवाई के दौरान सामने आया कि पैन ड्राइव में हत्या के वीडियो की जगह किसी प्रतिष्ठान का वीडियो था।
इस गंभीर लापरवाही पर अदालत ने सख्त रुख अपनाया और मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की।
बाद में फोरेंसिक लैब द्वारा असली सीसीटीवी फुटेज जुटाकर अदालत में प्रस्तुत किया गया, जिसके आधार पर दोषियों के खिलाफ अपराध साबित हुआ।
जांच में लापरवाही पर अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश
न्यायालय ने जांच में लापरवाही को गंभीर मानते हुए एसीपी डॉ. सुकन्या शर्मा और विवेचक विनोद कुमार के खिलाफ प्रकीर्ण वाद दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
साथ ही जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्य सचिव को पत्र भेजकर विभागीय कार्रवाई करने को कहा गया है।
14 गवाहों के बयान से साबित हुआ अपराध
अदालत में सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता मोहित पाल ने कुल 14 गवाह पेश किए।
इनमें मृतका पूजा की मां इंद्रा देवी, मृतक शिवम की मां सुनीता देवी, शिवम के भाई अभिषेक, प्रवीन, डॉक्टर अजय कुमार गर्ग, अपर नगर मजिस्ट्रेट कृष्णानंद तिवारी सहित कई अधिकारियों के बयान शामिल थे।
सजा सुनते ही कोर्ट में रो पड़े दोषी
अदालत द्वारा फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद तीनों दोषी कोर्ट रूम में रोने लगे।
अदालत ने टिप्पणी की कि अपराध बेहद क्रूर और सुनियोजित था, इसलिए इसे दुर्लभतम श्रेणी में रखा गया।
क्या था पूरा मामला (संक्षेप)
What's Your Reaction?

