“आस्था के नाम पर दरिंदगी: ‘ढोंगी बाबा’ अशोक खरात का काला साम्राज्य, यौन शोषण से लेकर करोड़ों की संपत्ति तक खुलासे”
महाराष्ट्र के नासिक जिले के सिन्नर तालुका के छोटे से गांव मिरगांव में खुद को आध्यात्मिक गुरु बताने वाले अशोक खरात के खिलाफ चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। गांव के ही संतोष हिंगे बताते हैं कि खरात आम लोगों को अपने पास नहीं आने देता था और खासतौर पर महिलाओं को प्राथमिकता देता था। जैसे-जैसे लोगों को उसकी गतिविधियों पर शक हुआ, उन्होंने उसके पास जाना बंद कर दिया।
करीब ढाई हजार आबादी वाले इस गांव में खरात ने ‘शिवनिका संस्थान’ की स्थापना की और धीरे-धीरे अपनी पकड़ मजबूत कर ली। उसने पहले 17-18 एकड़ जमीन खरीदी और फिर ईशान्येश्वर महादेव मंदिर का निर्माण कराया, जिससे धार्मिक आयोजनों में भीड़ बढ़ने लगी। इसी आस्था के माहौल का फायदा उठाकर महिलाओं के यौन शोषण के गंभीर आरोप सामने आए हैं। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है और अदालत ने उसे पुलिस हिरासत में भेजा है।
गांव में डर का माहौल इतना गहरा है कि लोग खुलकर बात करने से भी बच रहे हैं। कई ग्रामीणों ने आशंका जताई कि अगर खरात जेल से बाहर आया तो वह उन्हें नुकसान पहुंचा सकता है। जांच में सामने आया है कि खरात खुद को उच्च शिक्षित और मर्चेंट नेवी में कप्तान बता कर लोगों का विश्वास जीतता था।
आरोप है कि वह धार्मिक अनुष्ठानों और तंत्र-मंत्र के नाम पर महिलाओं को झांसे में लेकर उनका शोषण करता था। पीड़ित महिलाओं का कहना है कि वह उन्हें धमकाता था कि अगर उन्होंने किसी को कुछ बताया तो उनके परिवार को नुकसान होगा। वहीं, ठगी के मामलों में भी सामने आया है कि वह नकली रत्न और धार्मिक वस्तुएं लाखों रुपये में बेचता था और लोगों को डराने के लिए मंदिर परिसर में नकली सांप-बाघ तक रखे गए थे।
खरात का मिरगांव में बना फार्महाउस भी चर्चा में है, जो करीब 16 एकड़ में फैला बताया जाता है और जिसकी लागत लगभग 18 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उसने नदी क्षेत्र में अतिक्रमण कर निर्माण कराया और कई लोगों के रास्ते बंद कर दिए। इसके अलावा उस पर बड़े पैमाने पर जमीन खरीदने और बेनामी संपत्ति बनाने के आरोप भी लगे हैं। जांच में उसकी कुल संपत्ति 40 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है।
खरात के संबंध कई प्रभावशाली लोगों से होने की भी चर्चा है, जिनमें राजनेता, अधिकारी और उद्योगपति शामिल बताए जा रहे हैं। उसकी अपॉइंटमेंट के लिए हजारों रुपये लेने और महीनों तक इंतजार करवाने की बात भी सामने आई है।
इस पूरे मामले ने आस्था के नाम पर हो रहे अपराधों और अंधविश्वास की आड़ में चल रहे नेटवर्क पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि कहीं इस पूरे मामले में किसी सरकारी तंत्र की मिलीभगत तो नहीं थी। फिलहाल पुलिस और एसआईटी मामले की गहन जांच कर रही है और अन्य संभावित पीड़ितों की तलाश जारी है। वहीं, स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों की ओर से आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग तेज होती जा रही है, ताकि भविष्य में कोई और इस तरह आस्था का गलत फायदा न उठा सके।
What's Your Reaction?

