क्या 'विकसित भारत' का सपना युवाओं के सपनों से मेल खाता है?
"विकसित भारत 2047" का सपना सिर्फ़ मेट्रो, एक्सप्रेसवे और GDP ग्रोथ के बारे में नहीं है। यह समय पर भर्ती परीक्षाएं, अच्छी शिक्षा, रिसर्च के मौके और महिलाओं के लिए समान अधिकारों के बारे में भी है। सरकार ने 'मेक इन इंडिया', 'स्टार्टअप इंडिया' और 'गति शक्ति' जैसी पहल शुरू की हैं, लेकिन जानकारों का मानना है कि विकास का असली पैमाना सिर्फ़ आर्थिक आंकड़े नहीं, बल्कि रोज़गार की गुणवत्ता, सामाजिक सुरक्षा और अवसरों की निष्पक्षता है।
"अगर आप 2047 के भारत की कल्पना करें, तो आप क्या चाहेंगे?" - दिल्ली के एक विश्वविद्यालय में पढ़ रहे छात्रों से यही सवाल पूछा गया।
एक छात्र ने कहा,
"ऐसा भारत जहाँ डिग्री मिलने के बाद नौकरी पाने के लिए सालों तक इंतज़ार न करना पड़े।"
एक छात्रा ने जवाब दिया,
"ऐसा भारत जहाँ सभी को अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएँ मिल सकें।"
और एक युवा उद्यमी ने कहा,
"ऐसा भारत जहाँ स्टार्टअप शुरू करने के लिए संघर्षों से ज़्यादा अवसर हों।"
इन उत्तरों को सुनकर एक और सवाल स्वाभाविक रूप से उत्पन्न होता है| हाल के वर्षों में, केंद्र सरकार ने "विकसित भारत" को एक प्रमुख राष्ट्रीय लक्ष्य के रूप में स्थापित किया है। इस दिशा में कई महत्वपूर्ण पहलों को आगे बढ़ाया गया है, जैसे गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान, भारतमाला परियोजना, विशेष माल परिवहन कॉरिडोर, सेमीकंडक्टर मिशन, मेक इन इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, डिजिटल इंडिया, प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) और आयुष्मान भारत। इन परियोजनाओं और कार्यक्रमों में लाखों करोड़ रुपये का निवेश किया गया है।
सरकार का कहना है कि मजबूत आधारभूत ढांचे, तकनीकी प्रगति और आर्थिक विकास भारत को विकसित राष्ट्र की ओर ले जाएगा। लेकिन जब हमने युवाओं से यह पूछा कि उनके लिए "विकसित भारत" का क्या अर्थ है, तो उनके उत्तर केवल मेट्रो, एक्सप्रेसवे और स्मार्ट शहरों तक सीमित नहीं रहे।
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले एक छात्र ने बताया,
"मेरे लिए विकसित भारत का मतलब है कि भर्ती परीक्षाएं समय पर हों और योग्य युवाओं को रोजगार मिले।"
वहीं, इंजीनियरिंग के एक छात्र ने कहा,
"अगर हमें अच्छी नौकरियों और शोध के अवसर नहीं मिलते, तो केवल बड़े प्रोजेक्ट्स हमें समाधान नहीं प्रदान कर सकते।"
युवाओं की यह सोच केवल व्यक्तिगत आकांक्षा तक सीमित नहीं है। विभिन्न सर्वेक्षणों और रोजगार संबंधित अध्ययनों में यह स्पष्ट हुआ है कि नौकरी पाना, कौशल विकास करना और आर्थिक स्थिरता युवाओं के लिए प्राथमिकता सूची में शीर्ष पर हैं। हर साल लाखों युवा सरकारी और निजी क्षेत्र की नौकरियों के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। ऐसे में, विकास का सबसे महत्वपूर्ण मानक उनके लिए रोजगार और उपलब्ध अवसर बन जाता है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि "विकसित भारत" का सपना केवल आर्थिक प्रगति या बुनियादी ढांचे के विस्तार से पूरा नहीं हो सकता। इसके लिए आवश्यक है गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास पर ध्यान केंद्रित करना।
जब हमने राजस्थान की एक छात्रा से पूछा कि वह 2047 में भारत को कैसे देखना चाहती हैं, तो उन्होंने कहा,
"मैं ऐसा भारत चाहती हूं जहां महिलाओं को अपने अधिकार और अवसर पाने के लिए संघर्ष नहीं करना पड़े।"
उनके इस उत्तर में यह स्पष्ट है कि आज के युवा केवल आर्थिक उन्नति नहीं, बल्कि सामाजिक समानता और अवसरों की निष्पक्षता की भी ख्वाहिश रखते हैं।
स्वतंत्र अर्थशास्त्रियों का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से विकास कर रही है और आधारभूत ढांचे में भारी निवेश हो रहा है। लेकिन किसी भी विकसित देश की पहचान केवल उसकी GDP से नहीं होती। नागरिकों की आय, रोजगार की गुणवत्ता, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा का स्तर भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
बातचीत के दौरान एक युवा ने एक बहुत ही गहन विचार साझा किया। उसने कहा,
"हम विकसित भारत के खिलाफ नहीं हैं; हम तो इस विकास का हिस्सा बनना चाहते हैं। बस सवाल यह है कि क्या हमारे भविष्य के लिए भी उसमें स्थान है?"
शायद यही इस मुद्दे का सबसे अहम पहलू है। "विकसित भारत" एक राष्ट्रीय सपना है, लेकिन इसे साकार करने के लिए लाखों युवा सपनों को भी इसमें समाहित करना होगा। क्योंकि कोई राष्ट्र तब तक विकसित नहीं माना जाता जब तक उसकी अर्थव्यवस्था उन्नति नहीं करती; वह तभी विकसित कहलाता है जब उसके युवा इस विश्वास के साथ आगे बढ़ते हैं कि उनका भविष्य भी उसी रफ्तार से प्रगति कर रहा है।
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