नोएडा जिला अस्पताल में बड़ी लापरवाही : मरीजों के लिए मंगवा ली जानवरों वाली सिरिंज, 3 स्तर की जांच भी रही फेल
गौतमबुद्ध नगर। उत्तर प्रदेश के नोएडा जिला अस्पताल से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल प्रशासन ने मरीजों के इलाज के लिए इंसानों की बजाय वेटरनरी (पशुओं में इस्तेमाल होने वाली) सिरिंज का ऑर्डर कर दिया। हैरानी की बात यह है कि यह ऑर्डर तीन स्तरों की जांच प्रक्रिया से गुजरने के बावजूद किसी अधिकारी की नजर में गलती नहीं आई।
ऑर्डर में बड़ी चूक
सूत्रों के अनुसार 25 दिसंबर 2025 को जिला अस्पताल प्रशासन ने GeM (Government e-Marketplace) पोर्टल के माध्यम से 60,000 वेटरनरी सिरिंज का ऑर्डर लखनऊ की एक एजेंसी को भेजा। लगभग एक महीने बाद जब सप्लाई अस्पताल पहुंची और स्टोर रूम में बॉक्स खोले गए, तब पता चला कि इन सिरिंज पर साफ लिखा था – “केवल पशु चिकित्सा उपयोग के लिए”।
यह देखकर अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया और मामले ने बड़ी लापरवाही उजागर कर दी।
तीन स्तर की निगरानी भी बेअसर
अस्पताल में दवाइयों और उपकरणों की मांग की प्रक्रिया आमतौर पर इस प्रकार होती है:
- फार्मासिस्ट मांग तैयार करता है
- फाइल जाती है एसएमओ (स्टोर) के पास
- अंतिम स्वीकृति देते हैं सीएमएस (मुख्य चिकित्सा अधीक्षक)
लेकिन इस मामले में तीनों स्तरों पर फाइल पास हुई, फिर भी किसी ने यह जांचने की जरूरत नहीं समझी कि सिरिंज इंसानों के लिए है या पशुओं के लिए।
क्या बोले अधिकारी
सीएमएस डॉ. अजय राणा ने कहा
गलती एजेंसी की है और उसे ब्लैकलिस्ट किया जाएगा। यदि स्टाफ की गलती होगी तो उसकी भी जांच कराई जाएगी।
हालांकि बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब ऑर्डर खुद अस्पताल की ओर से पोर्टल पर दर्ज किया गया, तो पूरी जिम्मेदारी केवल एजेंसी पर कैसे डाली जा सकती है।
सप्लाई रद्द, एजेंसी पर कार्रवाई की तैयारी
मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने, सप्लाई रद्द कर दी, संबंधित एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने की तैयारी शुरू की, आंतरिक जांच की बात कही जा रही है। सूत्रों का दावा है कि इस मामले को दबाने की कोशिश भी की जा रही है और अधिकारी खुलकर जवाब देने से बच रहे हैं।
पूरा घटनाक्रम एक नजर में
- 25 दिसंबर 2025 – GeM पोर्टल पर 60,000 वेटरनरी सिरिंज का ऑर्डर
- लगभग 1 माह बाद – अस्पताल में सप्लाई पहुंची
- बॉक्स खोलने पर खुलासा – सिरिंज पशुओं के उपयोग की निकली
- सप्लाई रद्द – एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने की तैयारी
- जांच की बात – जिम्मेदारी तय होने पर कार्रवाई का दावा
उठते सवाल
- तीन स्तर की जांच के बावजूद गलती कैसे हुई?
- क्या बिना पढ़े ही फाइलें पास हो रही हैं?
- मरीजों की सुरक्षा के साथ इतनी बड़ी लापरवाही क्यों?
- क्या जिम्मेदारी तय होगी या मामला दबा दिया जाएगा?
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