पूर्व में प्रकाशित खबर के बावजूद नहीं खुली पुलिस की नींद, अर्जुनपुरा में शाहिद का सट्टा आज भी जारी
राहुल शर्मा (क्राइम रिपोर्टर)
मथुरा। डीग गेट पुलिस चौकी क्षेत्र के अर्जुनपुरा में अवैध सट्टे का कारोबार रुकने का नाम नहीं ले रहा है। हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर सामाजिक और आपराधिक मुद्दे को लेकर पूर्व में खबर प्रकाशित होने के बावजूद पुलिस की नींद अब तक नहीं खुली है। सट्टा बंद कराने के तमाम दावों के बीच शाहिद नामक व्यक्ति खुलेआम इस अवैध धंधे को संचालित कर रहा है और कानून व्यवस्था को सीधी चुनौती दे रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि खबर सामने आने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि पुलिस सख्त कार्रवाई करेगी और सट्टे के इस अड्डे पर पूरी तरह से रोक लगेगी, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। हालात पहले जैसे ही बने हुए हैं। शाम ढलते ही अर्जुनपुरा की गलियों में सट्टे का खेल शुरू हो जाता है और पुलिस कहीं नजर नहीं आती।
इस सट्टे का सबसे बड़ा शिकार गरीब और मजदूर वर्ग हो रहा है। दिनभर मेहनत-मजदूरी करके दो जून की रोटी कमाने वाला मजदूर, शाम होते ही सट्टे के लालच में अपनी पूरी कमाई झोंक देता है। घर में बच्चे इस उम्मीद में बैठे रहते हैं कि पिता कुछ खाने-पीने का सामान लेकर आएंगे, लेकिन कई बार वह खाली हाथ, मायूस और शर्मिंदगी के साथ घर लौटता है। इससे न सिर्फ परिवार की आर्थिक हालत बिगड़ रही है, बल्कि सामाजिक ताना-बाना भी बिखरता जा रहा है।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि पुलिस को इस अवैध सट्टे की पूरी जानकारी है, इसके बावजूद कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े करता है। लोग यह पूछने को मजबूर हैं कि क्या पुलिस को सट्टा फिर से शुरू होने की भनक नहीं है, या फिर जानबूझकर आंखें मूंद ली गई हैं? चर्चा यह भी है कि कभी-कभार छोटे सट्टेबाजों या गुर्गों को पकड़कर औपचारिक कार्रवाई कर दी जाती है, लेकिन असली सरगना शाहिद हर बार कानून के शिकंजे से बच निकलता है।
यह मामला इसलिए भी ज्यादा गंभीर हो जाता है क्योंकि गोविंद नगर थाना क्षेत्र में पहले भी सट्टा और जुए के मामलों में पुलिसकर्मियों की मिलीभगत सामने आ चुकी है। पूर्व में सट्टेबाजों से संबंध पाए जाने पर थाना प्रभारी और सिपाही तक को निलंबित किया जा चुका है। इसके बावजूद उसी क्षेत्र में दोबारा सट्टे का फलना-फूलना पुलिस की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
अर्जुनपुरा के कई सामाजिक लोगों का कहना है कि सट्टा अब एक सामाजिक बीमारी का रूप ले चुका है। इसका असर केवल पैसे तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवारों में कलह, बच्चों की पढ़ाई पर असर और अपराध की ओर बढ़ते कदम जैसी समस्याएं भी सामने आ रही हैं। यदि समय रहते सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की गई, तो आने वाले समय में स्थिति और भयावह हो सकती है।
अब सवाल यह है कि क्या दूसरी बार खबर प्रकाशित होने के बाद पुलिस सच में जागेगी? क्या सट्टे के कथित सरगना शाहिद और उसके पूरे नेटवर्क पर ठोस कार्रवाई होगी, या फिर यह मामला भी फाइलों और बयानों तक ही सिमट कर रह जाएगा?
अर्जुनपुरा के लोग अब सिर्फ कार्रवाई नहीं, बल्कि स्थायी समाधान चाहते हैं। क्योंकि यह लड़ाई केवल सट्टे के खिलाफ नहीं, बल्कि गरीब मजदूरों की रोटी, उनके बच्चों के भविष्य और पुलिस की साख को बचाने की है।
What's Your Reaction?

