मथुरा में अवैध अस्पतालों का जाल? पंजीकरण पर सवाल, कार्रवाई पर चुप्पी और स्वास्थ्य विभाग की जांच पर उठे गंभीर प्रश्न
मथुरा। जहां देश-विदेश से लोग मोक्ष की कामना लेकर आते हैं। लेकिन सवाल अब आस्था का नहीं, व्यवस्था का है। क्योंकि शहर के कई निजी अस्पतालों को लेकर गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं।
यमुनापार स्थित राया रोड पर संचालित क्योर एंड केयर हॉस्पिटल, श्री बांके बिहारी हॉस्पीटल और सुरक्षा हॉस्पीटल पर बिना वैध पंजीकरण संचालन के आरोप लगे हैं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार इन अस्पतालों में कथित रूप से योग्य एमबीबीएस चिकित्सकों की अनुपस्थिति और झोलाछापों द्वारा इलाज किए जाने की शिकायतें हैं। कुछ मामलों में पूर्व में मरीजों की मृत्यु के बाद प्रशासनिक कार्रवाई और सीलिंग की बात भी सामने आई, लेकिन बाद में अस्पतालों के दोबारा संचालित होने के दावे किए जा रहे हैं।
इसी तरह गोवर्धन चौराहा स्थित ग्लोबल प्लस हॉस्पिटल को 28 जनवरी 2026 को सील किया गया था, जिसे 3 फरवरी को खोले जाने की जानकारी मिली। सील खोलने के कारणों को लेकर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अलग-अलग बयान सामने आए, जिससे स्थिति और स्पष्ट होने के बजाय सवाल बढ़े हैं।
वहीं, मथुरा न्यूरो सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल पर भी बिना वैध पंजीकरण संचालन, रिहायशी भूखंड पर व्यावसायिक गतिविधि और बेसमेंट में इमरजेंसी वार्ड संचालित करने जैसे आरोप लगाए गए हैं।
27 जनवरी 2026 को चौधरी हॉस्पिटल एंड ट्रॉमा सेंटर में एक महिला की मृत्यु का मामला भी चर्चा में रहा। इस प्रकरण में भी अस्पताल के पंजीकरण को लेकर सवाल उठे और स्वास्थ्य विभाग की ओर से “जांच चल रही है” का जवाब दिया गया।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राधा बल्लभ से जब बिना नवीनीकरण के संचालन पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि आवेदन लंबित होने की स्थिति में संचालन संभव हो सकता है। हालांकि स्पष्ट शासनादेश या लिखित आदेश सार्वजनिक रूप से साझा नहीं किया गया।
इन सभी मामलों ने जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की निगरानी, जवाबदेही और पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। यदि आरोप निराधार हैं तो विभाग को दस्तावेज़ सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। और यदि अनियमितताएं हैं तो सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी।
क्योंकि मामला केवल लाइसेंस का नहीं — मरीजों की जान और भरोसे का है।
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