रिसर्च अपनी अकादमिक सीमाओं से बाहर निकलकर समाज को ठोस समाधान दे : धर्मेंद्र प्रधान
देश में तकनीकी नवाचार और राष्ट्र निर्माण को नई दिशा देने के लिए आईआईटी मद्रास ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। इस पहल के तहत आईआईटी मद्रास ने नई दिल्ली में अपना पहला टेक्नोलॉजी शिखर सम्मेलन 2026 आयोजित किया है। यहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हेल्थ सर्विसेज टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, सस्टेनेबिलिटी और उभरते तकनीकी क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस टेक्नोलॉजी शिखर सम्मेलन का उद्घाटन किया। आईआईटी के मुताबिक यह शिखर सम्मेलन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत के भविष्य की तकनीकी रूपरेखा तैयार करने का एक गंभीर और व्यापक प्रयास है। इसमें सरकार, उद्योग जगत और शिक्षा जगत की भागीदारी है। शिखर सम्मेलन का मूल उद्देश्य भारत को ‘विकसित राष्ट्र’ बनाने के लिए प्रौद्योगिकी को केंद्रीय भूमिका में स्थापित करना है। ‘आईआईटीएम का योगदान, भारत के लिए सब मिलकर करें निर्माण’ थीम के साथ आयोजित इस कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि अब विकास की अगली छलांग केवल सामूहिक प्रयासों से ही संभव है।
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने यहां कहा कि आज अनुसंधान और नवाचार को अकादमिक सीमाओं से बाहर वास्तविक जीवन के समाधानों में बदलने की आवश्यकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अब समय आ गया है कि शोध केवल शोधपत्रों तक सीमित न रहकर उद्योग और समाज के लिए ठोस परिणाम दें। उन्होंने एक महत्वपूर्ण चिंता भी व्यक्त की और कहा, भारतीय प्रतिभा विश्व स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही है, लेकिन देश के भीतर उसी स्तर का नवाचार अभी पर्याप्त रूप से विकसित नहीं हो पाया है।
उन्होंने संकेत दिया कि भारतीयों द्वारा विकसित तकनीक अक्सर विदेशी बाजारों में परिपक्व होती है। बाद में भारतीय उद्योगों को उसी तकनीक को आयात करना पड़ता है। यह स्थिति देश के लिए चुनौती और अवसर भी है। इसी संदर्भ में उन्होंने बताया कि सरकार अनुसंधान एवं विकास को नई गति देने के लिए बड़े स्तर पर निवेश की योजना बना रही है। इसमें निजी क्षेत्र और स्टार्टअप्स को प्रमुख भूमिका दी जाएगी। प्रस्तावित बड़े कोष के माध्यम से नवाचार को प्रोत्साहित करने, अनुसंधान अवसंरचना को मजबूत करने और तकनीक को बाजार तक पहुंचाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
आईआईटी मद्रास ने इस शिखर सम्मेलन के दौरान अपने अनुसंधान और नवाचार की क्षमता का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। संस्थान द्वारा स्थापित 15 उत्कृष्टता केंद्र इस बात का प्रमाण हैं कि देश में उच्चस्तरीय अनुसंधान के लिए मजबूत आधार तैयार किया जा चुका है। पिछले कुछ वर्षों में संस्थान ने 240 से अधिक पेटेंट हासिल किए हैं और 40 से अधिक डीप-टेक स्टार्टअप्स को जन्म दिया है, जो भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बना रहे हैं।
संस्थान के निदेशक प्रो. वी. कामाकोटी ने इस अवसर पर कहा कि आईआईटी मद्रास अब केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने वाला अग्रणी संस्थान बन चुका है। उन्होंने उद्योग, कॉर्पोरेट जगत और नीति निर्माताओं से अपील की कि वे एक साथ मिलकर भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को साकार करें।
इस शिखर सम्मेलन की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि उद्योग जगत के साथ नई साझेदारियों की घोषणा रही। इन सहयोगों के माध्यम से नए अनुसंधान केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जिनका उद्देश्य अत्याधुनिक तकनीकों को व्यावहारिक समाधान में बदलना होगा। विशेष रूप से स्वास्थ्य सेवा प्रौद्योगिकी और सस्टेनेबल विकास के क्षेत्रों में इन पहलों का व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है।
सम्मेलन के दौरान शिक्षा में एआई को बढ़ावा देने के लिए ‘बोधन एआई’ नामक एक नए उत्कृष्टता केंद्र की भी घोषणा की गई। यह पहल शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल परिवर्तन को गति देने के उद्देश्य से शुरू की गई है। इसके तहत 2027 तक 10 लाख से अधिक शिक्षकों को एआई आधारित शिक्षण के लिए प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही एक डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा, जो शिक्षा प्रणाली को अधिक प्रभावी और सुलभ बनाएगा।
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