सुरों की मलिका आशा भोसले का 92 वर्ष की आयु में निधन, आठ दशकों तक संगीत जगत पर किया राज सबहेडिंग:

Apr 12, 2026 - 13:06

नई दिल्ली। भारतीय संगीत जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। सुरों की मलिका और दिग्गज पार्श्व गायिका आशा भोसले का 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया। आठ दशकों से भी लंबे करियर में आशा जी ने अपनी अनोखी आवाज, बहुमुखी प्रतिभा और हजारों यादगार गीतों के जरिए संगीत प्रेमियों के दिलों पर राज किया।

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आशा भोसले का जन्म 8 सितंबर 1933 को महाराष्ट्र के सांगली में हुआ था। वे महान शास्त्रीय गायक पंडित दीनानाथ मंगेशकर की बेटी थीं। महज 9 साल की उम्र में पिता के निधन के बाद उन्होंने अपनी बड़ी बहन लता मंगेशकर के साथ फिल्मों में गाना शुरू कर दिया।

साल 1943 में मराठी फिल्म ‘माझा बाल’ से उन्होंने अपना पहला गीत रिकॉर्ड किया, जबकि हिंदी सिनेमा में 1948 की फिल्म ‘चुनरिया’ के गीत ‘सावन आया’ से उन्हें पहचान मिली।

आशा भोसले को उनकी बहुमुखी प्रतिभा के लिए जाना जाता था। उन्होंने फिल्म संगीत, पॉप, शास्त्रीय, भजन, गजल, कव्वाली और रवींद्र संगीत जैसी कई शैलियों में अपनी खास पहचान बनाई। उन्होंने 20 से अधिक भाषाओं में 12 हजार से ज्यादा गाने रिकॉर्ड किए, जो अपने आप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।

संगीत के स्वर्णिम दौर में उन्होंने मोहम्मद रफी, किशोर कुमार और आर.डी. बर्मन जैसे दिग्गज कलाकारों के साथ मिलकर कई यादगार गीत दिए।

उनके योगदान को कई बड़े पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। साल 2000 में उन्हें दादासाहेब फाल्के पुरस्कार मिला, जबकि 2008 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया। फिल्म उमराव जान के गीत ‘दिल चीज क्या है’ और फिल्म इजाजत के गीत ‘मेरा कुछ सामान’ के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला।

उन्होंने ‘इन आंखों की मस्ती’ जैसी गजल से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया, वहीं ‘पिया तू अब तो आजा’ और ‘ये मेरा दिल’ जैसे गीतों से नई पीढ़ी को भी अपना दीवाना बनाया। 90 के दशक में भी उन्होंने ए.आर. रहमान के साथ फिल्म रंगीला के गीत ‘रंगीला रे’ और ‘तन्हा तन्हा’ से युवाओं के बीच लोकप्रियता बनाए रखी।

साल 2013 में फिल्म ‘माई’ में उन्होंने अभिनय भी किया, जिसे काफी सराहना मिली। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उनकी लोकप्रियता देखने को मिली। 1997 में ब्रिटिश बैंड कॉर्नरशॉप ने उन्हें समर्पित गीत ब्रिमफुल ऑफ आशा रिलीज किया, जो यूके चार्ट्स में टॉप पर रहा।

आशा भोसले भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी जादुई आवाज और अमर गीत हमेशा संगीत प्रेमियों के दिलों में जीवित रहेंगे।

सुरों की यह विरासत हमेशा याद रखी जाएगी।

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