इनाया हॉस्पिटल में गैर-एमबीबीएस कर रहा अल्ट्रासाउंड , डॉ. सुरभि सोनी के नाम से जारी हुई रिपोर्ट
द तहलका खबर के स्टिंग में सामने आया मामला, अस्पताल संचालक के मेडिकल पंजीकरण पर भी सवाल; विज्ञापन की पेशकश कर खबर रुकवाने का प्रयास
मथुरा/फरह। जनपद मथुरा के फरह स्थित इनाया हॉस्पिटल एंड ट्रोमा सेंटर में मरीजों की जांच और उपचार को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। द तहलका खबर के स्टिंग ऑपरेशन में कथित तौर पर एक गैर-एमबीबीएस व्यक्ति द्वारा अल्ट्रासाउंड किए जाने का मामला सामने आया है। हैरानी की बात यह है कि जांच किसी अन्य व्यक्ति ने की, जबकि रिपोर्ट डॉ. सुरभि सोनी, एमबीबीएस, एमएस (ओबीजी) के नाम से जारी हुई और उस पर उनके नाम से हस्ताक्षर भी अंकित थे।
सूत्रों के अनुसार, अस्पताल का अल्ट्रासाउंड केंद्र डॉ. सुरभि सोनी के नाम पर रजिस्टर्ड बताया जाता है। 26 अक्टूबर 2026 को शाम 4 बजकर 6 मिनट पर द तहलका खबर ने स्टिंग ऑपरेशन कराया, जिसमें एक अन्य व्यक्ति द्वारा अल्ट्रासाउंड किए जाने की रिकॉर्डिंग की गई। संबंधित व्यक्ति के पास आवश्यक चिकित्सकीय योग्यता नहीं होने का आरोप है।
डॉ. सुरभि सोनी की भूमिका पर गंभीर सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब अल्ट्रासाउंड डॉ. सुरभि सोनी ने नहीं किया, तो रिपोर्ट उनके नाम से कैसे जारी हुई? क्या उन्हें अपनी अनुपस्थिति में किसी अन्य व्यक्ति द्वारा जांच किए जाने की जानकारी थी? रिपोर्ट पर अंकित हस्ताक्षर किसने किए? क्या उनकी जानकारी के बिना उनके नाम का इस्तेमाल किया जा रहा था या यह सब उनकी जानकारी में हो रहा था?
26 अक्टूबर की शाम 6:14 बजे द तहलका खबर ने उनके पक्ष जानने के लिए उनके पति डॉ. मिशुल अग्रवाल से संपर्क किया। उन्होंने कुछ देर में बात कराने का दावा किया, लेकिन न तो संपर्क नंबर उपलब्ध कराया और न ही दोबारा फोन रिसीव किया।
संचालक बोले—अभी यात्रा कर रहा हूं, पंजीकरण नहीं हुआ
इसी दिन शाम करीब 7:50 बजे अस्पताल ऑपरेटर के रूप में अपना परिचय देने वाले गोविंद सिंह तरकर द तहलका खबर के कार्यालय पहुंचे। उन्होंने रूस से एंबुलेंस करने का दावा किया। मेडिकल काउंसिल का पंजीकरण नंबर आधारभूत पर बताया कि वह अभी इंटर्नशिप कर रहे हैं और उनका पंजीकरण नहीं हुआ है।
हैरानी की बात यह है कि संबंधित रोगियों का चिकित्सकीय परीक्षण करने और जांच लिखने का कार्य भी उनके द्वारा किए जाने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में सवाल है कि क्या उनके पास स्वतंत्र रूप से चिकित्सा अभ्यास करने के लिए आवश्यक वैध पंजीकरण है?
विज्ञापन की पेशकश, बोले—आज ही चांस पड़ गया
अस्पताल संचालक से जब किसी अन्य व्यक्ति द्वारा अल्ट्रासाउंड किए जाने पर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा, "ऐसा हमारे हॉस्पिटल में नहीं होता है, वो तो आज ही चांस पड़ गया है।"
बातचीत के दौरान उन्होंने विज्ञापन देने की भी पेशकश की और खबर प्रकाशित नहीं करने का अनुरोध किया। हालांकि, द तहलका खबर ने स्पष्ट किया कि मामला विज्ञापन का नहीं, बल्कि नौकरियों की सुरक्षा और चिकित्सकीय जांच की वैधानिकता का है।
पीसी-पीएनडीटी एक्ट के तहत कार्रवाई हो सकती है
पीसी-पीएनडीटी अधिनियम, 1994 के तहत अल्ट्रासाउंड मूल्यांकन के पंजीकरण और जांच करने वाले व्यक्तियों की पात्रता के नियम निर्धारित हैं। अधिनियम की धारा 20 में पंजीकरण निलंबित अथवा निपटाने और धारा 23 में अपराध सिद्ध होने पर दंड का प्रावधान है। वहीं, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम, 2019 की धारा 34 चिकित्सा अभ्यास के लिए पंजीकरण से संबंधित है।
इस मामले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के पीसी-पीएनडीटी पटल से जुड़े डॉ. विकास जैन ने कहा, "यदि कोई इस तरीके का मामला है तो आप अवगत कराएंगे, केंद्र सीलिंग की कार्रवाई की जाती है।"
अब सवाल यह है कि क्या स्वास्थ्य विभाग डॉ. सुरभि सोनी के नाम से जारी रिपोर्ट, उस पर अंकित हस्ताक्षरों, अल्ट्रासाउंड करने वाले व्यक्ति की योग्यता और अस्पताल संचालक के मेडिकल पंजीकरण की जांच कराएगा?
आखिर नौकरियों की जिंदगी से जुड़े ऐसे गंभीर सवालों पर स्वास्थ्य विभाग कब और क्या कार्रवाई करेगा?
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