सेमीकंडक्टर फैब्स के लिए कुशल मैनपावर तैयार करना सबसे बड़ी जरूरत, 5 साल में भारत के इकोसिस्टम ने पकड़ी तेज रफ्तार: विशेषज्ञ

Sep 18, 2026 - 03:58
सेमीकंडक्टर फैब्स के लिए कुशल मैनपावर तैयार करना सबसे बड़ी जरूरत, 5 साल में भारत के इकोसिस्टम ने पकड़ी तेज रफ्तार: विशेषज्ञ

'सेमीकॉन इंडिया 2026' के दौरान गुरुवार को विशेषज्ञों ने कहा कि भारत का सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम पिछले कुछ वर्षों में तेजी से विकसित हुआ है और अब सबसे बड़ा फोकस उद्योग की जरूरतों के अनुरूप कुशल मानव संसाधन तैयार करने पर होना चाहिए। गति शक्ति विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मनोज चौधरी और फुजीफिल्म इंडिया के अभि शेखर सिंह ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में भारत की प्रगति, कौशल विकास और उद्योग में बढ़ती भागीदारी पर अपने विचार साझा किए।

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कार्यक्रम के दौरान, गति शक्ति विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मनोज चौधरी ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि यदि पांच वर्ष पहले की स्थिति को देखें तो भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण लगभग नगण्य था। उन्होंने कहा कि भारत सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) 1.0 के तहत 76,000 करोड़ रुपए के प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा के बाद 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाएं शुरू की गईं और पिछले 5 वर्षों में इन परियोजनाओं पर तेजी से काम हुआ है।

उन्होंने कहा कि यही बदलाव आज भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर मानचित्र पर एक उभरती हुई ताकत के रूप में स्थापित कर रहा है।

प्रो. चौधरी ने आगे कहा कि सेमीकंडक्टर्स केवल चिप डिजाइन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आधुनिक उद्योगों और परिवहन प्रणालियों का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि वंदे भारत जैसी आधुनिक ट्रेनों में ऑटोमैटिक डोर क्लोजर से लेकर विभिन्न सेंसर प्रणालियों तक लगभग सभी महत्वपूर्ण तकनीकें सेमीकंडक्टर्स और इलेक्ट्रॉनिक्स पर आधारित हैं। इसी जरूरत को देखते हुए विश्वविद्यालय टाटा समूह के साथ मिलकर सेमीकंडक्टर फैब कंस्ट्रक्शन मैनेजमेंट जैसे विशेष तकनीकी पाठ्यक्रम शुरू करने पर काम कर रहा है, ताकि देश में स्थापित होने वाली नई फैब इकाइयों के लिए आवश्यक कुशल मानव संसाधन तैयार किया जा सके।

प्रो. मनोज चौधरी ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और छात्रों के बीच हुआ संवाद बेहद महत्वपूर्ण था। उन्होंने बताया कि भारत दुनिया का एकमात्र ऐसा देश बन गया है जहां लगभग 400 विश्वविद्यालयों के छात्रों को 'चिप्स टू स्टार्टअप' कार्यक्रम के तहत कैडेंस, सिनॉप्सिस और सीमेंस जैसे विश्वस्तरीय इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन (ईडीए) टूल्स तक निःशुल्क पहुंच उपलब्ध कराई गई है।

उन्होंने बताया कि चिपइन सेंटर के माध्यम से छात्रों को अत्याधुनिक तकनीकों से जोड़ने की यह पहल भविष्य के सेमीकंडक्टर डिजाइनरों और इंजीनियरों को तैयार करने में अहम भूमिका निभाएगी।

फुजीफिल्म इंडिया के इलेक्ट्रॉनिक मैटेरियल्स डिवीजन के राष्ट्रीय प्रमुख (रणनीति एवं व्यवसाय विकास) अभि शेखर सिंह ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि भारत ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अपनी यात्रा शुरू कर दी है, लेकिन अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।

उन्होंने कहा कि सबसे सकारात्मक बात यह है कि उद्योग जगत, तकनीकी कंपनियां और विभिन्न संस्थान एक साथ आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि सेमीकॉन इंडिया का स्तर हर वर्ष लगातार बढ़ रहा है और इस वर्ष भी इसमें उल्लेखनीय विस्तार देखने को मिला है।

अभि शेखर सिंह ने आगे कहा कि उनकी कंपनी पिछले तीन वर्षों से इस आयोजन में भाग ले रही है और हर साल इसकी व्यापकता और प्रभाव बढ़ता दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि उनकी कंपनी भी अपनी भागीदारी और गतिविधियों का विस्तार लगातार कर रही है।

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