13 दिन से मौत को दावत देता जर्जर बिजली पोल! गगन की शिकायतों के बाद भी नहीं जागा विभाग, SE बोले- "बदलवा देते हैं", फिर कार्रवाई क्यों नहीं?

Jun 19, 2026 - 13:10
13 दिन से मौत को दावत देता जर्जर बिजली पोल! गगन की शिकायतों के बाद भी नहीं जागा विभाग, SE बोले- "बदलवा देते हैं", फिर कार्रवाई क्यों नहीं?

मथुरा। औरंगाबाद क्षेत्र स्थित विष्णु धाम कॉलोनी के सामने, भगवान नगर, खिलनानी रोड पर एक जर्जर बिजली पोल पिछले 13 दिनों से लोगों की जान के लिए खतरा बना हुआ है। नीचे से पूरी तरह गल चुका यह लोहे का पोल टूटकर लगभग 45 डिग्री के कोण पर झूल रहा है और पेड़ की शाखाओं तथा तारों के सहारे किसी तरह खड़ा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यह पोल पूरी तरह गिर गया तो पास से गुजर रही 11 केवी हाईटेंशन लाइन इसकी चपेट में आ सकती है, जिससे बड़ा हादसा हो सकता है।

इस पूरे मामले को उजागर करने और लगातार विभागीय अधिकारियों को अवगत कराने का काम गगन ने किया। गगन स्वयं मथुरा में नहीं रहते, बल्कि नोएडा में नौकरी करते हैं। इसके बावजूद संभावित जनहानि को देखते हुए उन्होंने जिम्मेदार नागरिक होने का परिचय दिया और लगातार विभागीय अधिकारियों को इस गंभीर खतरे के बारे में चेतावनी दी।

6 जून को भेजी थीं तस्वीरें, 13 दिन बाद भी नहीं हुई कार्रवाई

गगन ने 6 जून 2026 को अधीक्षण अभियंता (SE) मुदित तिवारी, अधिशासी अभियंता (XEN) और संबंधित एसडीओ को पोल की जर्जर स्थिति की तस्वीरें और वीडियो भेजकर तत्काल कार्रवाई की मांग की थी। व्हाट्सएप संदेशों में स्पष्ट रूप से दिखाया गया था कि पोल नीचे से पूरी तरह सड़ चुका है और कभी भी गिर सकता है।

इसके बावजूद 13 दिन बीत जाने के बाद भी विभाग की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

IGRS और DVVNL में दर्ज हैं शिकायतें

गगन द्वारा इस गंभीर मामले में कई स्तरों पर शिकायतें दर्ज कराई गईं—

  • IGRS शिकायत संख्या : 40014526019129
    (पंजीकरण तिथि : 02 जून 2026)
  • DVVNL शिकायत संख्या : DV11062612728
  • DVVNL शिकायत संख्या : DV12062603165

इन शिकायतों के बावजूद मौके पर कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया, जिससे विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

SDO ने कहा- "एस्टीमेट बनेगा तब बदलेगा पोल"

सूत्रों के अनुसार जब गगन ने विभागीय अधिकारियों से कार्रवाई में देरी का कारण पूछा तो संबंधित एसडीओ द्वारा कहा गया कि पहले एस्टीमेट तैयार होगा, फिर उसकी स्वीकृति मिलेगी, उसके बाद ही पोल बदला जा सकेगा।

हालांकि विद्युत विभाग के नियमों और जानकारों के अनुसार यदि कोई पोल सार्वजनिक सुरक्षा के लिए तत्काल खतरा बन चुका हो तो उसे बदलने के लिए लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया की प्रतीक्षा करना आवश्यक नहीं होता। ऐसी परिस्थितियों में तत्काल कार्रवाई की जा सकती है।

'द तहलका खबर' ने SE मुदित तिवारी से पूछा सवाल

जब इस मामले में द तहलका खबर ने अधीक्षण अभियंता मुदित तिवारी से फोन पर बातचीत की तो उन्होंने कहा—

"मैं पोल बदलवा देता हूं।"

जब उनसे पूछा गया कि क्या ऐसे खतरनाक पोल को बदलने के लिए एस्टीमेट की आवश्यकता होती है, जैसा कि एसडीओ द्वारा बताया गया है, तो उन्होंने स्पष्ट कहा—

"ऐसा नहीं है, मैं इसे बदलवा देता हूं।"

अब सवाल यह है कि यदि एस्टीमेट की आवश्यकता नहीं थी तो फिर एसडीओ द्वारा ऐसा क्यों कहा गया? और जब खतरे की जानकारी 6 जून को ही मिल चुकी थी तो 13 दिनों तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

33KV लाइन भूमिगत, फिर क्यों लटका है यह खतरनाक ढांचा?

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस क्षेत्र की 33 केवी लाइन पहले ही अंडरग्राउंड की जा चुकी है और पोल पर मौजूद लाइन अब उपयोग में नहीं है। इसके बावजूद जर्जर पोल और पुराना ढांचा हटाया नहीं गया। लोगों का आरोप है कि विभाग की यही लापरवाही आज एक बड़े खतरे का रूप ले चुकी है।

क्या किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है विभाग?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि

  • 2 जून को IGRS शिकायत हुई।
  • 6 जून को गगन ने फोटो और वीडियो भेजे।
  • DVVNL में शिकायतें दर्ज हुईं।
  • SE, XEN और SDO सभी को जानकारी दी गई।
  • मीडिया द्वारा भी मामला उठाया गया।

इसके बावजूद यदि कार्रवाई नहीं होती तो क्या विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?

यदि भविष्य में इस पोल के गिरने से कोई जनहानि या संपत्ति का नुकसान होता है तो जिम्मेदारी किसकी होगी? 

अब देखना होगा कि यह पोल कब तक बदलवाया जाता है। 

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