“90 दिन पहले लिया गया था खामेनेई को खत्म करने का फैसला”: इजरायल के रक्षा मंत्री का बड़ा खुलासा, पश्चिम एशिया में भड़का युद्ध
गोपनीय बैठक में तय हुआ था मिशन, अमेरिका के साथ मिलकर 28 फरवरी को शुरू हुआ हमला; पूरे क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात
पश्चिम एशिया में तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। Ayatollah Ali Khamenei की मौत को लेकर अब एक बड़ा खुलासा सामने आया है। इजरायल के रक्षा मंत्री Israel Katz ने 5 मार्च 2026 को एक टेलीविजन इंटरव्यू में दावा किया कि इजरायल ने पिछले साल नवंबर में ही ईरान के सर्वोच्च नेता को खत्म करने का फैसला कर लिया था। यह निर्णय प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu के साथ हुई एक बेहद गोपनीय और सीमित बैठक में लिया गया था।
काट्ज के अनुसार उस समय योजना थी कि यह अभियान वर्ष 2026 के मध्य में शुरू किया जाएगा, लेकिन हालात तेजी से बदलते गए और योजना को पहले ही लागू करना पड़ा। अंततः United States और Israel ने मिलकर 28 फरवरी 2026 को ईरान पर बड़ा हवाई अभियान शुरू किया। बताया जा रहा है कि हमले के शुरुआती घंटों में ही खामेनेई की मौत हो गई। इसे दुनिया के इतिहास में पहली बार किसी देश के सर्वोच्च नेता को हवाई हमले में मार गिराने की घटना बताया जा रहा है।
नवंबर 2025 की गुप्त बैठक में बना था पूरा प्लान
रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने बताया कि नवंबर 2025 में प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने बेहद सीमित लोगों के साथ एक गोपनीय बैठक बुलाई थी। इस बैठक में साफ कहा गया कि ईरान के सर्वोच्च नेता को खत्म करना इजरायल का रणनीतिक लक्ष्य होगा।
इजरायल का मानना है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता देश के लिए अस्तित्व का खतरा बन चुकी है। इजरायल लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि ईरान ऐसे हथियार विकसित कर रहा है जो उसके अस्तित्व को मिटा सकते हैं। इसी खतरे को समाप्त करने के लिए यह कठोर निर्णय लिया गया।
जनवरी 2026 में बदली रणनीति
काट्ज के अनुसार दिसंबर के बाद जनवरी 2026 में ईरान में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे। सरकार के खिलाफ जनता के सड़कों पर उतरने से हालात तेजी से बदलने लगे। इजरायल को आशंका थी कि दबाव में आई ईरानी सरकार अचानक इजरायल या अमेरिकी ठिकानों पर हमला कर सकती है।
इसी खतरे को देखते हुए योजना को तेज किया गया और पूरे ऑपरेशन की जानकारी अमेरिका को दी गई। इसके बाद दोनों देशों ने मिलकर सैन्य कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी।
28 फरवरी को शुरू हुआ संयुक्त हमला
28 फरवरी 2026 को शनिवार के दिन अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के कई ठिकानों पर बड़ा हवाई हमला शुरू किया। रिपोर्ट के मुताबिक शुरुआती घंटों में ही खामेनेई को उनके आवास और कार्यालय के आसपास किए गए सटीक हमले में मार दिया गया। इस हमले में ईरान के कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी भी मारे गए।
पूरे क्षेत्र में फैल गई युद्ध की आग
इस संयुक्त सैन्य अभियान को अब एक सप्ताह से अधिक समय हो चुका है। शुरुआती हमलों में ईरान के कई शीर्ष सैन्य नेताओं की मौत के बाद वहां की सत्ता व्यवस्था भी हिल गई है।
जवाब में ईरान ने इजरायल पर मिसाइल हमले किए हैं और इराक तथा खाड़ी क्षेत्र में भी तनाव बढ़ गया है। इसके साथ ही इजरायल ने लेबनान में ईरान समर्थित संगठन Hezbollah के ठिकानों पर भी हमले तेज कर दिए हैं। पूरे पश्चिम एशिया में युद्ध जैसे हालात बन गए हैं।
इजरायल के असली लक्ष्य क्या हैं
इजरायल ने स्पष्ट किया है कि उसका मुख्य उद्देश्य ईरान के परमाणु हथियार कार्यक्रम और बैलिस्टिक मिसाइल परियोजना को पूरी तरह खत्म करना है। इजरायल का कहना है कि जब तक यह खतरा समाप्त नहीं हो जाता, अभियान जारी रहेगा।
इसके अलावा इजरायल चाहता है कि ईरान में मौजूदा शासन व्यवस्था समाप्त हो और वहां ऐसी सरकार बने जो क्षेत्र में शांति और स्थिरता का समर्थन करे।
आगे क्या हो सकता है
ईरान की सरकार ने अभी तक किसी भी तरह के समझौते या सत्ता परिवर्तन के संकेत नहीं दिए हैं। उल्टे ईरान ने अमेरिका और इजरायल पर जवाबी हमले तेज कर दिए हैं, जिससे तेल आपूर्ति और वैश्विक बाजार पर भी असर पड़ने लगा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि दशकों से चली आ रही इजरायल–ईरान दुश्मनी अब अपने सबसे खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है और अगर हालात नहीं संभले तो यह संघर्ष पूरे पश्चिम एशिया को बड़े युद्ध की ओर धकेल सकता है।
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