ग्रेटर नोएडा में खुलेगा वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी का कैंपस, भारत-ऑस्ट्रेलिया शिक्षा साझेदारी को मिला नया आयाम

Aug 31, 2026 - 13:30
ग्रेटर नोएडा में खुलेगा वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी का कैंपस, भारत-ऑस्ट्रेलिया शिक्षा साझेदारी को मिला नया आयाम

ग्रेटर नोएडा। उत्तर प्रदेश में पहली बार किसी विदेशी विश्वविद्यालय का कैंपस ग्रेटर नोएडा में खुलने जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया की वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी ने ग्रेटर नोएडा में अपने प्रस्तावित कैंपस की औपचारिक घोषणा कर दी है। इस कैंपस को ‘जलसेतु’ नाम दिया गया है। यहां छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा, शोध और कौशल विकास के अवसर उपलब्ध होंगे, जिसके लिए उन्हें विदेश जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

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सोमवार को दिल्ली स्थित नेशनल एग्रीकल्चर साइंस कॉम्प्लेक्स में आयोजित कार्यक्रम में ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स के प्रीमियर क्रिस मिन्स ने उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय की मौजूदगी में ग्रेटर नोएडा कैंपस की घोषणा की। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार अवनीश अवस्थी, अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के एसीईओ सौम्य श्रीवास्तव और एसीईओ प्रेरणा सिंह समेत ऑस्ट्रेलिया और वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

दिसंबर में शुरू हो सकता है कैंपस

वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी का कैंपस ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण कार्यालय परिसर के टावर-2 में स्थापित किया जा रहा है। विश्वविद्यालय ने इसके लिए तीन फ्लोर लिए हैं। कैंपस को इसी साल दिसंबर में शुरू करने की तैयारी है। इसके शुरू होने से ग्रेटर नोएडा में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय संस्थानों की मौजूदगी बढ़ने के साथ ही छात्रों को वैश्विक स्तर के शैक्षणिक और व्यावसायिक अवसर मिलने की उम्मीद है।

विश्वविद्यालय का फोकस उद्योगों की जरूरत के अनुरूप युवाओं को तैयार करने, कौशल विकास को बढ़ावा देने और रोजगार के अवसर पैदा करने पर रहेगा। इसके अलावा भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच शिक्षा, शोध, इनोवेशन और औद्योगिक सहयोग को मजबूत करने पर भी जोर दिया जाएगा।

महिला सशक्तीकरण और इनोवेशन पर भी फोकस

कैंपस की घोषणा के साथ ही विश्वविद्यालय ने भारत में अपनी साझेदारी को और विस्तार देने की बात कही है। महिला सशक्तीकरण, बिजनेस, डेटा, इनोवेशन और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए स्कॉलरशिप प्रोग्राम भी शुरू करने की घोषणा की गई है। इसका उद्देश्य भारतीय युवाओं को विश्वस्तरीय शिक्षा और शोध के साथ-साथ कौशल विकास के अवसर उपलब्ध कराना है।

वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी के कुलपति एवं अध्यक्ष विशिष्ट प्रोफेसर जॉर्ज विलियम्स एओ ने कहा कि भारत के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है। विश्वविद्यालय युवाओं को ऐसे अवसर उपलब्ध कराना चाहता है, जिनसे वे भारत के सामाजिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकें।

न्यू साउथ वेल्स के प्रीमियर क्रिस मिन्स ने कहा कि ग्रेटर नोएडा में स्थापित होने वाला कैंपस भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु का काम करेगा। इससे भारतीय छात्रों को वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी की विश्वस्तरीय शिक्षा तक आसान पहुंच मिलेगी।

जल सुरक्षा के लिए बनेगा ‘जलसेतु सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’

ग्रेटर नोएडा कैंपस को ‘जलसेतु सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में विकसित करने की भी घोषणा की गई है। यह केंद्र उत्तर प्रदेश में जल सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों के समाधान के लिए शोध संस्थानों, सरकार, उद्योग और स्थानीय समुदायों को एक साझा मंच पर लाने का काम करेगा।

केंद्र में भूजल की स्थिरता, नदियों के स्वास्थ्य, सतत सिंचाई और शहरी जल प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर शोध और इनोवेशन को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके जरिए जल से जुड़ी समस्याओं के व्यावहारिक समाधान विकसित करने पर जोर रहेगा।

विश्वविद्यालय ने कैंपस की शुरुआत के साथ ही सस्टेनेबल वाटर मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री प्रोग्राम शुरू करने की भी घोषणा की है। इस कार्यक्रम के माध्यम से छात्रों को शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं, सरकारी संस्थानों, बैंकों और उद्योग जगत के विशेषज्ञों के साथ काम करने का अवसर मिलेगा।

50 हजार से अधिक छात्र कर रहे पढ़ाई

वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी में वर्तमान में करीब 50 हजार छात्र-छात्राएं नियमित शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। विश्वविद्यालय को टाइम्स हायर एजुकेशन यूनिवर्सिटी इम्पैक्ट रैंकिंग में विश्व स्तर पर तीसरा स्थान प्राप्त है। ग्रेटर नोएडा में इसके कैंपस की स्थापना को भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच शिक्षा और शोध सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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