जेल जाते हैं गुर्गे, बच निकलता है सरगना! अर्जुनपुरा में शाहिद का सट्टा साम्राज्य
मथुरा। थाना गोविंद नगर क्षेत्र के अंतर्गत डीग गेट पुलिस चौकी के अर्जुनपुरा इलाके में बेखौफ चल रहा सट्टे का अवैध कारोबार न सिर्फ कानून को चुनौती दे रहा है, बल्कि पुलिस की साख पर भी सीधा बट्टा लगा रहा है। आरोप है कि शाहिद नाम का व्यक्ति खुलेआम सट्टे का धंधा चला रहा है, जहां हर शाम मेहनतकश और गरीब तबके के लोग अपनी दिनभर की कमाई किस्मत के जुए में झोंक देते हैं।
शाम ढलते ही अर्जुनपुरा की गलियों में सट्टे का अड्डा गुलजार हो जाता है। जिन घरों में बच्चों की आंखें पिता के हाथ में खाने की उम्मीद लगाए दरवाजे की ओर टिकी रहती हैं, वहीं कई पिता अपनी पूरी मेहनत शाहिद के सट्टे में हारकर खाली हाथ घर लौटते हैं। न रोटी बचती है, न सम्मान—बस बचती है तो परिवार की मजबूरी और बच्चों की बुझती उम्मीदें।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि गोविंद नगर थाना क्षेत्र में पहले भी सट्टा और जुए के मामलों में पुलिस की मिलीभगत सामने आ चुकी है। जुलाई 2018 में तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बबलू कुमार ने सट्टेबाजों से सांठगांठ के आरोप में गोविंद नगर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर सुभाष चंद्र पाण्डेय और सिपाही सतेंद्र को निलंबित कर दिया था। जांच में दोनों के मोबाइल संपर्कों के जरिए सट्टेबाजों से गठजोड़ की पुष्टि हुई थी। इसके बाद थाना प्रभारी को हटाकर सुरीर कोतवाली प्रभारी निरीक्षक बैजनाथ सिंह को गोविंद नगर की जिम्मेदारी सौंपी गई।
इसके बावजूद सवाल जस का तस खड़ा है यदि पहले पुलिसकर्मी निलंबित हो चुके हैं, तो फिर अर्जुनपुरा में सट्टा दोबारा कैसे फल-फूल रहा है? क्या पुलिस को यह जानकारी नहीं है कि सट्टे का खेल फिर से शुरू हो चुका है, या फिर जानबूझकर आंखें मूंदी जा रही हैं?
इस पूरे प्रकरण में जब थाना प्रभारी गोविंद नगर राजकमल सिंह से दूरभाष के माध्यम से वार्ता की गयी तो उन्होंने बताया कि अभी उसको कुछ दिन पहले ही जेल भेजा था, और भी कई लोग जेल भेज चुके हैं, जमानत पर बाहर आ जाते हैं, और फिर प्रयास करते हैं, अभी 10 से 15 दिन पहले ही जेल भेजा था, आप बता रहे हैं तो तस्दीक करेंगे, फिर से कार्रवाई कर जेल भेजेंगे।
लेकिन सूत्र कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, अर्जुनपुरा में सट्टे का असली सरगना शाहिद है, जो खुद कभी जेल नहीं गया। कार्रवाई के नाम पर सिर्फ उसके गुर्गे पकड़े जाते हैं और जेल की हवा खाकर बाहर आ जाते हैं, जबकि सरगना हर बार कानून के शिकंजे से बच निकलता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस बार पुलिस की कार्रवाई सिर्फ छोटे मोहरों तक सीमित रहेगी, या फिर सट्टे के इस कथित सरगना शाहिद पर भी कानून का शिकंजा कसेगा? क्या डीग गेट चौकी की नाक के नीचे चल रहे इस अवैध धंधे पर सच में लगाम लगेगी, या फिर गरीबों की रोटी और बच्चों की उम्मीदें यूं ही सट्टे की भेंट चढ़ती रहेंगी?
जवाब पुलिस की अगली कार्रवाई देगी या उसकी खामोशी।
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