बांग्लादेश में हिंदुओं पर बढ़ते हमले, भारत की चुप्पी पर विपक्ष का सवाल
नई दिल्ली। पड़ोसी देश बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों को लगातार निशाना बनाए जाने की घटनाओं ने भारत में सियासी और मानवीय चिंता को और गहरा कर दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत तथा कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने वहां हो रही हिंसा की कड़ी निंदा करते हुए केंद्र सरकार से तत्काल और प्रभावी कूटनीतिक हस्तक्षेप की मांग की है।
अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि बांग्लादेश में दोबारा भड़की हिंसा और हिंदू अल्पसंख्यकों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं अत्यंत चिंताजनक और निंदनीय हैं। उन्होंने कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि भारत सरकार इस संवेदनशील मुद्दे पर लंबे समय से मूकदर्शक बनी हुई है। गहलोत के अनुसार, केंद्र की चुप्पी भारत विरोधी बाहरी ताकतों को बढ़ावा दे रही है, जो क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर खतरा है।
उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह ‘वेट एंड वॉच’ की नीति छोड़कर अविलंब कूटनीतिक स्तर पर हस्तक्षेप करे, ताकि बांग्लादेश में रहने वाले अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
इस बीच कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने बांग्लादेश में एक हिंदू युवक की भीड़ द्वारा की गई बर्बरतापूर्ण हत्या पर गहरा शोक और चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि धर्म, जाति या पहचान के आधार पर हिंसा किसी भी सभ्य समाज के लिए कलंक है और यह मानवता के खिलाफ अपराध है।
बांग्लादेशी समाचार पोर्टल ‘बांग्ला ट्रिब्यून’ के अनुसार, मृतक की पहचान दीपू चंद्र दास (25) के रूप में हुई है, जो मैमनसिंह शहर में एक कारखाने में कार्यरत थे। आरोप है कि ईशनिंदा के आरोप में उनकी पीट-पीटकर हत्या कर दी गई और बाद में शव को आग के हवाले कर दिया गया। यह घटना बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा की नवीनतम कड़ी मानी जा रही है।
प्रियंका गांधी ने कहा कि भारत सरकार को बांग्लादेश में हिंदू, ईसाई और बौद्ध अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा का संज्ञान लेना चाहिए और इस मुद्दे को बांग्लादेशी सरकार के समक्ष मजबूती से उठाना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि बांग्लादेश में पिछले वर्ष जुलाई में हुए विद्रोह के एक प्रमुख नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद देश के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन और हिंसा भड़क उठी थी, जिसके बाद से हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। अल्पसंख्यक समुदायों पर हमलों की घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का भी ध्यान आकर्षित किया है।
बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा अब केवल एक आंतरिक मुद्दा नहीं, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता, मानवाधिकार और भारत की पड़ोसी नीति से जुड़ा गंभीर प्रश्न बन चुकी है।
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