निलंबित शिक्षकों के मामलों पर बीएसए रतन कीर्ति से बातचीत

Jan 6, 2026 - 11:23
Jan 6, 2026 - 11:26

ब्यूरो।

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मथुरा। जनपद मथुरा में बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत वर्षों से निलंबित शिक्षकों के मामलों को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। समान आरोपों के बावजूद कुछ शिक्षकों की बहाली हो जाना और कुछ का वर्षों तक निलंबन में बने रहना विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करता है।

एक ही आदेश, लेकिन अलग-अलग कार्रवाई

निलंबन आदेश पत्रांक 208-15/2025-26 के तहत तीन कर्मचारियों को निलंबित किया गया था। इनमें से प्रधानाध्यापक और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को बहाल कर दिया गया, जबकि श्री उमेश कुमार चतुर्वेदी अब तक निलंबित हैं, जबकि तीनों पर आरोप समान बताए गए थे। यह स्थिति नियमों की समानता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े करती है।

तीन माह में बहाली का नियम, फिर देरी क्यों?

महानिदेशक स्कूल शिक्षा, लखनऊ के पत्रांक 10769/2022-23 दिनांक 31 जनवरी 2023 के अनुसार यदि तीन माह के भीतर विभागीय कार्यवाही पूरी नहीं होती है तो बहाली अनिवार्य होती है। इसके बावजूद कई शिक्षक 6 माह, 1 वर्ष, 2-3 वर्षों से निलंबन में हैं। 

निलंबन अवधि में बिना काम लिए 75 प्रतिशत जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाना भी सरकारी धन के दुरुपयोग का मुद्दा बनता जा रहा है।

बीएसए रतन कीर्ति से ऑन-कैमरा सवाल

02 नवंबर 2025 को अमर उजाला में प्रकाशित खबर में बीएसए द्वारा कहा गया था कि एक साल से अधिक समय से निलंबित शिक्षकों की फाइलें तलब की गई हैं और समीक्षा की जा रही है। क्या इस पर कोई एक्शन हुआ ?

बीएसए : “मैं इस प्रकरण में स्टेप-बाइ-स्टेप चल रही हूं। जैसे-जैसे रिपोर्ट आती जाती है, शिक्षक बहाल होते जाते हैं। नवंबर-दिसंबर में हम एसआईआर में व्यस्त रहे, लेकिन कुछ शिक्षकों को बहाल किया जा चुका है।”

उमेश चतुर्वेदी पर क्या कहा?

उमेश चतुर्वेदी के मामले में बीएसए ने कहा कि

“इनकी बहाली की प्रक्रिया भी जल्द ही कर दी जाएगी।”

हालांकि जब महानिदेशक स्कूल शिक्षा के तीन माह वाले आदेश का हवाला दिया गया तो उन्होंने कहा कि 

बीएसए : “यह प्रकरण मेरे संज्ञान में नहीं है, मैं देख लेती हूं कि कौन-कौन से शिक्षक अभी बहाल नहीं हैं।”

प्रिया तिवारी प्रकरण पर एक हफ्ते की मोहलत

श्रीमती प्रिया तिवारी, जिन्हें 29 मार्च 2025 को निलंबित किया गया था और जिनके मामले में 9 महीने से अधिक समय बीत चुका है, उस पर बीएसए ने कहा—

बीएसए : “यह प्रकरण मेरे संज्ञान में है। जांच अधिकारियों को एक हफ्ते के भीतर रिपोर्ट देने को कहा गया है। रिपोर्ट आते ही बहाली कर दी जाएगी।”

हेमन्त कुमार का मामला

फरवरी 2022 से निलंबित हेमन्त कुमार के मामले में बीएसए ने स्पष्ट किया—

बीएसए : “मैं 19 सितंबर को यहां आई हूं। उससे पहले 2022-23 में क्या हुआ, उसके लिए मैं जिम्मेदार नहीं हूं। मेरे कार्यकाल में जो प्रकरण सामने आएंगे, उन पर कार्रवाई की जाएगी।”

50% और 75% भत्ते पर क्या कहा

महिला शिक्षिकाओं प्रिया तिवारी और भावना गुप्ता को 6 माह से अधिक निलंबन के बावजूद केवल 50% जीवन निर्वाह भत्ता दिए जाने और पुरुष शिक्षकों को 75% भत्ता दिए जाने के सवाल पर बीएसए ने कहा—

बीएसए : “यह प्रकरण मेरे संज्ञान में नहीं है।”

फिलहाल बीएसए ने कार्रवाई का भरोसा जरूर दिलाया है, लेकिन ज़मीनी हकीकत यही है कि कई शिक्षक अब भी निर्णय की प्रतीक्षा में हैं। अब देखना यह है कि दिए गए आश्वासन कब तक कागजों से निकलकर अमल में आते हैं।

 

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