मस्तक पर चंद्रमा, त्रिपुंड और त्रिनेत्र से सुशोभित बाबा महाकाल, दर्शन को उमड़े श्रद्धालु

Jun 5, 2026 - 03:55
मस्तक पर चंद्रमा, त्रिपुंड और त्रिनेत्र से सुशोभित बाबा महाकाल, दर्शन को उमड़े श्रद्धालु

ज्येष्ठ अधिकमास कृष्ण पक्ष की पंचमी पर शुक्रवार सुबह बाबा महाकाल मंदिर में भस्म आरती की गई। बाबा महाकाल के पट भोर चार बजे खोले गए। दिव्य शृंगार और भस्म आरती के बाद जैसे ही श्रद्धालुओं को त्रिपुंड, त्रिनेत्र और मस्तक पर चंद्रमा से सुशोभित महाकाल के दर्शन हुए, पूरा परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गूंज उठा।

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मंदिर के पट खुलने के साथ ही मंत्रोच्चार के बीच बाबा महाकाल का हरिओम जल, पंचामृत, दूध और दही से अभिषेक किया गया। बाबा का आकर्षक शृंगार करने के बाद भस्म आरती की गई।

मंदिर के पुजारी ने महाआरती संपन्न कराई। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल की भस्म आरती के दर्शन किए। अपने आराध्य देव के दर्शन पाने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु देर रात से ही लंबी कतारों में खड़े नजर आए।

बता दें कि सुबह भोर में भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के बाद ढोल-नगाड़ों के साथ बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। कपाट खुलते ही पूरे परिसर में 'जय श्री महाकाल' के जयकारे गूंज उठे। मंदिर परिसर घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार से गुंजायमान हो उठा।

कपाट खुलने के बाद सबसे पहले भगवान को जल अर्पित किया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से बने पंचामृत से बाबा महाकाल का दिव्य अभिषेक किया गया। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के जयकारों और शंखनाद से गूंजता रहा।

बता दें कि बाबा महाकाल के 'निराकार से साकार' रूप का अर्थ शिव के उस आध्यात्मिक और दार्शनिक रूपांतरण से है, जिसमें अनंत, रूपहीन और सर्वव्यापी परमात्मा (निराकार) भक्तों के कल्याण के लिए एक निश्चित और पूजनीय स्वरूप (साकार) में प्रकट होते हैं।

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