मोहम्मद’ दीपक को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, FIR की कार्रवाई पर रोक: उत्तराखंड सरकार से मांगा जवाब
नई दिल्ली। उत्तराखंड के कोटद्वार के जिम संचालक दीपक कुमार, जिन्हें सोशल मीडिया पर ‘मोहम्मद दीपक’ के नाम से भी जाना जाने लगा है, को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज FIR से जुड़ी आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी है। अदालत ने मामले में उत्तराखंड सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
यह मामला उस घटना से जुड़ा है, जिसका वीडियो जनवरी 2026 में सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। घटना में दीपक कुमार का कुछ बजरंग दल कार्यकर्ताओं के साथ विवाद हुआ था। विवाद एक मुस्लिम दुकानदार की दुकान के नाम में ‘बाबा’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर हुआ था। इसके बाद दीपक कुमार के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
दीपक कुमार ने FIR रद्द करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। उनकी याचिका पर सुनवाई जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने की। कोर्ट ने याचिका पर नोटिस जारी करते हुए फिलहाल FIR से निकलने वाली कार्यवाही पर रोक लगा दी।
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार को मामले में जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। यानी फिलहाल इस मामले में दीपक कुमार के खिलाफ FIR के आधार पर आगे की कार्रवाई रुकी रहेगी, जबकि अदालत आगे मामले की सुनवाई करेगी।
हाईकोर्ट ने पहले नहीं दी थी राहत
इससे पहले दीपक कुमार ने उत्तराखंड हाईकोर्ट में भी FIR रद्द करने की मांग की थी, लेकिन हाईकोर्ट ने उस स्तर पर उन्हें राहत नहीं दी थी। 20 मार्च 2026 के आदेश में हाईकोर्ट ने जांच में हस्तक्षेप करने से इनकार किया था और दीपक कुमार को जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया था। साथ ही उन्हें मामले से संबंधित संदेश या वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट नहीं करने को कहा गया था।
अब सुप्रीम कोर्ट ने न केवल FIR से जुड़ी कार्यवाही पर रोक लगाई है, बल्कि हाईकोर्ट के उस आदेश के संचालन पर भी रोक लगा दी है, जिसके तहत दीपक कुमार को इस मामले पर सोशल मीडिया पर पोस्ट करने से प्रतिबंधित किया गया था।
विवाद के बाद चर्चा में आए थे दीपक
दीपक कुमार उस समय चर्चा में आए थे जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ था। वीडियो में उन्हें बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के साथ बहस करते हुए देखा गया था। विवाद एक मुस्लिम दुकानदार की दुकान के नाम में ‘बाबा’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर था।
इस घटना के बाद जब उनसे उनकी पहचान पूछी गई तो उन्होंने खुद को ‘मोहम्मद दीपक’ बताया था। इसके बाद सोशल मीडिया पर उनका यह नाम तेजी से चर्चा में आ गया।
दीपक के वकील ने क्या दलील दी?
सुप्रीम कोर्ट में दीपक कुमार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने पक्ष रखा। उन्होंने अदालत के सामने दलील दी कि दीपक विवाद को शांत कराने के लिए वहां पहुंचे थे और उन्होंने मुस्लिम दुकानदार की मदद करने की कोशिश की थी। उनका कहना था कि ऐसी स्थिति में उनके खिलाफ दर्ज शिकायत और FIR पर सवाल उठते हैं।
सिंघवी ने FIR में लगाए गए धाराओं को लेकर भी सवाल उठाए। रिपोर्टों के मुताबिक, FIR में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 191 के तहत दंगे से संबंधित प्रावधान भी लगाया गया था। सुनवाई के दौरान इस धारा के लागू होने की परिस्थितियों पर भी सवाल उठाए गए।
अब आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद फिलहाल FIR से जुड़ी आगे की कार्यवाही पर रोक रहेगी। उत्तराखंड सरकार को अदालत के नोटिस का जवाब देना होगा। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि दीपक कुमार की FIR रद्द करने की मांग पर आगे क्या आदेश दिया जाए।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट का आदेश FIR को रद्द करने का अंतिम फैसला नहीं है, बल्कि FIR से जुड़ी कार्यवाही पर अंतरिम रोक है। मामले की अगली सुनवाई में सरकार का पक्ष सामने आने के बाद तस्वीर और साफ होगी।
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