'वंदे भारतम्' से छोटे शहरों के स्टार्टअप संस्थापकों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मिल रहा मौका : सीईओ पवन कुमार चंदना

Aug 14, 2026 - 04:55
'वंदे भारतम्' से छोटे शहरों के स्टार्टअप संस्थापकों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मिल रहा मौका : सीईओ पवन कुमार चंदना

स्काईरूट एयरोस्पेस के सह-संस्थापक और सीईओ पवन कुमार चंदना ने गुरुवार को अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी की पहल 'वंदे भारतम्' को देश के लिए जरूरी बताते हुए कहा कि इससे छोटे शहर के स्टार्टअप संस्थापकों को एक प्लेटफॉर्म मिल रहा है।  

मीडिया के साथ बातचीत में चंदना ने कहा कि मैंने इस कार्यक्रम में जज के रूप में भाग लिया। यह पहल भारत के लिए काफी जरूरी है, जिसमें छोटे उद्यमियों को प्लेटफॉर्म दिया जा रहा है। इसमें वे अपने आइडिया को दिखाकर फंडिंग और मेंटरशिप आदि हासिल कर सकते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि भारत में बहुत से स्टार्टअप काफी अच्छा काम कर रहे हैं और स्वदेशी स्तर पर ही पूरी नई टेक्नोलॉजी बना रहे हैं और 'वंदे भारतम्' जैसी पहलों से उन्हें एक मंच मिलेगा।

चंदना ने कहा कि 'वंदे भारतम्' में काफी सारे स्पेस स्टार्टअप आए हुए हैं, जो दिखाता है कि स्पेस सेक्टर में काफी इनोवेशन हो रहा है। ग्लोबल स्पेस सेक्टर में देश की हिस्सेदारी 2 प्रतिशत है और इसे अगर 10 प्रतिशत पर ले जाना है, तो देश को काफी सारे स्पेस स्टार्टअप की आवश्यकता होगी।

'वंदे भारतम्' में आए एक स्टार्टअप फाउंडर ने कहा कि यह एक बहुत अच्छा प्लेटफॉर्म है। यहां कई बड़े वीसी और मेंटर आए हैं, जिनके सामने हमें अपने आइडिया को दिखाने का मौका मिला और हमें यहां फंडिंग की ऑफर भी मिला है।

एक अन्य स्टार्टअप ने कहा कि मैं एक ऐसा एयरक्राफ्ट बना रहा हूं, जो कि हेलिकॉप्टर की तरह ही उड़ान भर सकता है।

उन्होंने आगे कहा कि वंदे भारतम् में मुझे अपना आइडिया दिखाने का मौका मिला है। मुझे करण अदाणी से भी इस पर विस्तार से बातचीत करने का मौका मिला।

अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी के द्वारा लॉन्च की गई पहल 'वंदे भारतम्' को करीब 26,000 एंट्री मिली हैं।

'वंदे भारतम्' को हर राज्य और केंद्र-शासित प्रदेश से आवेदन मिले, जिनमें मोबिलिटी, सस्टेनेबिलिटी, टेक्नोलॉजी, खेती, डिफेंस, हेल्थकेयर, मैन्युफैक्चरिंग, शिक्षा और दूसरे सेक्टर से जुड़े आइडिया शामिल थे।

'वंदे भारतम्' का उद्देश्य होनहार इनोवेटर्स को बेहतरीन मेंटर्स, इंडस्ट्री लीडर्स, पहचान और मौके दिलाना है, ताकि उनके आइडियाज को कामयाब बिजनेस में बदला जा सके। यह पहल गौतम अदाणी के उस गहरे विश्वास पर आधारित है कि जिस देश ने उन्हें सपने देखने, कुछ बनाने और आगे बढ़ने का मौका दिया, उसे कुछ वापस लौटाया जाए और दूसरों के लिए भी ऐसा ही करने के रास्ते बनाए जाएं।

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