कमई आयुर्वेदिक चिकित्सालय में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा, विभाग में हड़कंप
मथुरा/कमई। राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय कमई में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई है। कार्यवाहक क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. गोपाल सिंह पर अनियमित उपस्थिति, ओपीडी बंद रखने, उपस्थिति रजिस्टर में फर्जी हस्ताक्षर होने और विभागीय आदेशों की अवहेलना जैसे गंभीर मामलों के संकेत सामने आए हैं। इन अनियमितताओं ने पूरे जनपद में आयुर्वेदिक चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
निदेशक के आदेशों की अनदेखी
निदेशक आयुर्वेद सेवाएं द्वारा जारी आदेश (पत्र संख्या 344/2ए०जी०-21/92/अधि०, दिनांक 23 जुलाई 2018) में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कार्यवाहक अधिकारियों को प्रशासनिक दायित्वों के साथ-साथ अपने निर्धारित चिकित्सालयों में भी नियमित उपस्थिति देनी अनिवार्य है।
लेकिन जानकारी के अनुसार डॉ. गोपाल सिंह लंबे समय से कमई चिकित्सालय में उपस्थित नहीं हो रहे, जिससे ओपीडी सेवाएं लगभग ठप हैं और ग्रामीण मरीजों को उपचार के लिए भटकना पड़ रहा है।
उपस्थिति रजिस्टर में गड़बड़ी के संकेत
अक्टूबर 2023 के उपस्थिति रजिस्टर में दर्ज हस्ताक्षर वास्तविक हस्ताक्षरों से मेल न खाने की बात सामने आई है। इससे रजिस्टर में फर्जी हस्ताक्षर कराए जाने का संदेह गहरा गया है।
यह सरकारी अभिलेखों से छेड़छाड़ की श्रेणी में आने वाली गंभीर अनियमितता मानी जा रही है।
जनपद के कई चिकित्सालयों में भी अनियमित उपस्थिति
सूत्रों का कहना है कि जनपद के 34 राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में से कई में नियमित उपस्थिति नहीं हो रही, लेकिन इन अनियमितताओं पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की जाती। इस वजह से प्राथमिक स्तर पर आयुर्वेदिक स्वास्थ्य सेवाएं लगातार कमजोर हो रही हैं।
अवैध वसूली के आरोपों से बढ़ी चिंता
सूत्रों के अनुसार जनपद में पंजीकरण कराने वाले कुछ बीएएमएस चिकित्सकों और निजी आयुर्वेदिक फार्मेसियों से प्रशासनिक कार्यों के नाम पर धनराशि लिए जाने की बातें भी सामने आई हैं।
इसके साथ ही सरकारी दवाओं की आपूर्ति के दौरान "कमीशन सेट" की चर्चा भी विभागीय हलकों में बनी हुई है।
जनहित पर सीधा असर
इन सभी अनियमितताओं के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में आयुर्वेदिक चिकित्सा लगभग निष्प्रभावी हो गई है।
अस्पताल में डॉक्टर की नियमित अनुपस्थिति से मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और लोगों को निजी क्लीनिकों पर महंगे उपचार के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
विभाग की साख पर सवाल
यह पूरा मामला आयुर्वेद विभाग की कार्यप्रणाली, पारदर्शिता और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।
प्रशासनिक स्तर पर मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग से जल्द स्पष्ट कार्रवाई की अपेक्षा की जा रही है।
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