“बच्चों को गैस चैंबर में डालने जैसा”: सुप्रीम कोर्ट का दिल्ली-एनसीआर स्कूलों में खेलों पर गहरा ऐतराज़

Nov 19, 2025 - 11:59
“बच्चों को गैस चैंबर में डालने जैसा”: सुप्रीम कोर्ट का दिल्ली-एनसीआर स्कूलों में खेलों पर गहरा ऐतराज़

नई दिल्ली, 19 नवंबर 2025। दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता (AQI) खतरनाक स्तर पर पहुंचने और GRAP-3 लागू होने के बीच, सुप्रीम कोर्ट ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) से अनुरोध किया है कि स्कूलों में नवंबर–दिसंबर में आयोजित होने वाले आउटडोर खेल और एथलेटिक्स कार्यक्रमों को स्थगित करने पर विचार किया जाए। कोर्ट ने कहा है कि इन गतिविधियों को उन महीनों में पुनर्निर्धारित करना चाहिए, जब वायु प्रदूषण में सुधार आए।

कोर्ट की गंभीर चिंता और दलील

  • सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन शामिल हैं, ने सीनियर अधिवक्ता अपराजिता सिंह की दलील को गंभीरता से लिया। उन्होंने कहा कि “बच्चे सबसे ज़्यादा असुरक्षित हैं; अभी खेल आयोजन करना उन्हें गैस चैंबर में डालने जैसा है।” 

  • इस ऐतराज़ को देखते हुए, कोर्ट ने CAQM को “उपयुक्त निर्देश जारी करने पर विचार करने” का आदेश दिया ताकि आउटडोर स्पोर्ट्स इवेंट्स को तब तक आगे बढ़ाया जाए जब तक हवा की गुणवत्ता सुरक्षित नहीं हो जाती।

  • कोर्ट को यह भी बताया गया कि दिल्ली हाई कोर्ट में ऐसी ही याचिका दायर है जिसमें स्कूलों से अनुरोध है कि वे उच्च प्रदूषण वाले महीनों में खेल-प्रतियोगिताएँ न आयोजित करें। 

स्कूली याचिका और स्वास्थ्य जोखिम

  • दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका में यह कहा गया है कि विद्यार्थी समूह ने अनुरोध किया है कि “नवंबर–जनवरी के बीच आउटडोर स्पोर्ट्स ट्रायल और टूर्नामेंट आयोजित न किए जाएँ” क्योंकि इस समय हवा में प्रदूषण नियमित रूप से ‘सेवियर’ या ‘हैज़र्डस’ श्रेणी तक पहुँच जाता है।

  • याचिका में यह भी दावा किया गया है कि प्रदूषण के उस स्तर पर बच्चों की लाँग ग्रोथ (फेफड़ों की वृद्धि) बाधित हो सकती है, उनकी संज्ञानात्मक क्षमता (cognitive function) प्रभावित हो सकती है और उन्हें हृदय-वाहिकीय (cardiovascular) दबाव का सामना करना पड़ सकता है। 

प्रदूषण की गंभीरता और GRAP-3 के आंकड़े

  • दिल्ली-एनसीआर में GRAP (Graded Response Action Plan) स्टेज-3 लागू हो चुका है, जो “गंभीर” वायु प्रदूषण की स्थिति दर्शाता है।

  • नेवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, CAQM के आंकड़ों में एक्यूआई 400 के ऊपर दर्ज किया गया है। ट्रैफिक पुलिस ने GRAP के तहत कार्रवाई भी तेज की है: 14 अक्टूबर से 2 नवंबर के बीच 46,921 वाहनों को चालान किया गया क्योंकि उनके पास Pollution Under Control Certificate (PUCC) नहीं था। 

  • इसके अलावा, 5वीं तक के स्कूलों के लिए हाइब्रिड (ऑनलाइन + ऑफलाइन) क्लासें शुरू की गई हैं ताकि छोटे बच्चों की प्रदूषण-दूषित हवा में लंबे समय रहने की संभावना कम हो सके।

सुप्रीम कोर्ट की अन्य मांगें और निर्देश

  • कोर्ट ने CAQM को न केवल खेल-प्रतियोगिताओं को पुनर्निर्धारित करने के लिए कहा है, बल्कि उन महीनों में नियमित समीक्षा और निगरानी सुनिश्चित करने का सुझाव दिया है, ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इसके अलावा, कोर्ट ने उन राज्यों — दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान — की सरकारों को निवारक कदम उठाने और प्रदूषण नियंत्रण उपायों की नियमित समीक्षा करने का निर्देश दिया है।

  • सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि वायु प्रदूषण से जुड़े मामलों को मासिक आधार पर अदालत में सूचीबद्ध किया जाना चाहिए ताकि जरूरी कार्रवाई समय रहते हो सके। 

पब्लिक और अभिभावकों की चिंता

  • अभिभावकों और स्कूली समुदाय में चिंता यह है कि यदि ऐसे खेल आयोजनों को समय पर स्थगित न किया गया, तो बच्चों को खतरनाक हवा में जोरदार शारीरिक गतिविधि करनी पड़ेगी, जिससे उनकी सेहत पर बड़ा खतरा हो सकता है।

  • दूसरी ओर, स्कूलों के लिए मार्च, अप्रैल, या किसी अन्य “सुरक्षित महीनों” में खेल आयोजन पुनर्निर्धारित करने से शैक्षणिक कार्यक्रम में व्यवधान और शेड्यूलिंग चुनौतियाँ भी पैदा हो सकती हैं — लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस स्वास्थ्य-जोखिम को प्राथमिकता देने का रुख अपनााया है।

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