तेल संकट की अफवाहों के बीच हकीकत: भारत में हालात नियंत्रण में
वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव, खासकर ईरान से जुड़े युद्ध जैसे हालातों के बीच भारत में तेल और गैस को लेकर चिंताएं जरूर बढ़ी हैं, लेकिन वास्तविक स्थिति उतनी गंभीर नहीं है, जितनी अफवाहों में दिखाई जा रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हाल ही में राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संवाद कर इसी मुद्दे पर चर्चा की। यह भारत के संघीय ढांचे की मजबूती को भी दर्शाता है, जहां संकट के समय केंद्र और राज्य मिलकर रणनीति बनाते हैं।
हाल के दिनों में कुछ रिपोर्ट्स और अफवाहों ने आम लोगों में घबराहट पैदा कर दी थी। यह दावा किया जा रहा था कि देश में पेट्रोल-डीजल और एलपीजी का स्टॉक केवल 7-9 दिन का ही बचा है। इसी के चलते कई जगहों पर पेट्रोल पंपों पर भीड़ उमड़ पड़ी, यहां तक कि कुछ स्थानों पर झड़प और अव्यवस्था की स्थिति भी देखने को मिली। लेकिन पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने इन दावों को खारिज करते हुए साफ किया है कि देश में लगभग 60 दिनों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।
सरकार के अनुसार, न केवल पेट्रोल-डीजल बल्कि रसोई गैस (एलपीजी) की आपूर्ति भी पूरी तरह सुरक्षित है। आने वाले 60 दिनों के लिए कच्चे तेल की बुकिंग पहले ही कर ली गई है और करीब 8 लाख टन एलपीजी कार्गो विभिन्न देशों से भारत पहुंच रहा है। रूस, यूनाइटेड स्टेट्स, ऑस्ट्रेलिया, सऊदी अरेबिया, संयुक्त अरब अमीरात और इराक जैसे देशों से लगातार आपूर्ति जारी है। देश के लगभग एक लाख पेट्रोल पंपों में से किसी पर भी ईंधन खत्म होने की स्थिति नहीं है।
एलपीजी की बात करें तो भारत में सालाना करीब 3.3 करोड़ मीट्रिक टन खपत होती है, जबकि रिफाइनरियां रोजाना लगभग 50,000 टन उत्पादन कर रही हैं। मौजूदा हालात को देखते हुए उत्पादन में करीब 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी भी की गई है, ताकि किसी तरह की कमी न होने पाए।
दरअसल, वैश्विक परिदृश्य जरूर चिंताजनक है। मध्य पूर्व में संघर्ष के चलते कई देशों में आपातकाल जैसे हालात बन गए हैं। जापान को अपने तेल भंडार खोलने पड़े हैं, जबकि कई देशों में पेट्रोल की राशनिंग, ऑड-ईवन और ‘कार-फ्री डे’ जैसी व्यवस्थाएं लागू करनी पड़ी हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में भी उछाल देखा गया है, खासकर United States में कीमतों में करीब 20 प्रतिशत से ज्यादा वृद्धि दर्ज की गई है।
इसके बावजूद भारत में स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है। सरकार ने आम जनता पर बोझ न पड़े, इसके लिए पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं की है और आपूर्ति श्रृंखला को सुचारू बनाए रखा है।
स्पष्ट है कि मौजूदा हालात “संकट” जरूर हैं, लेकिन “आपातकाल” नहीं। ऐसे समय में अफवाहों और दुष्प्रचार से बचना जरूरी है। सरकार और संबंधित एजेंसियों की ओर से दी जा रही आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करना ही समझदारी होगी, ताकि अनावश्यक घबराहट और अव्यवस्था से बचा जा सके।
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