नोएडा की चमक के पीछे छुपा अंधेरा: आईटी हब में कर्मचारियों का शोषण, वेतन के लिए सड़कों पर उतरे लोग
नोएडा और ग्रेटर नोएडा को देश के आधुनिक शहरों में गिना जाता है। बड़ी-बड़ी आईटी कंपनियां, ग्लास टावरों में चमचमाते ऑफिस, और रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स की भरमार। यह इलाका भारत की आर्थिक प्रगति की पहचान बन चुका है। मगर इस चमकदार तस्वीर के पीछे एक स्याह हकीकत भी छुपी हुई है, जो आए दिन सामने आ रही है।
यह हकीकत है कर्मचारियों के शोषण, वेतन की चोरी, मानसिक उत्पीड़न, और श्रम कानूनों की खुली धज्जियाँ उड़ाने की। हाल ही में नोएडा और ग्रेटर नोएडा से कई ऐसी घटनाएं सामने आईं, जो न केवल मानवाधिकारों का उल्लंघन हैं, बल्कि देश की श्रम व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती हैं।
1. नोएडा सेक्टर‑63: ओवरटाइम का पैसा नहीं, सैलरी भी कटी हुई
नोएडा सेक्टर‑63 स्थित एक ब्लूटूथ डिवाइस बनाने वाली कंपनी के कर्मचारियों का गुस्सा उस वक्त फूट पड़ा, जब उन्हें महीनों से ओवरटाइम का पैसा नहीं मिला और बेसिक सैलरी भी तय मानकों से कम दी गई।
जब प्रबंधन ने बार-बार शिकायतों को अनसुना किया, तो कर्मचारियों ने कंपनी परिसर में विरोध प्रदर्शन किया और हल्की तोड़-फोड़ भी हुई। मामला इतना गंभीर हो गया कि पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। यह केवल एक कंपनी की बात नहीं है, बल्कि पूरे सेक्टर में ऐसी गतिविधियों की संख्या बढ़ रही है।
2. ग्रेटर नोएडा वेस्ट की Ace Divino सोसाइटी: 18 घंटे की ड्यूटी, दो महीने से बिना वेतन
Ace Divino नामक एक पॉश हाउसिंग सोसाइटी में कार्यरत 70 सुरक्षा गार्ड्स को दो महीने से वेतन नहीं मिला। जब उन्होंने वेतन की मांग की तो प्रबंधन ने उन्हें इस्तीफा देने की धमकी दी।
इतना ही नहीं, इन कर्मचारियों से रोज़ाना 18 घंटे तक की ड्यूटी ली जा रही थी, जो न केवल शारीरिक शोषण है बल्कि श्रम कानूनों का गंभीर उल्लंघन भी है। मजबूरी में कर्मचारियों को हड़ताल करनी पड़ी।
3. Supertech Limited: 5 महीने से वेतन बकाया, कर्मचारी सड़कों पर
नोएडा की जानी-मानी रियल एस्टेट कंपनी Supertech Limited के लगभग 300 कर्मचारियों को सितंबर 2024 से वेतन नहीं मिला है। जब प्रबंधन से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो सभी कर्मचारी IRP (Interim Resolution Professional) कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए।
यह वही Supertech है जिसे पहले भी वित्तीय अनियमितताओं और बिल्डर धोखाधड़ी के मामलों में घसीटा जा चुका है। अब कर्मचारी भी उसी सूची में आ चुके हैं, जिन्हें न्याय की तलाश में प्रदर्शन करना पड़ रहा है।
4. Supertech Vendors: 150 करोड़ रुपये बकाया, ठेकेदारों का विरोध प्रदर्शन
Supertech केवल अपने कर्मचारियों को नहीं, बल्कि 200 से ज्यादा ठेकेदारों को भी करोड़ों रुपए का भुगतान नहीं कर रही है। इन ठेकेदारों का कहना है कि कंपनी पर ₹150 करोड़ से अधिक का बिल बकाया है।
उन्होंने NCLAT (नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल) के समक्ष प्रदर्शन किया और जल्द भुगतान की मांग की। यह केस अब न्यायालय में लंबित है, मगर रोज़ाना कई मज़दूर परिवार भूखे पेट घर लौट रहे हैं।
5. Coco Tawa Welding Industries: प्रताड़ना से हुई दो कर्मचारियों की मौत
इस कंपनी में कर्मचारियों पर मानसिक दबाव, वेतन रोका जाना और काम का अत्यधिक बोझ डालने के गंभीर आरोप लगे हैं। दुखद यह है कि दो कर्मचारियों की मौत इस प्रताड़ना का परिणाम मानी जा रही है।
परिजनों ने मालिक पर प्रत्यक्ष रूप से उत्पीड़न का आरोप लगाया और पुलिस में केस दर्ज कराया गया है। यह मामला श्रमिक आत्महत्याओं से जुड़ा हुआ है, जो एक गहरी सामाजिक समस्या है।
6. स्टार्टेक (Sector‑3): महिला कर्मचारी को वेतन न देकर मानसिक उत्पीड़न
नोएडा सेक्टर‑3 स्थित स्टार्टेक नामक एक कॉल सेंटर में कार्यरत महिला कर्मचारी ने नोएडा पुलिस कमिश्नर को शिकायत पत्र लिखा। उसका आरोप है कि कंपनी ने 20 दिनों का वेतन नहीं दिया और मानसिक उत्पीड़न किया गया।
महिला कर्मचारियों के लिए कार्यस्थल को सुरक्षित बनाना केवल नीतियों की बात नहीं, बल्कि ज़मीनी कार्यवाही की मांग करता है।
7. ग्रेटर नोएडा की मैनपावर कंपनी: भुगतान मांगने पर धमकी और चेक बाउंस
एक निजी मैनपावर सर्विस कंपनी ने अपने कर्मचारियों से काम तो लिया, लेकिन भुगतान देने से इनकार कर दिया। जब कर्मचारियों ने भुगतान के लिए संपर्क किया, तो उन्हें धमकी दी गई और जो चेक दिया गया वह बाउंस हो गया। आखिरकार कर्मचारियों ने पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई।
ये सिर्फ मामले नहीं, एक अलार्म है
इन मामलों से स्पष्ट है कि नोएडा में काम करने वाले हजारों कर्मचारियों को मजदूरी, सुरक्षा, और सम्मान जैसे मूल अधिकारों से वंचित किया जा रहा है। आईटी, सुरक्षा, निर्माण, और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टरों में मजदूरों को उत्पीड़न और शोषण का सामना करना पड़ रहा है।
कानून क्या कहता है?
भारतीय श्रम कानून के अंतर्गत कंपनियों को कर्मचारियों को समय पर वेतन देना, सुरक्षित और मानवतावादी कार्य वातावरण देना और ओवरटाइम का भुगतान करना अनिवार्य है:
Code on Wages, 2019
Payment of Wages Act, 1936
Industrial Disputes Act, 1947
Shops and Establishments Act
मगर इन कानूनों की अनदेखी अब आम हो गई है। प्रशासनिक कार्रवाई बेहद धीमी है, और कर्मचारी न्याय पाने के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
क्या करें पीड़ित कर्मचारी?
श्रम विभाग में शिकायत दर्ज करें
सामूहिक रूप से प्रदर्शन करें या यूनियन बनाएँ
लेबर कोर्ट में केस करें
सोशल मीडिया और पत्रकारों से संपर्क करें
NCLT/NCLAT या RTI का सहारा लें
बदलाव की आवश्यकता है, अब नहीं तो कब?
नोएडा और ग्रेटर नोएडा में जो हो रहा है, वह केवल कुछ कंपनियों का अपराध नहीं, बल्कि एक सिस्टम की असफलता है।
यदि आज हम इस आवाज़ को बुलंद नहीं करेंगे, तो आने वाले वर्षों में हालात और भी बदतर हो सकते हैं। अब वक्त है कि सरकार, प्रशासन, मीडिया और समाज एकजुट होकर इन मुद्दों पर ठोस कार्यवाही करे।
हेमेन्द्र चौधरी
संस्थापक व संपादक
द तहलका खबर
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