नोएडा-ग्रेटर नोएडा में बिल्डरों की होगी बल्ले-बल्ले या बढ़ेंगी जनता की मुश्किलें ? ग्राउंड कवरेज खत्म करने और FAR बढ़ाने के प्रस्ताव पर बड़ा सवाल
नोएडा-ग्रेटर नोएडा में खत्म होगा ग्राउंड कवरेज लिमिट? नई बिल्डिंग पॉलिसी से बदलेगी शहर की सूरत या घटेगी हरियाली
नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में लागू होने जा रही यूनिफाइड बिल्डिंग बायलॉज (Unified Building Bylaws) पॉलिसी को लेकर बहस तेज हो गई है। नई नीति में ग्राउंड कवरेज की सीमा समाप्त करने और FAR (Floor Area Ratio) को कई गुना तक बढ़ाने का प्रस्ताव सामने आया है। इस फैसले को लेकर रियल एस्टेट सेक्टर जहां उत्साहित दिखाई दे रहा है, वहीं आम नागरिक और विशेषज्ञ पर्यावरण, ट्रैफिक और जीवन गुणवत्ता पर इसके प्रभाव को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं।
माना जा रहा है कि यदि यह नीति लागू होती है तो आने वाले समय में नोएडा और ग्रेटर नोएडा का शहरी स्वरूप तेजी से बदल सकता है। लेकिन इसके साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या ज्यादा निर्माण से शहरों में भीड़, प्रदूषण और हरियाली की कमी जैसी समस्याएं बढ़ेंगी?
क्या है यूनिफाइड बिल्डिंग बायलॉज?
उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश पर नोएडा प्राधिकरण, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के क्षेत्रों में बिल्डिंग निर्माण नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी की जा रही है।
नई पॉलिसी का उद्देश्य तीनों प्राधिकरणों में एक समान नियम लागू करना है, ताकि रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स को मंजूरी देने की प्रक्रिया सरल हो सके और निवेश को बढ़ावा मिले।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार वर्तमान नियमों में ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के लिए सामान्य रूप से 2.75 FAR की अनुमति होती है, जिसे अतिरिक्त शुल्क देकर अधिकतम 3.5 FAR तक बढ़ाया जा सकता है।
लेकिन नए प्रस्ताव में FAR को सड़क की चौड़ाई के अनुसार कई गुना तक बढ़ाने की योजना बनाई गई है।
सड़क की चौड़ाई के आधार पर FAR बढ़ाने का प्रस्ताव
शासन को भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार FAR बढ़ाने का प्रस्ताव इस प्रकार बताया जा रहा है:
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सड़क की चौड़ाई |
वर्तमान FAR |
प्रस्तावित FAR |
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18 मीटर |
3.5 तक |
7.0 तक |
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24 से 45 मीटर |
3.5 तक |
8.5 तक |
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45 मीटर से अधिक |
3.5 तक |
FAR असीमित करने का प्रस्ताव |
तीनों प्राधिकरणों ने अपनी फिजिबिलिटी रिपोर्ट शासन को भेज दी है। अब इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी के लिए प्रदेश कैबिनेट में रखा जा सकता है।
ग्राउंड कवरेज सीमा खत्म करने का प्रस्ताव
अब तक ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट्स में बिल्डरों को कुल भूमि के लगभग 35 प्रतिशत हिस्से पर ही निर्माण (Ground Coverage) की अनुमति होती थी।
बाकी जमीन में सेटबैक, पार्किंग, ग्रीन बेल्ट, ओपन स्पेस रखना अनिवार्य होता था।
इससे सोसायटियों में रहने वाले लोगों को खुली हवा, धूप, बच्चों के खेलने की जगह, हरियाली जैसी सुविधाएं मिलती रही हैं।
लेकिन नए ड्राफ्ट के अनुसार यदि बिल्डर अनिवार्य सेटबैक, टावरों के बीच दूरी और केवल 15 प्रतिशत ग्रीन एरिया छोड़ देता है, तो वह बाकी जमीन पर भी निर्माण कर सकता है।
इसका मतलब है कि पहले की तुलना में ज्यादा हिस्से पर बिल्डिंग बनाई जा सकेगी।
शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि FAR बढ़ने से एक ही जमीन पर ज्यादा फ्लैट बनेंगे, जिससे जनसंख्या घनत्व बढ़ेगा। इसका असर इन क्षेत्रों पर पड़ सकता है:
1. ट्रैफिक दबाव
अधिक फ्लैट बनने से वाहनों की संख्या बढ़ेगी, जिससे सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव बढ़ सकता है।
2. पार्किंग की समस्या
यदि पर्याप्त पार्किंग स्पेस नहीं मिला तो सोसायटी और आसपास के क्षेत्रों में पार्किंग संकट बढ़ सकता है।
3. हरियाली में कमी
ग्रीन एरिया घटने से पर्यावरण और वायु गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
4. पानी और बिजली की मांग
जनसंख्या बढ़ने से पानी और बिजली की खपत भी बढ़ेगी।
5. धूप और वेंटिलेशन पर असर
अधिक निर्माण होने से फ्लैट्स में प्राकृतिक रोशनी और हवा कम हो सकती है।
बिल्डरों को होगा बड़ा फायदा
नई नीति से रियल एस्टेट सेक्टर को बड़ा लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है।
अधिक FAR मिलने से एक ही जमीन पर ज्यादा फ्लैट बन सकेंगे प्रोजेक्ट की बिक्री बढ़ेगी बिल्डरों का मुनाफा बढ़ेगा
रियल एस्टेट एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे निवेश बढ़ेगा और नए प्रोजेक्ट्स की संख्या में तेजी आ सकती है।
पहले भी ग्रीन एरिया को लेकर उठते रहे हैं सवाल
कई हाउसिंग सोसायटियों में पहले भी ग्रीन एरिया में निर्माण को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं।
रेजिडेंट्स का कहना रहा है कि बच्चों के खेलने की जगह कम हो जाती है, पार्क और गार्डन खत्म हो जाते हैं, जीवन की गुणवत्ता प्रभावित होती है ऐसे में नई पॉलिसी को लेकर लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं।
सरकार का उद्देश्य – आधुनिक शहर
सरकार का मानना है कि नई नीति से शहरों का विकास तेज होगा और इंफ्रास्ट्रक्चर आधुनिक बनेगा।
यूनिफाइड बिल्डिंग बायलॉज लागू होने से निवेश बढ़ सकता है, हाउसिंग सप्लाई बढ़ेगी , प्रॉपर्टी सेक्टर को गति मिलेगी लेकिन इसके साथ यह भी जरूरी माना जा रहा है कि पर्यावरण और जीवन गुणवत्ता का संतुलन बनाए रखा जाए।
जनता के बीच उठ रहे बड़े सवाल
नई नीति को लेकर लोगों के बीच कई सवाल उठ रहे हैं:
- क्या हरियाली कम हो जाएगी?
- क्या भीड़ बढ़ेगी?
- क्या फ्लैट्स में हवा और धूप कम मिलेगी?
- क्या इंफ्रास्ट्रक्चर इतना मजबूत है कि बढ़ती आबादी संभाल सके?
इन सवालों के जवाब नीति लागू होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएंगे।
यूनिफाइड बिल्डिंग बायलॉज नोएडा और ग्रेटर नोएडा के विकास को नई दिशा दे सकता है, लेकिन यह जरूरी है कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखा जाए।
यदि सही प्लानिंग और सख्त नियमों के साथ इस नीति को लागू किया गया, तो शहरों का विकास तेज हो सकता है। लेकिन यदि हरियाली और ओपन स्पेस कम हुए तो भविष्य में जीवन गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका भी बनी रहेगी।
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