बिना पंजीकरण मथुरा न्यूरो हॉस्पिटल का बेखौफ संचालन
- स्वास्थ्य विभाग के संरक्षण में फल-फूल रहा अवैध अस्पतालों का नेटवर्क
मथुरा। प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का दावा कर रहे हैं, लेकिन मथुरा में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली इन दावों को खुलेआम चुनौती दे रही है। जनपद के मुख्य मार्ग, राधिकबिहार नेशनल हाईवे पर स्थित मथुरा न्यूरो हॉस्पिटल वर्षों से बिना वैध पंजीकरण संचालित हो रहा है, फिर भी न तो सीलिंग की कार्रवाई हुई और न ही जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई शिकंजा कसा गया।
सबसे गंभीर सवाल यह है कि जब अस्पताल का पंजीकरण ही नहीं है, तो मरीजों की जान किस कानून और किस अनुमति के सहारे दांव पर लगाई जा रही है?
मात्र ‘आवेदन’ बना संचालन का लाइसेंस
सूत्रों के अनुसार, मथुरा न्यूरो हॉस्पिटल द्वारा करीब आठ माह पूर्व मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय में पंजीकरण हेतु आवेदन किया गया था। नियमों के अनुसार, जब तक पंजीकरण स्वीकृत न हो, तब तक किसी भी अस्पताल का संचालन अवैध माना जाता है।
इसके बावजूद, सीएमओ कार्यालय द्वारा आवेदन को ही पर्याप्त मानते हुए अस्पताल को संचालित रहने दिया गया, जो न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है बल्कि सीधे-सीधे मरीजों की सुरक्षा से खिलवाड़ भी है।
रिहायशी भूखंड में अस्पताल, अवैध निर्माण पर भी चुप्पी
जानकारी के अनुसार, जिस भवन में मथुरा न्यूरो हॉस्पिटल संचालित है, वह आवास विकास परिषद द्वारा रिहायशी प्रयोजन हेतु स्वीकृत भूखंड पर निर्मित है। इसके बावजूद वर्षों से वहां अस्पताल संचालित है।
हैरानी की बात यह है कि अवैध निर्माण और भू-उपयोग परिवर्तन जैसे गंभीर मामलों पर भी स्वास्थ्य विभाग और अन्य संबंधित विभागों ने कोई कार्रवाई नहीं की।
बेसमेंट में मरीज, नियमों की खुलेआम धज्जियां
सूत्र बताते हैं कि हॉस्पिटल के बेसमेंट में मरीजों को ऑब्जर्वेशन में रखा जाता है, जबकि यह स्पष्ट रूप से नियम विरुद्ध है। इसके बावजूद बीते वर्षों में इस अस्पताल को पंजीकरण मिलता रहा और अब बिना पंजीकरण भी संचालन जारी है।
यह स्थिति यह सवाल खड़ा करती है कि क्या नियम सिर्फ कागजों तक सीमित हैं और जमीनी हकीकत में उनका कोई अर्थ नहीं?
पूरे जिले में फैला अवैध चिकित्सा तंत्र
मथुरा का यह मामला अकेला नहीं है। जिले में दर्जनों ऐसे अस्पताल, नर्सिंग होम, क्लीनिक और पैथोलॉजी संचालित हैं, जहां
• पंजीकरण के बावजूद एमबीबीएस डॉक्टर तैनात नहीं हैं
• इलाज झोलाछाप या वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति वाले चिकित्सक कर रहे हैं
• पैथोलॉजी में टेक्नीशियन खुद रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं
• एक्स-रे और अन्य जांचों की रिपोर्ट बिना रेडियोलॉजिस्ट के दी जा रही हैं
नियमानुसार, ये सभी कार्य प्रशिक्षित पैथोलॉजिस्ट और रेडियोलॉजिस्ट की निगरानी में होने चाहिए, लेकिन जमीनी स्तर पर ऐसा महज 10 प्रतिशत मामलों में ही देखने को मिलता है।
नवीनीकरण में भी ‘खेल’, मानक पूरे न होने पर भी मिली राहत
हर वर्ष मार्च-अप्रैल के दौरान अस्पतालों के पंजीकरण और नवीनीकरण की प्रक्रिया होती है। आरोप है कि जिन अस्पतालों ने न्यूनतम मानक तक पूरे नहीं किए, उनके पंजीकरण नवीनीकृत कर दिए गए, जबकि कुछ अस्पतालों की फाइलें जानबूझकर लटका दी गईं।
क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट की शर्तें कागजों में पूरी दिखा दी जाती हैं, जबकि वास्तविकता इससे कोसों दूर है।
‘सेवा शुल्क’ के कारण कार्रवाई नहीं
सूत्रों से मिली जानकारी में बताया गया है कि बिना पंजीकरण संचालन के बदले संबंधित अधिकारियों को मोटी रकम ‘सेवा शुल्क’ के रूप में दी जाती है, इसी कारण मथुरा न्यूरो हॉस्पिटल समेत कई अवैध चिकित्सा संस्थानों पर कार्रवाई नहीं होती।
यदि यह आरोप सही हैं, तो यह मामला केवल नियम उल्लंघन का नहीं, बल्कि संगठित भ्रष्टाचार का बन जाता है।
अधिकारियों के बयान भी सवालों के घेरे में
जब इस संबंध में सीएमओ से दूरभाष पर बात की गई तो उन्होंने कहा कि अस्पताल का पंजीकरण आवेदन के स्तर पर है।
यह पूछे जाने पर कि क्या मात्र आवेदन से अस्पताल संचालन वैध हो जाता है, उन्होंने इसे गलत मानते हुए कार्रवाई का आश्वासन दिया।
वहीं, पंजीकरण पटल के नोडल अधिकारी ने भी यही तर्क दिया कि आवेदन लंबित है।
सबसे बड़ा सवाल?
कौन-सा कानून, कौन-सा नियम और कौन-सा आदेश यह अनुमति देता है कि केवल आवेदन के सहारे अस्पताल चलाया जाए?
यदि ऐसा कोई कानून नहीं है, तो फिर अब तक सीलिंग, एफआईआर और विभागीय कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
जनता की जान से खिलवाड़
मथुरा न्यूरो हॉस्पिटल का मामला साफ दर्शाता है कि जनपद में स्वास्थ्य सेवाएं नहीं, बल्कि स्वास्थ्य का सौदा चल रहा है।
यह केवल एक अस्पताल का मामला नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का आईना है, जहां नियमों से ज्यादा सेटिंग का वजन है।
अब देखना यह होगा कि सरकार और स्वास्थ्य विभाग इस गंभीर फर्जीवाड़े पर वास्तव में कार्रवाई करते हैं या फिर यह मामला भी फाइलों में दफन कर दिया जाएगा।
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