सील के बाद भी धड़ल्ले से निर्माण, प्राधिकरण की कार्रवाई पर सवाल
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मथुरा। मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण की कार्रवाई के बावजूद यमुनापार क्षेत्र में अवैध निर्माण रुकने का नाम नहीं ले रहा है। राया रोड स्थित ढेरूआ फाटक के पास जिस तीन मंजिला अवैध भवन को 10 फरवरी 2026 को सील किया गया था, उसी भवन में एक बार फिर से निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। यह मामला अब प्राधिकरण की कार्यशैली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
जानकारी के अनुसार, लक्ष्मी नगर क्षेत्र में विकास शुक्ला द्वारा बिना स्वीकृत मानचित्र के व्यावसायिक निर्माण कराया जा रहा था, जिसे प्राधिकरण के सचिव आशीष कुमार के निर्देश पर सहायक अभियंता सुमित नागर, अवर अभियंता बदन सिंह व टीम ने विधिवत सील किया था। लेकिन सीलिंग के कुछ समय बाद ही निर्माणकर्ता द्वारा नियमों को दरकिनार करते हुए दोबारा निर्माण शुरू कर दिया गया।
कानून को खुली चुनौती, अधिनियम की अवहेलना
सील के बाद निर्माण कार्य शुरू होना न केवल प्राधिकरण के आदेशों की अवहेलना है, बल्कि उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम 1973 की भी खुली अवमानना माना जा रहा है। इस तरह की गतिविधियां यह दर्शाती हैं कि निर्माणकर्ता को न तो कार्रवाई का भय है और न ही कानूनी प्रावधानों की परवाह।
राजस्व को हो रहा नुकसान
यदि यह निर्माण वैध स्वीकृति के साथ कराया जाता, तो प्राधिकरण को मानचित्र शुल्क एवं अन्य मदों से लाखों रुपये का राजस्व प्राप्त हो सकता था। लेकिन अवैध रूप से निर्माण कर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
सूचना के बाद हरकत में प्राधिकरण
सील भवन में दोबारा निर्माण की सूचना मिलने पर पत्रकार राहुल शर्मा ने प्राधिकरण के सचिव आशीष कुमार को दूरभाष पर अवगत कराया। सचिव ने मामले को गंभीरता से लेते हुए इसे गलत बताया और संबंधित अधिकारियों को तत्काल जांच कर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
अब अगली कार्रवाई पर नजर
इस पूरे प्रकरण के बाद यदि सील के बाद भी निर्माण जारी रहता है, तो यह प्राधिकरण की साख पर बड़ा प्रश्नचिह्न है। अब देखना यह होगा कि प्राधिकरण इस मामले में क्या ठोस कदम उठाता है और क्या दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाती है या नहीं।