“सेक्टर-10 में सड़क पर ‘हफ्ता वसूली राज’! साप्ताहिक बाजार की आड़ में लाखों की वसूली, प्रशासन मौन”
दुकानदारों से 200 रूपये–300 रूपये प्रति दुकान वसूली, जाम–प्रदूषण से बेहाल नागरिक; सवालों के घेरे में प्राधिकरण की भूमिका
ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा में साप्ताहिक बाजार अब जरूरत नहीं, बल्कि अव्यवस्था और अवैध वसूली का प्रतीक बनते जा रहे हैं। एक ओर जहां ये बाजार आम लोगों को सस्ते सामान उपलब्ध कराते हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ दबंग प्रवृत्ति के लोग इन्हें अपनी “कमाई का जरिया” बना चुके हैं।
हमारी खोजी पड़ताल में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इन बाजारों में दुकान लगाने वाले छोटे व्यापारियों से 200 रूपये से 300 रूपये प्रति दुकान की अवैध वसूली की जाती है। यह वसूली खुलेआम इस दावे के साथ की जाती है कि “यह जगह हमारी है”, जबकि हकीकत में ये सभी स्थान प्राधिकरण की सार्वजनिक सड़कें हैं।
सड़कें बनीं ‘बाजार’, जनता फंसी जाम में
सेक्टर-10 के महागुन मंत्रा, श्री राम अपार्टमेंट, एटीएस और कोको काउंटी को जोड़ने वाले सर्विस रोड जो कि आम जनता के आवागमन के लिए बने हैं आज अस्थायी बाजारों के कब्जे में हैं।
बाजार लगते ही हालात ये हो जाते हैं कि, सड़कें पूरी तरह जाम हो जाती हैं, लोगों को घंटों जूझना पड़ता है, आपातकालीन सेवाएं भी प्रभावित हो जाती हैं।
जाम से बढ़ता प्रदूषण, खतरे में सेहत
धीमी गति से रेंगते वाहनों से निकलने वाला धुआं और लगातार बजते हॉर्न वायु प्रदूषण को बढ़ाते हैं, ध्वनि प्रदूषण से लोगों का जीना मुश्किल हो जात है, बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर सीधा असर पडता है, स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह स्थिति अब दैनिक संकट बन चुकी है।
बाजार खत्म, गंदगी शुरू
साप्ताहिक बाजार खत्म होते ही पीछे छूटता है कचरे के ढेर, सड़ांध और बदबू, सफाई व्यवस्था का पूरी तरह अभाव। सुबह का नजारा ऐसा होता है मानो कोई अस्थायी कूड़ाघर बना दिया गया हो।
लाखों की हफ्तेवार वसूली, जिम्मेदार कौन?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब सार्वजनिक सड़क पर बाजार लगाकर हर हफ्ते लाखों रुपये की अवैध वसूली हो रही है, तो क्या प्राधिकरण को इसकी जानकारी नहीं?
या फिर जिम्मेदार अधिकारी जानकर भी अनजान बने हुए हैं?
सूत्रों से मिली जानकारी में बताया गया है कि इन साप्ताहिक बाजारों से वैदपुरा के किसी दबंग व्यक्ति द्वारा वसूली करायी जा रही है।
यह स्थिति सीधे-सीधे प्रशासनिक लापरवाही या मिलीभगत की ओर इशारा करती है।
इस पूरे मामले पर जब एसीईओ श्रीलक्ष्मी वी. एस. से दूरभाष पर संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि, “मैं दिखवा लेती हूं।”
हालांकि, यह बयान अपने आप में कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
क्या प्राधिकरण को अब तक इस बड़े स्तर पर चल रही अवैध गतिविधि की जानकारी नहीं थी? अगर जानकारी थी, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
अब देखना यह होगा कि एसीईओ के इस आश्वासन के बाद, क्या वाकई मौके पर जांच होगी?
क्या ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण इन अवैध बाजारों और वसूली के खिलाफ कार्रवाई करेगा?
या फिर गरीब दुकानदारों का शोषण, आम नागरिकों की परेशानी, और दबंगों की मनमानी यूँ ही जारी रहेगी?
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